Who was Aurangzeb: क्या थी कट्टर शासक औरंगजेब की आखिरी इच्छा? आज भी खुली है कब्र

औरंगजेब बहुत कट्टर शासक माना जाता था। अपने शासनकाल में उसने जितने लोगों पर जुर्म किए, अंत समय में उतना ही पछतावा भी किया। औरंगजेब की इच्छा थी कि उसके मकबरे पर छाया ना दी जाए।

Aurangzeb

Aurangzeb last wish: भारत पर लगभग आधी सदी तक राज करने वाला शासक औरंगजेब ऐसा शासक था, जिसने अकबर के बाद सबसे लंबे समय तक शासन किया। औरंगजेब को बेहद क्रूर शासक माना जाता था।

अपनों का खून बहाया
औरंगजेब को सबसे कट्टर शासक ऐसे ही नहीं कहा जाता। अपने सगे संबंधियों का खून बहाकर ये मुगल बादशाह गद्दी पर बैठा रहा। हैरत की बात है कि अपने वृद्ध पिता शाहजहां को उनके आखिरी पलों तक औरंगजेब ने कैदी बनाकर रखा।

मुस्लिमों पर लगाया जजिया कर
औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर 1618 को दोहाद में अपने दादा जहांगीर के शासनकाल में हुआ था। माना जाता है कि औरंगजेब ने कई हिंदू मंदिर तुड़वाने के प्रयास किए थे। कहा जाता है कि मुगल शासक ने गैर मुस्लिमों पर जजिया कर लगाया और लाखों हिंदुओं को जबरदस्ती मुस्लिम बनाने पर मजबूर किया।

काफी खराब हुआ औरंगजेब का अंत
इतने लंबे समय तक भारत में राज करने वाले शासक औरंगजेब का अंत काफी खराब हुआ। अपने आखिरी समय में औरंगजेब ने खुद को पापी और नाकाम बादशाह कहा था। औरंगजेब ने कहा था कि उसने जो दूसरों के साथ किया है वही उसके अपने लोगों के साथ भी होगा। चलिये जानते हैं कि जीवन के अंतिम पलों में औरंगजेब ने खुद को नाकाम क्यों कहा और क्यों औरंगजेब का अंत इतना बुरा हुआ।

क्या थी औरंगजेब की आखिरी इच्छा?
कहा जाता है कि औरंगजेब ने हिंदुओं की कमर तोड़कर रख दी थी। अकबर द्वारा बंद किए गए जजिया कर को औरंगजेब ने दोबारा लगा दिया था। उसे गैर मुस्लिमों से नफरत थी। औरंगजेब को मुगल सम्राज्य का सबसे शक्तिशाली सम्राट माना गया। बेशक औरंगजेब की मौत तो सामान्य ही हुई लेकिन मरने से पहले ही औरंगजेब ने सुनिश्चित किया कि आम जन को इसके बारे में पता ना चले।

'सादगी से तैयार की जाए कब्र'
ऐसा औरंगजेब ने इसलिए किया क्योंकि ऐसा करने पर उत्तराधिकार को लेकर लड़ाई हो सकती थी। जितना दिलचस्प औरंगजेब के आखिरी पल भी हैं। औरंगजेब ने मरते वक्त खुद को नाकाम राजा बताया। उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा में कहा था कि उनका मकबरा सादा ही रखा जाए। उन्होंने ये इच्छा जताई थी कि उनकी कब्र सादगी से तैयार की जाए जिसके ऊपर कोई छत ना हो।

क्यों खुली है औरंगजेब की कब्र?
इसके साथ ही औरंगजेब की इच्छा थी कि उसके मकबरे पर उतनी ही राशि खर्च की जाए जितनी कि उसने कमाई है। ये रकम उसने महलदार के पास रखवाई थी। औरंगजेब ने कुरान की प्रतियां लिखकर तीन सौ पांच रुपये कमाए थे। इस रकम का उपयोग उसने गरीबों को दान करने के लिए कहा था। औरंगजेब की अपनी कब्र खुली रखने की इच्छा के पीछे का कारण था कि खुदा से सीधे मिल सके।

आखिरी पलों में थी ये इच्छा
माना जाता है कि अंत समय में औरंगजेब के अंदर ये भावना घर कर गई थी कि उसने अपनी जिंदगी में बहुत पाप किए हैं। यही कारण था कि उसने अपनी कब्र पर छाया होने से भी गुरेज किया। मौत के बाद भी औरंगजेब अपने गुनाहों की सजा पूरी करना चाहता था।

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