कौन हैं नारायण राणे और क्या था सीएम उद्धव ठाकरे पर उनका बयान

मुंबई, 24 अगस्त: केंद्रीय मंत्री नारायण राणे मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के गुस्से के शिकार बन गए। उन्होंने सीएम के खिलाफ एक अशोभनीय टिप्पणी की थी, इसके बाद महाराष्ट्र की सत्ताधारी शिवसेना और उद्धव ठाकरे सरकार ऐसी बौखलाहट में आई कि आनन-फानन में उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज करवा दिए और उन्हें गिरफ्तार करके ही दम लिया। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी कानूनी रूप से सही है या उद्धव सरकार ने मनमानी की है यह तो बाद में तय होगा। लेकिन, यह जरूर है कि शिवसेना जिस आक्रामक राजनीति की बीज बोती है, राणे भी उसी सियासत के पैदावार हैं और कांग्रेस में वर्षों बितान के बाद भाजपा में शामिल हुए हैं।

कौन हैं नारायण राणे ?

कौन हैं नारायण राणे ?

69 वर्षीय नारायण राणे अभी मोदी सरकार में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम इंटरप्राइजेज मंत्री हैं। उनका राजनीतिक करियर 1960 की दशक से शिवसेना से तब से शुरू हुआ था, जब वह किशोर थे। एक वक्त वह शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के सबसे करीबी नेता बन गए थे। वह महाराष्ट्र के कोंकण इलाके से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के पिछले विस्तार में ही उन्हें पहली बार केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इससे पहले फरवरी 1999 में उनकी सियासी किस्मत तब चमकी थी, जब वह महाराष्ट्र के 13वें मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन, उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा, क्योंकि उसी साल भाजपा-शिवसेना गठबंधन राज्य में विधानसभा चुनाव हार गया था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं राणे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं राणे

केंद्र की राजनीति में आने से पहल राणे 1996 से लेकर 2014 के बीच महाराष्ट्र की विभिन्न सरकारों में कई अहम पोर्टफोलियो संभाल चुके हैं। इस दौरान 2005 में ठाकरे परिवार से संबंध खराब हो जान के चलते वह शिवसेना से अलग हो गए थे। शिवसेना से निकलने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और महाराष्ट्र की तत्कालीन विलासराव देशमुख सरकार में रेवेन्यू मंत्री बना गए। वह 12 साल कांग्रेस में रहे, जिसमें उन्हें कुछ वर्षों तक पार्टी से निलंबित भी किया गया। कांग्रेस में रहते हुए वे सीएम पोस्ट पर अपनी दावेदारी खुलकर जताते रहे। 2017 में उन्होंने इसी मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ दी और महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नाम से अपनी पार्टी बनाई। उनकी पार्टी में उनके दोनों बेटे नीलेश और नीतेश राणे भी प्रभावी भूमिका में रहे। इस दौरान वह अपवाद को छोड़कर अपने गढ़ कोंकण इलाके से हमेशा चुनाव जीतते रहे। 2018 में भाजपा ने उन्हें पहली बार राज्यसभा में भेजा। 2019 में उन्होंने शिवसेना का भाजपा से जबर्दस्त विरोध के बावजूद अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया। तब शिवसेना और बीजेपी साथ थे।

नारायण राणे के साथ क्या हुआ है ?

नारायण राणे के साथ क्या हुआ है ?

मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के चलते प्रदेश की उद्धव सरकार ने केंद्रीय मंत्री राणे को गिरफ्तार कर लिया है। बीते 20 वर्षों में राणे पहले केंद्रीय मंत्री हैं, जो पद पर रहते हुए गिरफ्तार किए गए हैं। उन्हें सबसे बड़ा झटका बॉम्बे हाई कोर्ट से लगा है, जिसने उनके खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग ठुकरा दी है। मंत्री के वकील ने अदालत से कहा था कि 'पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंच चुकी है, वो उनके दरवाजे पर इंतजार कर रही है।' इसपर हाई कोर्ट ने जवाब दिया कि 'कृप्या प्रक्रिया का पालन कीजिए। हमसे रजिस्ट्री का काम मत करवाइए।'

नारायण राणे पर शिवसेना का क्या रुख है ?

नारायण राणे पर शिवसेना का क्या रुख है ?

दरअसल, महाराष्ट्र की सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी की मुख्य घटक शिवसेना ने सोमवार को भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान उनकी एक टिप्पणी के लिए उनक खिलाफ कई केस दर्ज करवाए हैं। राणे का आरोप है कि 15 अगस्त के भाषण के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव स्वतंत्रता के साल की गिनती भूल गए थे और उन्हें अपने सहयोगी से भाषण रोक कर पूछना पड़ गया था। इसी में उन्होंने सीएम पर अमर्यादित टिप्पणी कर दी, जिसके खिलाफ शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने हिंसक विरोध शुरू कर दिया। मुंबई में जुहू स्थित उनके घर को घेर लिया गया तो इसके जवाब में भाजपा कार्यकर्ता भी गोलबंद होने शुरू हो गए। यहां पत्थरबाजी की भी घटना हुई। इसी तरह नासिक में भाजपा कार्यालय में भी तोड़फोड़ की घटना को अंजाम देने की कोशिश की गई।

नारायण राणे ने उद्धव के बारे में क्या कहा था ?

नारायण राणे ने उद्धव के बारे में क्या कहा था ?

दरअसल, भाजपा की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के रायगढ़ में एक जनसभा में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोमवार को कहा था, 'यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) को स्वतंत्रता का साल मालूम नहीं है। वह अपने भाषण के दौरान स्वतंत्रता के साल के बारे में पूछने के लिए पीछे घूम गए। अगर मैं वहां होता, तो उनको (उद्धव को) एक जोरदार चांटा मारता।'

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