अफसोस! चीन को है परवाह, लेकिन केजरीवाल को नहीं

जी हां सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर केजरीवाल की लोकप्रियता आसमान से गिरकर जमीन पर आ गई है। पिछले 10 दिनों में केजरीवाल के नये फैन्स की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई है। 13 जनवरी को जहां एक दिन में केजरीवाल के 68000 नये फॉलोवर्स बने थे, वहीं 20 जनवरी को संख्या गिरकर 30000 हो गई, जबकि 21 जनवरी को मात्र 7600 फॉलोवर्स ही केजरीवाल के साथ जुड़े। सोशल नेटवर्किंग टूल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 दिन में लगातार नये फॉलोवर्स की संख्या में कमी देखी जा रही है।
जिस सोशल मीडिया ने केजरीवाल को जमीन से उठाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक ले जाकर बिठा दिया, उसी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता में भारी गिरावट आम आदमी पार्टी के लिये अच्छे संकेत नहीं हैं। सत्ता में आये अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है कि केजरीवाल को गालियां पड़नी शुरू हो गईं। फेसबुक पर हजारों लोगों ने केजरीवाल के धरने को बेवकूफी और नौटंकी करार दिया। कईयों ने तो यहां तक कहा कि केजरीवाल को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक जाने की जल्दी है, इसलिये वो ये सब कर रहे हैं।
अब बात अगर ट्विटर की करें तो वहां भी कमोवेश यही हाल है। ट्वटिर पर पिछले चार-पांच दिनों से ट्रेंड में चल रहे हैश टैग या तो केजरीवाल का मजाक उड़ा रहे हैं, या उन्हें गाली दे रहे हैं। मजाक उड़ाने वाला सबसे प्रचलित हैशटैग रहा #YoKejriwalSoBrave, #AAPDrama, #aapkinautanki, आदि थे वहीं केजरीवाल के खिलाफ भड़ास निकालने वाले लोगों ने #AAPDrama में केजरीवाल को जमकर खरीखोटी सुनायी।
क्यों गिरी लोकप्रियता?
केजरीवाल की लोकप्रियता उसी दिन से गिरनी शुरू हो गई थी, जिस दिन उन्हीं के साथी विनोद कुमार बिन्नी ने मीडिया के सामने आग उगली और कहा कि आप पार्टी में वॉलेंटियर्स के साथ धोखा किया जा रहा है, लोगों की राय लेकर काम करना एक ढोंग है, क्योंकि आप में वही होता है जो केजरीवाल चाहते हैं। और अगर केजरीवाल का कोई विरोध करता है, तो वो उस पर लाल-पीले हो जाते हैं। उसके तुरंत बाद जब दिल्ली पुलिस और दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती से दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से झड़प हुई और दूसरी तरफ राखी बिड़ला के निर्वाचन क्षेत्र में एक युवती को जला दिया गया, तब केजरीवाल का गुस्सा चरम पर आ गया। केजरीवाल ने आरोपी पुलिस कर्मियों के निलंबन अथवा ट्रांसफर की मांग को लेकर धरना दे दिया।
धरने ने इंटरनेट की गंगा में डुबोया अरविंद केजरीवाल को
दिल्ली पुलिस के विरोध में खड़ा होना तो ठीक है, लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं का दिल्ली पुलिस पर रौब झाड़ना गलत है। केजरीवाल एंड टीम को यह आज से नहीं चुनाव से पहले से मालूम है कि दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार के नहीं केंद्र सरकार के अधीन है। लेकिन फिर भी आप के मंत्री पुलिस पर कंट्रोल करने में जुट गये। और अब जब धरना खत्म हो गया, तो केजरीवाल कह रहे हैं, "मैं लाचार हूं, दिल्ली पुलिस मेरे नियंत्रण में नहीं।"
क्या समस्याएं और नहीं थीं
यह सही है कि दिल्ली में अपराध दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन दिल्ली के पास सिर्फ यही एक समस्या नहीं है। आपको मालूम होना चाहिये कि पिछले पांच साल के बड़ी कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने के मामले में बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद ही शीर्ष पर बने हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर में पोटेंशियल होने के बावजूद कंपनियां उस गति से नहीं आ रही हैं, जिस गति से आना चाहिये। इसी दिल्ली-एनसीआर की नई योजनाओं को लेकर सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक होनी थी, लेकिन केजरीवाल उसमें नहीं गये। एक तरफ बैठक स्थगित कर दी गई तो दूसरी तरफ केजरीवाल ने कहा कि वो सड़क से सारे काम कर रहे हैं।
अगर आप सड़क से सारे काम कर रहे हैं, तो दिल्ली जल बोर्ड की उस महत्वपूर्ण बैठक को क्यों स्थगित करना पड़ा, जिसमें हरियाणा से पानी लेने पर एक बड़ी डील होने वाली थी। उस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी शामिल होना था। अब बैठक कब होगी कुछ पता नहीं, क्योंकि हुड्डा के पास अपने राज्य को लेकर भी तमाम सारे काम हैं। हम आपको बताना चाहेंगे कि जिस दिन हरियाणा पानी देना बंद कर दे, उस दिन दिल्ली के लाखों लोगों को पानी नहीं मिलेगा, नहाना-धोना तो दूर पीने तक के पानी की किल्लत हो जायेगी।
अगर हो जाता आतंकी हमला तो?
पिछले पंद्रह दिनों से आईबी और अन्य खुफिया एजेंसियां सभी सरकारों को अलर्ट कर रही हैं कि सतर्क रहें, क्योंकि 26 जनवरी के आस-पास आतंकी हमला होने की आशंका है। यह हिदायत खास तौर से दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को दी गई। जरा सोचिये जिस समय 4000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी केजरीवाल के धरने को नियंत्रित करने में व्यस्त थे, उस वक्त अगर कोई आतंकी हमला हो जाता, तो केजरीवाल किसे जवाब देते, किसे कोसते और क्या करते? देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना तो सबसे बड़ा अपराध है और यह अपराध कोई और नहीं एक मुख्यमंत्री कर रहा था।
धरने के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि वो गणतंत्र दिवस समारोह में बाधा डालेंगे। इस फुटेज को टीवी चैनलों पर जमकर दिखाया गया, जरा सोचिये अगर सुरक्षा का अभाव देखते हुए दिल्ली में स्थित जापानी दतावास अपने प्रधानमंत्री तक यह सूचना पहुंचा देता कि यहां पर सुरक्षा की कमी है, लिहाजा आप गणतंत्र दिवस पर मत आयें, तो क्या होता?
शायद आम आदमी पार्टी के बुद्धिजीवियों को यह नहीं पता है कि जापान के मुख्यमंत्री शंज़ो ऐब गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आ रहे हैं और इस दौरान 2017 में शुरू होने वाले उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में इंडस्ट्रियल हब के 90 बिलियन डॉलर के दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडॉर प्रोजेक्ट पर तकनीकी सपोर्ट देने के लिये जापान के साथ डील साइन होनी है। और तो और इस डील से सबसे ज्यादा डरा हुआ है तो वो हमारा पड़ोसी देश चीन है, क्योंकि अगर यह डील सफलतापूर्वक साइन हो गई, तो देश अगले 11 वर्षों में एक नई ऊंचाई को छुएगा, रोजगार बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था को नई राह मिलेगी। लेकिन अफसोस चीन शिंजो ऐब की भारत यात्रा को गहराई से ले रहा है, लेकिन आईआईटी के प्रॉडक्ट केजरीवाल नहीं!
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