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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्यों की बोर्ड परीक्षाओं पर शिक्षा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता, ये वजह तो नहीं

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नई दिल्ली, 24 मई: हाल के महीनों में कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोला है। यहां तक कि जिस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री कर रहे हों, उसको लेकर भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मीडिया में आकर विवादित बयान दे चुकी हैं। प्रोटकॉल तोड़कर बैठक को लाइव करने वाला दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का मामला भी सुर्खियों में आ चुका है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर राज्यों के साथ आम सहमति बनाने के लिए शिक्षा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की जगह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की है तो सवाल उठने स्वाभाविक हैं।

रक्षा मंत्री की वजह से शिक्षा मंत्री बने मेहमान?

रक्षा मंत्री की वजह से शिक्षा मंत्री बने मेहमान?

न्यूज पोर्टल दीप्रिंट ने एक रिपोर्ट छापी है, जिसके मुताबिक 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं पर हुई केंद्र सरकार की राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी ने राजनाथ सिंह को इस मकसद से सौंपी, ताकि वहां किसी तरह का विवाद होने की गुंजाइश न रहे। पोर्टल ने लिखा है कि बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और उनके पहले मानव संसाधन मंत्री रहे प्रकाश जावड़ेकर और स्मृति ईरानी भी मौजूद थे, लेकिन इन सबकी भूमिका लगभग 'मेहमान' की तरह थी, क्योंकि अध्यक्षता तो रक्षा मंत्री कर रहे थे। यह बैठक 12वीं की बोर्ड परीक्षा और जेईई और एनईईटी की प्रवेश परीक्षाओं को लेकर विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी। हालांकि, एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा है कि 'ऐसा केंद्रीय शिक्षा मंत्री की क्षमताओं पर भरोसे की कमी के चलते नहीं हुआ। क्योंकि, कुछ मुख्यमंत्री भी बैठक में शामिल होने वाले थे और परीक्षाओं का मामला इतना संवेदनशील है, पीएम ने सोचा कि राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ नेता आम सहमति बनाने के लिए ज्यादा उपयुक्त रहेंगे।'

'राजनाथ सिंह के अनुभव का इस्तेमाल'

'राजनाथ सिंह के अनुभव का इस्तेमाल'

भाजपा के जिस नेता से पोर्टल ने बात की है, उसने बताया है कि राजनाथ सिंह का उस मीटिंग में मौजूद रहने का मतलब ये था कि चर्चा मुद्दे से न भटके। उन्होंने कहा, 'बोर्ड परीक्षाओं का मामला था, इसलिए फैसला जल्दी लेना था और यही जरूरी समझा गया कि सभी लोग मौजूद रहें। सरकार को लगा कि अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के चलते राजनाथ सिंह को इसकी अध्यक्षता करनी चाहिए। ' एक और नेता ने बताया कि 21 मई को पीएम को बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सारे विकल्पों के बारे में बताया गया और तय हुआ कि बैठक में सभी स्टेकहोल्डर्स को शामिल किया जाना चाहिए और राजनाथ सिंह को इसकी अध्यक्ष करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'वह यूपी के शिक्षा मंत्री (1991-92)रह चुके हैं और उनका ट्रैक रिकॉर्ड गजब का रहा है। वह टीचर रह चुके हैं इसलिए वह बारीकियों को भी समझते हैं। सरकार नहीं चाहती थी कि बैठक में किसी तरह की दिक्कत हो जाए, क्योंकि वहां मंत्रियों के अलावा विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्री भी रहने वाले थे, इसलिए ऐसे नेता की जरूरत थी, जिसके विचारों को सकारात्मक तौर पर लिया जाए। '

'आम-सहमति बनाने के लिए फैसला'

'आम-सहमति बनाने के लिए फैसला'

बीजेपी के एक और नेता ने कहा है कि परीक्षा करवाने पर फैसला मुख्य रूप से राज्यों को ही लेना है, इसलिए यह जरूर था कि चर्चा सकारात्मक तौर पर शुरू हो। वो बोले, 'इस बैठक के लिए केंद्रीय मंत्रियों स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर को भी बुलाया गया था, क्योंकि ये लोग पहले एचआरडी मंत्रालय का काम देख चुके थे। लेकिन, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता की घोषणा करके सरकार यह संदेश देना चाहती थी कि ये इस मसले पर आम-सहमति बनाने की कवायद है, रुटीन कवायद नहीं। '

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अगले की दिनों में परीक्षा पर फैसला

अगले की दिनों में परीक्षा पर फैसला

दरअसल, हाल के वक्त में ममता और केजरीवाल ही नहीं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की ओर से भी केंद्र सरकार और पीएम मोदी को निशाने पर लेकर ऐसे बयान दिए गए हैं, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में कड़वाहट नजर आई है। इससे पहले पीएम मोदी कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ सहमति बनाने के लिए भी राजनाथ पर भरोसा किया था। पोर्टल का दावा है कि उसने इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए पीएमओ और शिक्षा मंत्रालय से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित करने तक उनका जवाब नहीं मिला। बहरहाल सूत्रों का कहना है कि अब राज्यों के सुझाव मिल चुके हैं, इसलिए शिक्षा मंत्रालय पीएमओ से विचार करके अगले कुछ दिनों में कोई फैसला लेगा। सूत्र ने 90 मिनट वाली परीक्षा की संभावना भी जताई है, जिसमें मल्टीपल-च्वाइस फॉर्मेट में सवाल हो सकते हैं।

English summary
Why did the Defense Minister Rajnath Singh preside over the meeting of the Education Ministers on the board examinations, is that the reason
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