मोदी की नई कैबिनेट में कौन होगा IN कौन होगा OUT, अमित शाह पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत होने जा रही है। 30 मई को पीएम मोदी एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बीच सबकी निगाहें मोदी के नए कैबिनेट पर टिकी है। मीडिया से लेकर राजनीतिक जानकार और जनता जानना चाहती है कि मोदी की अगली कैबिनेट की शक्ल- सूरत कैसी होगी। लोग जानना चाहते हैं कि नई कैबिनेट में कौन इन करेगा और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इन सबके बीच सबका ध्यान इस बात पर हैं कि अमित शाह सरकार का हिस्सा बनेंगे या संगठन का।

मोदी के नए कैबिनेट पर एक नजर
नए सरकार के गठन से पहले इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है कि नए कैबिनेट में किसे जगह मिलेगी और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। कौन-कौन से नए चेहरों की जगह मिलेगी। क्या जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को सरकार में जगह मिलेगी। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में जबरदस्त प्रदर्शन किया है तो क्या बंगाल को केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल में जगह मिलेगी। पश्चिम बंगाल से बाबुल सुप्रियो और एसएस अहलूवालिया को सरकार ने पिछली कैबिनेट में जगह दी, लेकिन इस बार पार्टी 18 सांसद लोकसभा में चुनकर आए हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में पश्चिम बंगाल से मंत्रियों की संख्या 3-4 तक जा सकती है।

शाह संगठन या सरकार में
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। अब तक सबको सांसद बनाने वाले अमित शाह पहली बार सांसद बनें हैं। ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी है कि अमित शाह को सरकार में जगह मिलेगी या फिर वो संगठन को और मजबूत करने में जुटे रहेंगे। अगर अमित शाह को सरकार में लाने का फैसला लिया जाता है, तो पार्टी को नए अध्यक्ष पर विचार करना होगा। ऐसे में सीसीएस के प्रारुप में बदलाव होगा।

कौन हो सकते हैं बाहर
पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। जेटली लंबे वक्त से बीमार है। जेटली अगर स्वास्थ्य कारणों से सरकार से बाहर रहते हैं तो नए वित्त मंत्रालय का प्रभार किसे मिलेगा ये भी देखना होगा। वहीं पार्टी की एक और वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्वास्थ्य स्थित अच्छी न होने के बावजूद सुषमा सशक्त विदेश मंत्री की भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उनकी ये सक्रियता आगे कायम रहती है या नहीं, इसे देखना होगा। दरअसल सुषमा स्वराज ने अपने स्वास्थ्य का हवाला देकर 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था, जिसका पार्टी ने सम्मान किया। अब देखना होगा कि वो मंत्री पद को लेकर क्या फैसला करती हैं।

इन राज्यों के प्रतिनिधियों को मौका
माना जा रहा है कि नार्थ-ईस्ट से भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व बढ़ने की संभावना है। वहीं झारखंड, हरियाणा और दिल्ली में अगले साल चुनाव होने हैं, ऐसे में इन राज्यों के प्रतिनिधियों को खास जगह मिल सकती है। वहीं जेडीयू की ओर से आरसीपी सिंह और ललन सिंह के नामों की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि लोजपा से चिराग पासवान को सरकार में जगह मिल सकती है। वहीं यूपी से अपना दल की अनुप्रिया पटेल को फिर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभवना प्रबल है।












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