कौन था मोस्ट वांटेड टेररिस्ट जीनत-उल-इस्लाम जिसको सेना ने ढेर कर पूरा किया उसका आतंकी सफर

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के काटपोरा में रविवार को एनकाउंटर में दो आतंकियों को मार गिराया, जिसमें एक मोस्ट वांटेड की लिस्ट में भी शामिल था। सेना ने एनकाउंटर में जीनत-उन-इस्लाम के शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया, जो लंबे समय से अल-बदर का कमांडर था और घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इस एनकाउंटर में जो दूसरा आतंकी मारा गया है उसका नाम शकील दार है। इस्लाम A++ कैटेगरी का आतंकी था, जिसने पिछले साल नवंबर में हिजबुल मुजाहिद्दीन का साथ छोड़कर अल-बदर आतंकी गुट में मिल गया था। इस्लाम 2015 में घाटी में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देता रहा है।

2008 में पहली बार हुआ था गिरफ्तार

2008 में पहली बार हुआ था गिरफ्तार

सेना के हाथों मारा गया जीनत-उल-इस्लाम पिछले 10 सालों से मिलिटेंट्स के साथ काम करता रहा है। इस्लाम जब 20 साल का था, तब उस वक्त मिलिटेंट्स के साथ काम करने के आरोप में उसे पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत पुलिस ने हिरासत में लिया था। दक्षिणी कश्मीर के सोपियां जिले का रहने वाला इस्लाम ने छोटी से उम्र में ही आतंकियों का साथ देना शुरू कर दिया था। हालांकि, 2008 में पहली बार गिरफ्तार होने के बाद 2011 में जेल से निकलते ही इस्लाम घाटी में आतंकियों के साथ मिल गया था।

लश्कर से लेकर अल-बदर तक सफर हुआ खत्म

लश्कर से लेकर अल-बदर तक सफर हुआ खत्म

इस्लाम की तीन साल की एक बेटी है और वह अपने किसान पिता का सबसे बड़ा बेटा था। 2011-12 के दौरान जब घाटी में तनाव अपने सबसे उच्च स्तर पर था और सैकड़ों पढ़े लिखे युवा भ्रमित होकर आतंकवाद का दामन थाम रहे थे, उस वक्त इस्लाम ने भी यही रास्ता चुना था। इस्लाम ने सबसे पहले 2015 में पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाला आतंकी संगठन लश्कर ए-तैयबा का सदस्या बना, उसके बाद उसने कुछ साल हिजबुल के लिए काम और फिर साल नवंबर में ही वह अल-बदर में शामिल हो गया।

आतंक का सफर खत्म करने से पहले सेना ने दिया था सरेंडर का मौका

आतंक का सफर खत्म करने से पहले सेना ने दिया था सरेंडर का मौका

आर्ट्स में डिग्री में हासिल कर चुका जीनत-उल-इस्लाम सेना की उस मोस्ट वांटेड की लिस्ट में शामिल था, जिसमें जाकिर मूसा जैसे खूंखार आतंकी शामिल है। एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि रविवार को एनकाउंटर में इस्लाम को मारने से पहले उसे सरेंडर करने का मौका दिया था, लेकिन वह नहीं माना और लगातार फायरिंग करता रहा। उसी दौरान सेना ने मौका देखकर उसके शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया।

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