India-China standoff: क्यों लद्दाख की Galwan Valley में एक सड़क निर्माण से तमतमाया है चीन
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच तीन साल बाद रिश्ते फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि साल 1962 में जब दोनों देशों के बीच जंग हुई थी तो उसके बाद से पहला मौका है जब चीन से सटे बॉर्डर पर हालात इतने तनावपूर्ण बने हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि साल 1999 में हुई कारगिल की जंग के बाद भारत को किसी देश से सटी सीमा पर इतने जटिल हालातों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस महामारी के बीच ही चीन ने एक बार फिर सीमा पर स्थितियों को बेकाबू कर दिया है।
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गलवान घाटी तक पहुंची चीनी सेना
जून 2017 भारत और चीन के बीच डोकलाम में हालात असामान्य हुए थे मगर इस बार लद्दाख में स्थितियां जटिल हो गई हैं। भारत और चीन के बीच 3500 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी है। इसके एक छोर पर कश्मीर तो एक छोर पर म्यांमार आता है। पिछले दो हफ्तों से सिक्किम और लद्दाख में सब-कुछ ठीक नहीं है। इस बार तनाव का केंद्र बिंदु है गलवान घाटी। कहा जा रहा है कि चीनी सेना गलवान घाटी तक आ गई है। भारत की तरफ से बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है।

डारबुक-श्योक-डीबीओ पर बन रही सड़क से पारा हाई
पिछले वर्ष बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने डारबुक-श्योक-डीबीओ यानी दौलत बेग ओल्डी में एक सड़क का निर्माण शुरू किया था। यह हिस्सा भारत की सीमा में पड़ता है। जिस जगह पर सड़क निर्माण हो रहा है वह भारतीय सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर है और तकनीकी तौर पर भारत की सीमा है। लेकिन चीन इस बात को मानने पर राजी नहीं है। यह सड़क खासतौर पर गलवान नदी से होकर गुजरती है। सड़क को एलएसी से जोड़ने के मकसद से भारत इस सड़क का निर्माण करा रहा है। चीन को इस बात पर ही आपत्ति है।

अपने हिस्से में निर्माण कार्य करा रहा चीन
भारत अपने हिस्से में एलएसी पर आधारभूत ढांचे को मजबूत कर रहा है। इस सड़क निर्माण का मकसद सेना को निर्जन इलाकों में जल्द से जल्द भेजना है। समय की बचत के अलावा सड़क निर्माण के बाद इंडियन आर्मी को चीन की आक्रामकता के बारे में भी खबर मिलती रहेगी। यही वजह है कि पिछले दो हफ्तों से चीन का पारा हाई है। हैरानी की बात है कि चीन ने अपने स्तर पर सीमा पर निर्माण कार्य जारी रखा है। लेकिन जैसे ही भारत अपनी तरफ निर्माण कार्य शुरू करता है, उसका चेहरा तमतमा जाता है।

सन् 1962 की जंग और गलवान वैली
गलवान घाटी सन् 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में एक बड़ा बिंदु था। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस घाटी पर तीन बार अपना दावा बदला है। मगर ग्लोबल टाइम्स के एक आर्टिकल के मुताबिक अब चीन पूरी गलवान घाटी पर अपना दावा जता रहा है। चीन ने लद्दाख में करीब 5,000 सैनिकों को रवाना कर दिया है। भारत ने भी तय किया है कि वह लद्दाख में सैनिकों की संख्या, क्षमताओं और संसाधनों में इजाफा करेगा। इस बीच विदेश मंत्रालय ने 22 मई को साफ कर दिया है कि सेना की जो भी गतिविधियां लद्दाख और सिक्किम में एलएसी पर हो रही हैं, वह भारतीय सीमा में हैं।












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