कौन है वो PK महानंदिया? जिन्होंने पत्नी के लिए 4 महीनों में साइकिल से किया स्वीडन तक का सफर
दिल्ली से स्वीडन तक का सफर 4 महीनों में साइकिल से तय किया। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की को पार करते हुए स्वीडिश पत्नी तक पहुंचे। हर रोज 70 किलोमीटर का सफर करते थे।

कहते हैं अगर किसी को भी शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में जुट जाती है। कुछ ऐसी ही मिलती जुलती कहानी है ओडिशा के डॉ. प्रद्युम्न कुमार महानंदिया की, जो एक स्वीडन की शेर्लोट को अपना दिल दे बैठे थे। दोनों ने आदिवासी रीति-रिवाज से शादी की, लेकिन प्रेमिका से पत्नी बनी शेर्लोट को अचानक अपने देश लौटना पड़ा। ऐसे में प्रद्युम्न ने अपनी शेर्लोट के लिए सात समुंदर पार कर दिया।
दिल्ली से स्वीडन तक का सफर 4 महीनों में साइकिल पर सवार होकर पूरा किया। रास्ता कठिनाइयों भरा रहा। लेकिन, पीके महानंदिया के हौसलों ने उनके कदमों को रुकने नहीं दिया। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की को साइकिल से पार किया। हर रोज 70 किलोमीटर का सफर करते फिर रुक जाते। ऐसे अपनी पत्नी शेर्लोट के पास पहुंचे। आइए आपको मिलाते हैं पीके महानंदिया से...
गरीब परिवार में जन्में, हाथ में गजब का हुनर
ओडिशा के ढेंकनाल में 1949 में जन्मे प्रद्युम्न कुमार महानंदिया एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बचपन से ही कला में उनकी विशेष रुचि रही। साल 1971 में दिल्ली के आर्ट कॉलेज में दाखिला लिया। यहां उनकी किस्मत जोड खाने लगी। उनके हाथ से पोट्रेट बनवाने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। पीके का फेम चढ़ ही रहा था कि इसकी खबर लंदन में पढ़ाई कर रही स्वीडन निवासी शेर्लोट तक पहुंची।
पोट्रेट बनवाने स्वीडन से आईं, हार बैठीं दिल
स्वीडन से खास अपना पोट्रेट बनाने साल 1975 में शेर्लोट दिल्ली आईं। इस बीच शेर्लोट और पीके महानंदिया दोस्त बन गए। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और दोनों प्रेम बंधन में बंध गए। दोनों ने आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार शादी की। इस दौरान शेर्लोट ने इंडियन ड्रेस यानी साड़ी पहनी। लेकिन, शेर्लोट की पढ़ाई अभी अधूरी थी। इसलिए, उन्होंने वापस लंदन जाने का फैसला लिया।
शेर्लोट ने पीके से साथ चलने को बोला, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। पीके ने शेर्लोट को समझाया कि दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वीडन शेर्लोट के घर आएंगे। इसके बाद दोनों खत के जरिए एक-दूसरे से बातचीत करते रहे।
एक साल बाद स्वीडन जाने की ठानी, तो सामने आई ये दिक्कत
1976 में पीके की पढ़ाई पूरी हो गई और उन्होंने अपनी पत्नी शेर्लोट के पास स्वीडन जाने की ठानी, लेकिन उनके पास फ्लाइट का टिकट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अपना सब कुछ बेचकर एक किराए की साइकिल खरीदी और उन्होंने पूरा सफर साइकिल से तय करना का फैसला लिया। 1977 में पीके ने अपना सफर दिल्ली से शुरू किया।
सफर में आईं कई मुश्किलें, फिर भी चलती रही साइकिल
पत्नी शेर्लोट की यादों ने पीके के लिए धूप में पानी की बूंदों सा काम किया। पीके साइकिल चलाकर दिल्ली से अमृतसर, अफगानिस्तान से ईरान, तुर्की के रास्ते बुल्गारिया पहुंचे। उसके बाद यूगोस्लाविया से जर्मनी और ऑस्ट्रिया के बाद डेनमार्क होते हुए स्वीडन तक पहुंचे। वो रोजाना 70 किलोमीटर साइकिल चलाते थे। 4 महीनों के इस सफर में उनकी कला ने उनका कभी पेट भरा तो कभी सिर पर आसरा दिलाया।
रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखने वाली शेर्लोट से मिलने से पहले पीके को इमीग्रेशन ऑफिसर्स का भी सामना करना पड़ा। ऐसे में पीके ने अपनी शादी की कुछ तस्वीरें दिखाई। जिसके बाद लोगों को यकीन हुआ।
दो बच्चों के माता-पिता हैं पीके-शेर्लोट
लंबा सफर कर अपनी पत्नी शेर्लोट से उनकी मुलाकात हुई। यहां उन्होंने स्वीडन रीति-रिवाज से शादी की। वर्तमान समय में दोनों दो बच्चों के माता-पिता हैं। पीके स्वीडन में भारतीय उड़िया कल्चरल एंबेसडर के तौर पर कार्यरत हैं।












Click it and Unblock the Notifications