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मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी में चुनावी मैदान से क्यों हटे 111 किसान: लोकसभा चुनाव 2019

By विग्नेश
तमिलनाडु के किसान
Getty Images
तमिलनाडु के किसान

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात के बाद तमिलनाडु के 111 किसानों ने वाराणासी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव न लड़ने का फ़ैसला लिया है.

किसान नेता अय्याकन्नु के नेतृत्व में तमिलनाडु से आए किसानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा प्रदर्शन किया था जिसे दुनियाभर के मीडिया ने अपनी रिपोर्टों में जगह दी थी.

अय्याकन्नु ने वाराणासी से 111 किसानों को प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब अमित शाह से मुलाक़ात के बाद अपना मन बदल लिया है.

अपने प्रदर्शन के दौरान तमिलनाडु के किसानों ने लोगों का ध्यान आकर्षित करने के ऐसे-ऐसे काम किए थे जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है.

उन्होंने चूहे खाए, अपना मूत्र पिया, मल खाया, मरने का नाटक किया, नरमुंडों के साथ नृत्य किया. कुछ तो प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर नंगे भी हो गए.

इन किसानों का कहना था कि तमाम तरह से प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी मांगें नहीं मानी जा रही हैं.

अपने मुद्दों को फिर से सुर्ख़ियों में लाने के लिए इन किसानों ने वाराणसी में लोगों से भीख मांगकर पैसा इकट्ठा करने और उसी पैसे से मोदी के ख़िलाफ़ पर्चा भरने का ऐलान किया था.

राष्ट्रीय दक्षिण भारत रिवर लिंकिग फॉर्मर एसोसिएशन के अध्यक्ष अय्याकन्नु का कहना है कि वो अब चुनाव नहीं लड़ेंगे.

तमिलनाडु के किसान
Getty Images
तमिलनाडु के किसान

उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी उनकी अधिकतर मांगों से सहमत है इसलिए अब वो मोदी के ख़िलाफ़ खड़े नहीं होंगे.

ग़ौर करने वाली बात ये है कि अपना स्वयं का किसान संगठन शुरू करने से पहले अय्याकन्नु राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान यूनियन का हिस्सा थे.



बीबीसी ने उनसे बात की और अब चुनाव न लड़ने की वजह जानी.

जब अय्याकन्नू से पूछा गया कि मुलाक़ात की पहल अमित शाह की ओर से हुई या उनकी तो उन्होंने कहा, "हमने अपनी मांगें भाजपा नेता अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भेजी थीं. इसके बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हमसे संपर्क किया और बताया कि अमित शाह से हमारी मुलाक़ात कराने की व्यवस्था की जा रही है. हमें दिल्ली बुलाया गया और अमित शाह ने हमसे सात अप्रैल को मुलाक़ात की. तमिलनाडु के मंत्री थंगामनी भी वहां मौजूद थे."

अमित शाह से की गई अपनी मांगों के बारे में वो कहते हैं, "नदियों को जोड़ना, कृषि उत्पादों के सही दाम, कृषि क़र्ज़ माफ़ी, किसानों के लिए पेंशन, जीएम बीजों के आयात पर प्रतिबंध और छोटे, मझोले और बड़े किसानों के बीच भेदभाव ख़त्म करना हमारी मुख्य मांगें हैं. अमित शाह ने हमें बताया कि क़र्ज़ माफ़ी के अलावा हमारी सभी मांगों को बीजेपी के घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा. उन पर भरोसा करके हमने चुनाव न लड़ने का फ़ैसला लिया है."

अयाकन्नु
BBC
अयाकन्नु

क्या बीजेपी उनकी मांगें मान लेगी? इस सवाल पर अय्याकन्नू कहते हैं, "हमारा भीख मांगना और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नामांकन करना उनके लिए शर्मनाक होता. इसलिए ही उन्होंने हमें बात करने के लिए बुलाया. हम चुनाव जीतने के लिए वाराणसी से नहीं लड़ रहे थे बल्कि हम अपनी मांगें मनवाना चाहते थे. हम सिर्फ़ अपनी मांगें मनवाने के लिए ही उम्मीदवारी पेश करना चाहते थे. अब उन्होंने हमारी मांगे मान ली हैं तो चुनाव लड़ने की ज़रूरत ही नहीं है."

घोषणा करने के बाद पीछे हटने पर इन किसानों की आलोचना भी हो सकती है. इसी सवाल पर वो कहते हैं, "जब हम प्रदर्शन कर रहे थे तब उन्होंने मुझे ऑडी कार अय्याकन्नु कहकर बदनाम किया. आरोप लगाया गया कि मेरे पास कई करोड़ की संपत्ति है. अब वो कह रहे हैं कि मैंने बीजेपी से पैसा ले लिया है और मैं इसलिए चुनाव नहीं लड़ रहा क्योंकि मैं सांसद बनना चाहता हूं. कुछ कहेंगे कि मैं डर कर पीछे हट रहा हूं. जब महात्मा गांधी ने ब्रितानी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए थे तब उनकी भी आलोचना हुई थी. अब ऐसे ही वो मेरी भी आलोचना कर रहे हैं. क्या उन लोगों को अपनी ज़बान पर काबू नहीं रखना चाहिए?"

अय्याकन्नू कहते हैं, "बीजेपी ने हमें बातचीत के लिए बुलाया. हमें इसका सम्मान करना चाहिए."

लेकिन अगर बीजेपी ने मांगें पूरी करना का अपना वादा पूरा नहीं किया तब वो क्या करेंगे?

वो जबाव देते हैं, "हमने दिल्ली में 141 दिन तक प्रदर्शन किया था. अगर बीजेपी वादा पूरा नहीं करती है तो हम फिर प्रदर्शन करेंगे."

वाराणसी की जंग, आंकड़ों की जुबानी
वर्ष
प्रत्याशी का नाम पार्टी स्‍थान वोट वोट दर मार्जिन
2014
नरेंद्र मोदी भाजपा विजेता 5,81,022 56% 3,71,784
अरविंद केजरीवाल आप उपविजेता 2,09,238 20% 0
2009
डॉ मुरली मनोहर जोशी भाजपा विजेता 2,03,122 31% 17,211
मुख्तार अंसारी बीएसपी उपविजेता 1,85,911 28% 0
2004
डॉ राजेश कुमार मिश्रा कांग्रेस विजेता 2,06,904 33% 57,436
शंकर प्रसाद जयस्वाल भाजपा उपविजेता 1,49,468 24% 0
1999
शंकर प्रसाद जयस्वाल भाजपा विजेता 2,11,955 34% 52,859
राजेश कुमार मिश्रा कांग्रेस उपविजेता 1,59,096 25% 0
1998
शंकर प्रसाद जयस्वाल भाजपा विजेता 2,77,232 43% 1,51,946
दीना नाथ सिंह यादव सीपीएम उपविजेता 1,25,286 19% 0
1996
शंकर प्रसाद जयस्वाल भाजपा विजेता 2,50,991 45% 1,00,692
राज किशोर सीपीएम उपविजेता 1,50,299 27% 0
1991
शीश चंद्र दीक्षि भाजपा विजेता 1,86,333 41% 40,439
राज किशोर सीपीएम उपविजेता 1,45,894 32% 0
1989
अनिल शास्त्री जेडी विजेता 2,68,196 62% 1,71,603
श्याम लाल यादव कांग्रेस उपविजेता 96,593 22% 0
1984
श्याम लाल यादव कांग्रेस विजेता 1,53,076 42% 94,430
ऊदल सीपीआई उपविजेता 58,646 16% 0
1980
कमलापति कांग्रेस(आई) विजेता 1,29,063 37% 24,735
राज नारायण जेएनपी(एस) उपविजेता 1,04,328 30% 0
1977
चंद्रशेखर बीएलडी विजेता 2,33,194 66% 1,71,854
राजा राम कांग्रेस उपविजेता 61,340 17% 0
1971
राजा राम शास्त्री कांग्रेस विजेता 1,38,789 47% 85,848
कमला प्रसाद सिंह BJS उपविजेता 52,941 18% 0
1967
एस एन सिंह सीपीएम विजेता 1,05,784 38% 18,167
आर सिंह कांग्रेस उपविजेता 87,617 31% 0
1962
रघुनाथ सिंह कांग्रेस विजेता 1,04,682 40% 45,907
रघुवीरा जेएस उपविजेता 58,775 22% 0
1957
रघुनाथ सिंह कांग्रेस विजेता 1,31,087 54% 71,926
शेवमंगल राम आईएनडी उपविजेता 59,161 25% 0
BBC Hindi
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English summary
Why 111 farmers left for election in Varanasi against Modi Lok Sabha elections 2019

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