जानिए कौन हो सकता है सोनिया का अगला रोबोट

सबसे पहला नाम उन्हीं के बेटे राहुल गांधी का आता है। लेकिन विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित रूप से एक बड़ी हार का सामना करने के बाद यह मुश्किल लग रहा है कि कांग्रेस राहुल गांधी को अपने प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में घोषित करेगी, वहीं मनमोहन सिंह भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता के बीच कोई उत्साह पैदा नहीं कर रहे हैं। लिहाजा मनमोहन अब एक बार फिर पीएम कैंडिडेट नहीं बनेंगे। अगर इन दोनों की बात करें तो यह ध्यान देने योग्य है कि विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी की रैलियों के बावजूद राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस को भुला देने वाली हार का सामना करना पड़ा है। अत: राहुल के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित होने पर भाजपा के लिए राह और भी आसान ही हो जाएगी।
कयास लगाए जा रहे हैं कि अब कांग्रेस प्रियंका गांधी को फ्रंटफुट पर ला सकती है लेकिन राबर्ट वाड्रा के जमीनी विवाद में फंसे होने के कारण यह भी एक मुश्किल कदम होगा। प्रियंका अभी तक कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी में चुनाव प्रचार करती रही हैं और आज के हालात में वही ऐसी हैं जिससे कांग्रेस का परिवारवाद भी कायम रहेगा और पार्टी का परंपरागत वोटर भी, लेकिन प्रियंका के राजनीति में आने से पहले ही गांधी परिवार ने मना कर दिया है।
कांग्रेस में कई अन्य मंत्री भी हैं जिनको पार्टी आगे ला सकती है, जिसमें ए के एंटनी, कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम जैसे नेता हो सकते हैं। जिनका भले ही जमीनी आधार न हो पर कांग्रेस उनका सहारा लेकर हालात बद से बदतर होने से बच सकती है। ऐसे में ए के एंटनी एक ऐसे ही नेता है जिनकी कमियां जनता के सामने उजागर नहीं हुई हैं और वह कांग्रेस के पीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।

प्रियंका गांधी
कांग्रेस के पास गांधी परिवार का अंतिम कार्ड यही है, जिस पर वह भरोसा कर सकती है लेकिन रॉबर्ट वाड्रा का नाम जमीन घोटाला से जुड़ने के बाद कांग्रेस के लिए यह भी खतरे से खाली नहीं होगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि प्रियंका, राहुल की अपेक्षा राजनीतिक रूप से अधिक परिपक्व हैं, वहीं कांग्रेस का परंपरागत वोटर प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखता है।

पी चिदंबरम
यूपीए के लिए कई मंत्रालय संभाल चुके पी चिदंबरम को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर कांग्रेस उन्हें प्रमोट कर सकती है। वह इस समय वित्त मंत्रालय संभाल रहे हैं ऐसे में कांग्रेस उन्हें खुद के लिए निभाई गई जिम्मेदारियों के लिए पुरस्कृत कर उनका कद बढ़ा सकती है। वह राहुल से तो बेहतर ही साबित होंगे।

ए के एंटनी
इस समय रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी निभा रहे, ए के एंटनी कांग्रेस के लिए दूसरे मनमोहन सिंह साबित हो सकते हैं, जिनकी कमजोरियां या व्यक्तित्व जनता में उजागर नहीं हुआ है। गौर हो कि इसी तरह सन 2004 में मनमोहन सिंह अचानक राजनीतिक परिदृश्य पर नजर आये थे जबकि इसके पहले वह देश के लिए कई जिम्मेदार पदों की भूमिका निभा चुके थे। मनमोहन पर राहुल के लिए कांग्रेस की विरासत संभालने का भी आरोप लगता रहा है।

कपिल सिब्बल
इस समय देश के कानून मंत्री कपिल सिब्बल पहले भी कई बार सामने आकर कांग्रेस का बचाव कर चुके हैं, बाबा रामदेव के आंदोलन के समय जब कांग्रेस बैकफुट पर थी तो सिब्बल ने ही रामदेव का आंदोलन बेअसर किया था। उनकी योग्यता पर भी किसी को संदेह नहीं है। वह मोदी को बहस करने के लिए चुनौती भी दे चुके हैं।

राहुल गांधी
अंतिम विकल्प के तौर पर कांग्रेस राहुल के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ सकती है, भले ही राहुल के नाम पर कांग्रेस को वोट न मिले पर कांग्रेस का परंपरागत और भाजपा को वोट न करने वाला तबका राहुल को वोट दे सकता है।

नहीं मिला रोबोट तो सोनिया
सन 2004 में प्रधानमंत्री पद को नकारने वाली सोनिया गांधी मुश्किल हालात में खुद फ्रंटफुट पर आकर पार्टी का नेतृत्व करने की ठान सकती हैं। जिससे कि पार्टी में नये उत्साह का संचार हो और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा का मुकाबला कर सके क्योंकि चार राज्यों में खराब प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका है, वहीं रायबरेली से जीत हासिल करना भी उनके लिए टेढ़ी खीर नहीं होगा।












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