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कौन हैं VK पांडियन? जिनके VRS लेते ही पटनायक सरकार की कैबिनेट का दर्जा मिला

ओडिशा विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर अभी से सियासी हलचल राज्य में तेज हो गई हैं। जिसके चलते मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के सेक्रेटरी रहे आईएएस अधिकारी वीके पांडियन के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (‌‌‌VRS) लेते ही उन्हें कैबिनेट का दर्जा दे दिया गया।

वीके पांडियन, पटनायक के करीबियों में गिने जाते हैं। 2011 से पटनायक के सहयोगी के पद पर पांडियन थे। अब पटनायक ने पांडियन पर भरोसा जताया है। पटनायक के महत्वाकांक्षी परिवर्तनकारी पहल 5T के अध्यक्ष होंगे और सीधे मुख्यमंत्री को ही रिपोर्ट करेंगे। आइए जानते हैं कौन है वीके पांडियन?

VK Pandian

तमिलनाडु में 25 मई 1974 को जन्मे वीके पांडियन 2000 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है। पांडियन, अंग्रेजी और ओडिया के अलावा तमिल और हिंदी भाषा के धनी है। 2002 में वह कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ के सब कलेक्टर नियुक्त हुए। 2005 में पहली बार मयूरभंज जिले के डीएम बने। 2007 में सीएम के गृह जनपद गंजाम में ट्रांसफर हो गया।

...तो ऐसे बने सीएम के करीबी
2007 में नवीन पटनायक का गृह जनपद गंजम में डीएम पद पर पांडियन ने अपनी शानदार कार्यशैली की पेशकश की। जिसके बाद वह सीएम के विश्वासपात्र नौकरशाहों में शुमार हो गए। यहीं से पांडियन की जिंदगी में खास बदलाव आ गया। 2011 में पांडियन को मुख्यमंत्री कार्यालय में पोस्टिंग मिली। उसके बाद सीएम के निजी सचिव बन गए।

पटनायक की योजनाओं के कर्णधार 'पांडियन'
ओडिशा सरकार की सत्ता पर 5 बार नवीन पटनायक काबिज रहे। इस दौरान उन्होंने राज्य के समग्र विकास के लिए 5T कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ किया। जिसकी कमान अपने खास नौकरशाह पांडियन को सौंपी। पांडियन ने मो सरकार, श्रीमंदिर परिक्रमा परियोजना और बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना (बीएसकेवाई) सहित ओडिशा सरकार की पहल को तैयार करने में पटनायक के सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह अस्पतालों और हाई स्कूलों को बदलने और राज्य भर में प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिरों को पुनर्स्थापित करने से संबंधित सरकारी परियोजनाओं में भी शामिल रहे हैं।

कब सुर्खियों में आए पांडियन
हाल ही में राज्य हेलीकॉप्टर का उपयोग करके विभिन्न जिलों के अपने तूफानी दौरे के लिए सुर्खियों में आए। जिसके चलते पांडियन विपक्ष में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने सेवा शर्त मानदंडों के उल्लंघन के आरोप में निशाने पर आ गए।

एक नजर में पांडियन का सफर

  • 2000 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी
  • 2002 में वह कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ के सब कलेक्टर नियुक्त
  • 2005 में पहली बार मयूरभंज जिले के डीएम का पद
  • 2007 में सीएम के गृह जनपद गंजाम में ट्रांसफर
  • 2011 में पांडियन को मुख्यमंत्री कार्यालय में पोस्टिंग
  • 2011 में ही सीएम के निजी सचिव बने
  • 2023 में पांडियन के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और सरकार की कैबिनेट का दर्जा मिला।

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