रात के तीसरे पहर को क्यों कहते हैं 'मौत का टाइम', जानें इस रहस्य का सच
क्या आप जानते हैं दुनिया में 14 प्रतिशत लोगों की मृत्यु की संभावना सबसे ज्यादा अपने ही जन्मदिन के दिन होती है। यह तो मौत से जुड़े दिन की बात, अब 'मौत के टाइम' का रहस्य भी जान लीजिए। संस्कृति कोई भी हो, धर्म कोई भी हो या देश कोई भीा हो 'मौत का टाइम' सब जगह करीब-करीब एक ही है- रात का तीसरा पहर।

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं दुनिया में 14 प्रतिशत लोगों की मृत्यु की संभावना सबसे ज्यादा अपने ही जन्मदिन के दिन होती है। यह तो मौत से जुड़े दिन की बात, अब 'मौत के टाइम' का रहस्य भी जान लीजिए। संस्कृति कोई भी हो, धर्म कोई भी हो या देश कोई भीा हो 'मौत का टाइम' सब जगह करीब-करीब एक ही है- रात का तीसरा पहर। यह जिंदगी के लिए सबसे खतरनाक होता है। धर्म, आस्था और अंधविश्वास इसे शैतान का समय कहते हैं। जीसस क्राइस्ट की मौत दिन के 3 बजे हुई थी, जिसे शुभ समय माना जाता है, लेकिन इसके ठीक उलट सुबह के 3 बजे को बेहद अशुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस समय शैतान की ताकत चरम पर होती है और इंसान बेहद कमजोर। इस समय अचानक आंख खुलना, तेज पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना आदि महसूस होता है।

'मौत के टाइम' से जुड़े रहस्यों के बारे में विज्ञान के दावे भी हैरान करने वाले
मौत से जुड़े इन रहस्यों के बारे में विज्ञान की भी अपनी राय है। तथ्यों के आधार पर विज्ञान और धर्म दोनों करीब-करीब एक नतीजे पर पहुंचते दिखते हैं। मतलब- रात का तीसरा पहर यानी सुबह 3 से 4 का समय बेहद खतरनाक होता है। विज्ञान कहता है कि सुबह 3 बजे से 4 बजे तक अस्थमा के अटैक की संभावना 300 गुना बढ़ जाती है। इस समय श्वसनतंत्र ज्यादा सिकुड़ जाता है। एंटी इंफ्लेमेट्री हार्मोंस का उत्सर्जन घट जाता है। रात के तीसरे पहर में ब्लडप्रेशर सबसे कम होता है।

अक्सर 3 से 4 के बीच ही टूटती है नींद, बुरे सपनों का भी यही वक्त
बहुत से पैरानॉर्मल रिसर्चर सुबह 3 बजे से 4 बजे के समय 'डेविल्स ऑवर' या 'डैड टाइम' भी कहकर बुलाते हैं। उनका मानना है कि इस समय शैतानी या भूतों की गतिविधियां सबसे ज्यादा होती हैं। ज्यादातर लोग इसी समय में बुरे सपने भी देखते हैं और अक्सर उनकी नींद भी 'मौत के टाइम' यानी सुबह 3 से 4 बजे के बीच टूटती है।

शैतानी समय को हिंदू धर्म में क्यों कहते हैं ब्रह्ममुहूर्त
यह सच है कि हिंदू धर्म में 3 से 4 बजे के वक्त को शैतान का समय बताया नहीं गया है, बल्कि इसे ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय की गई प्रार्थना हमेशा सफल होती है। शायद इसका एक कारण यह भी है कि शैतानी शक्तियों के प्रभाव से बचने के लिए इस समय मानव को ईश्वर की शरण में होना चाहिए, जिससे कि वह अपनी शक्ति को उस वक्त जागृत हो, जिस समय इंसानी शरीर सबसे कमजोर माना जाता है। ब्रह्ममुहूर्त के अलावा 3 से 4 के समय को तांत्रिक साधना के लिए भी काफी अहम माना गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 3 बजे के बाद मस्तिष्क जाग चुका है और शरीर शिथित होता है, दोनों की गति में सामंजस्य नहीं हो पाता है। यह भी एक वजह है कि इस समय इंसान असहज महसूस करता है। कई पैरानॉर्मल एक्सपर्ट सुबह 3 बजे के समय प्रयोग कर चुके हैं और वे इस समय में कई अदृश्य शक्तियों की मौजूदगी का दावा करते रहे हैं।
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