अगला उपराष्ट्रपति कौन? रेस में BJP के ऐसे नेताओं का दबदबा! पार्टी ने नामों की शॉर्टलिस्ट की तैयार
Who will be Next Vice President: जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफे के बाद जहां एनडीए में हलचल मच गई है, वहीं अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व नए उपराष्ट्रपति की तलाश में जुट गया है। शुरुआत में इस इस्तीफे ने सबको चौंका दिया, लेकिन अब असली चिंता इस बात को लेकर है कि उनकी जगह कौन लेगा? यानी अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा?
सूत्रों के मुताबिक, अगला उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सर्कल से कोई अनुभवी भाजपा नेता हो सकता है, जिसमें राज्यसभा की कार्यवाही को कुशलता से संभालने की राजनीतिक समझ हो। रिपोर्ट ये भी है कि भाजपा ने नेताओं की शॉर्टलिस्ट तैयार कर ली है। फाइनल फैसला इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश से लौटने के बाद किया जाएगा।

भाजपा के भीतर से हो सकता है चयन, रेस में पूर्व राज्यपालों का दबदबा!
जगदीप धनखड़ से पहले भी कुछ उपराष्ट्रपति गैर-भाजपाई पृष्ठभूमि से रहे हैं। खुद जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहने के बाद उपराष्ट्रपति बने थे और अतीत में जनता दल और कांग्रेस से भी जुड़े रहे थे। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी सूत्रों ने कहा है कि भाजपा अपने ही वरिष्ठ नेताओं में से किसी को चुन सकती है, जिनके पास राज्यपाल जैसा प्रशासनिक अनुभव हो।
उपराष्ट्रपति पद को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने बताया है कि संभावित उम्मीदवारों की एक शॉर्टलिस्ट तैयार की जा रही है। इस रेस में पूर्व राज्यपालों का दबदबा होगा। पार्टी वैसे नेताओं के नामों को ही उपराष्ट्रपति के लिए विचार में लाएगी, जिनके पास राज्यपाल का अनुभव है। NDA के घटक दलों को भी इस बारे में अनौपचारिक जानकारी दी गई है, कि नया चेहरा भाजपा से ही होगा।
मोदी की विदेश यात्रा के बाद होगा ऐलान
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया कि, "प्रधानमंत्री मोदी UK और मालदीव की यात्रा के बाद 26 जुलाई तक लौट आएंगे, तब तक संभावित उम्मीदवारों की एक छोटी लिस्ट तैयार कर ली जाएगी और उनके आने के बाद नामों पर चर्चा कर उसे फाइनल कर दिया जाएगा।''
क्यों बढ़ा सरकार और धनखड़ के बीच तनाव?
सूत्रों के मुताबिक धनखड़ और केंद्र सरकार के बीच संबंधों में पहले से ही तनाव मौजूद था, खासकर जब उन्होंने न्यायपालिका और अन्य संस्थानों पर खुले तौर पर टिप्पणियां कीं। सरकार का मानना था कि उन्हें ऐसे मुद्दों पर थोड़ा अधिक संयम और कूटनीति दिखानी चाहिए थी।
राज्यसभा में विपक्ष के साथ टकराव के कई अवसरों पर भी, सरकार को लगा कि धनखड़ की शैली से सरकारी पक्ष को पूरी तरह समर्थन नहीं मिल पाया।
इस्तीफा क्यों बना ऐतिहासिक और अप्रत्याशित?
एक और बड़ा कारण उनके इस्तीफे का यह बताया गया कि जब विपक्ष ने राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के खिलाफ पहली बार महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, तो सरकार ने खुलकर उनका बचाव नहीं किया। उपसभापति हरिवंश ने उस प्रस्ताव को खारिज जरूर कर दिया, लेकिन कोई भी वरिष्ठ मंत्री सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में नहीं आया, जिससे वे बेहद निराश हुए।
चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारी, शेड्यूल अगले सप्ताह हो सकती है घोषित!
भारत निर्वाचन आयोग ने उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार चाहती है कि नई नियुक्ति जल्द हो, ताकि यह विवादपूर्ण अध्याय समाप्त हो सके और सदन की गरिमा फिर से बहाल हो। उपराष्ट्रपति चुनाव का शेड्यूल अगले सप्ताह घोषित होने की संभावना है। जगदीप धनखड़ का इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक अहम घटना है। अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के उस फैसले पर टिकी हैं, जो अगली बार राज्यसभा की गद्दी को संभालने के लिए किसी अनुभवी और संगठन-समझ रखने वाले नेता को चुनने वाले हैं।












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