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योगी राज में गोशालाओं में क्यों दम तोड़ रही हैं गायें?

SAMIRATMAJ MISHRA

उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार गायों की सुरक्षा के लिए चाहे जितने उपाय कर रही हो, न तो गायों की दुर्दशा में कमी आ रही है और न ही गायों की होने वाली मौतों में.

प्रयागराज में 35 गायों की दर्दनाक मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अयोध्या, प्रतापगढ़, गोंडा और मिर्ज़ापुर से भी दर्जनों गायों की मौत की ख़बरें आ गईं.

प्रयागराज में रविवार को भी एक अन्य गोशाला में पांच गायों की मौत हो गई.

शुक्रवार को प्रयागराज की गोशाला में बड़ी संख्या में हुई गायों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में फिर सख़्ती दिखाई.

रविवार देर शाम ज़िलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके उन्होंने गोशालाओं और गायों की सुरक्षा को लेकर सख़्त क़दम उठाने के निर्देश दिए.

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अधिकारी निलंबित

प्रयागराज समेत जिन जगहों पर गायों की मौत हुई है, वहां के कई संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और कुछ के ख़िलाफ़ अन्य दंडात्मक कार्रवाई की गई है.

दरअसल, प्रयागराज के बहादुरपुर ब्लॉक के कांदी गांव की एक अस्थाई गोशाला में गुरुवार को पैंतीस गायों की मौत हो गई.

मौक़े पर पहुंचे अफ़सरों का कहना था कि गायों की मौत बिजली गिरने से हुई जबकि गांव वालों के मुताबिक, वहां बिजली गिरने जैसी कोई घटना हुई ही नहीं, बल्कि गायों की मौत गोशाला में व्याप्त तमाम अव्यवस्थाओं के चलते हुई.

हालांकि बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी गायों की मौत की वजह बिजली गिरने से ही बताई गई.

प्रयागराज के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सीएस वर्मा का कहना था, "सभी 35 जानवरों का पोस्टमॉर्टम कराया गया था. गोशाला में बिजली गिरने की वजह से वहां करंट फैल गया और गायों की मौत हो गई."

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दलदल में फंसकर मौत?

लेकिन कांदी गांव के ही रहने वाले दिनेश यादव का कहना था, "गोशाला तालाब को पाटकर बनाई गई थी. बारिश के चलते तालाब में पानी भर गया और जो अस्थाई तरीक़े से तालाब को पाटा गया था उसकी वजह से आस-पास दलदल भी हो गया. ज़्यादातर गायों की मौत उसी दलदल में फंसकर हो गई."

गांव वालों का दावा है कि मरने वाली गायों की संख्या पैंतीस से कहीं ज़्यादा है और ज़्यादातर गायों को जेसीबी मशीन की मदद से गोशाला के आस-पास ही दफ़ना दिया गया है.

प्रयागराज में गायों की इस मौत पर सरकार ने तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए थे और गोसेवा आयोग के सदस्यों को तत्काल वहां जाने को कह दिया गया था.

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प्रशासन भले ही गायों के मरने की वजह बिजली गिरने को बता रहा हो और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी प्रशासन की बात सच साबित हो रही हो लेकिन बताया जा रहा है कि गांव वालों की तरह मौक़े पर गए गोसेवा आयोग के सदस्य भी इस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं.

हालांकि गोसेवा आयोग का कोई भी सदस्य फ़िलहाल इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बच रहा है लेकिन मौक़े पर मौजूद पत्रकारों से बातचीत में आयोग के सदस्यों ने गोशाला में अनियमिततता की बात को स्वीकार किया है.

इस मामले मे सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन के स्तर पर भी गोशाला में पशुओं की जांच शुरू कर दी गई है. वहीं, रविवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद मुख्यमंत्री योगी ने प्रयागराज के आयुक्त को गायों की मौत से जुड़े पहलुओं की जांच के निर्देश दिए.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस गोशाला में सिर्फ़ पचास गायों को रखने की जगह थी जबकि यहां साढ़े तीन सौ से ज़्यादा गाय रह रही थीं और भूख-प्यास से तड़प रही थीं.

प्रयागराज के बाद अयोध्‍या में भी 30 गायों की मौत की खबर आई है. आरोप हैं कि मृत गायों के शवों को पोस्टमार्टम के बिना गोशाला में ही जेसीबी मशीन की मदद से दफ़ना दिया गया.

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मुख्यमंत्री की चेतावनी

मिर्ज़ापुर में भी रविवार को एक गोशाला में दो दर्जन से ज़्यादा पशुओं की मौत हो गई.

मुख्यमंत्री ने मिर्ज़ापुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी समेत आठ अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है जबकि दो जिलाधिकारियों समेत तीन को नोटिस थमाया गया है.

मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर दोषी लोगों के ख़िलाफ़ गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

मुख्यमंत्री ने गो आश्रय स्थलों के संचालन की संयुक्त जिम्मेदारी ज़िलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को सौंपते हुए उन्हें चारा, टीकाकरण और शेड निर्माण का समुचित बंदोबस्त करने को कहा है.

GETTY IMAGES

इसके अलावा विद्यालयों में गाय रखने की शिकायत मिलने पर ग्राम प्रधान, पंचायत अधिकारी और संबंधित पशुपालक पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने ये भी निर्देश दिया है कि जो लोग गाय का दूध निकालकर छोड़ देते हैं, उन्हें दंडित किया जाए और जुर्माना लगाए जाए.

उत्तर प्रदेश में पिछले एक हफ़्ते में ही अलग-अलग जगहों पर सैकड़ों गायों की मौत हो चुकी है. ज़्यादातर मौतें या तो भूख से हुई हैं या फिर गोशालाओं में हो रही अव्यवस्थाओं के चलते.

मौसम की वजह से भी गायों की मौत हुई है क्योंकि बरसात और उसके बाद होने वाले जलभराव से बचने का इन गोशालाओं में तमाम कोशिशों के बावजूद कोई समुचित इंतज़ाम नहीं है.

सरकार ने न सिर्फ़ बजट में क़रीब ढाई सौ करोड़ रुपये का प्रबंध गोशालाओं के निर्माण और गायों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए किया है बल्कि गायों के नाम पर शराब और टोल पर अतिरिक्त कर भी लगाए गए हैं.

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