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कौन हैं IAS नियाज खान? जिन्होंने अरशद मदनी को दिखाया आईना, बताया असल में कैसे होते हैं पढ़े-लिखे मुस्लिम?

Ias Niyaz Khan: दिल्ली धमाकों के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के विवादित बयान पर अब मध्य प्रदेश के चर्चित आईएएस अफसर नियाज खान की बेबाक प्रतिक्रिया चर्चा में है। रविवार (23 नवंबर) को नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया, जो कुछ ही घंटों में तेजी से वायरल हो गया।

अपने स्पष्ट और निर्भीक विचारों के लिए मशहूर नियाज खान ने लिखा कि शिक्षा ही वह ताकत है, जो मुसलमानों को दुनिया में पहचान दिलाती है, न कि कट्टरता। उन्होंने बताया कि असल में एक पढ़ा-लिखा मुस्लिम कैसा होता है।

Ias Niyaz Khan

"शिक्षित मुसलमान बने मेयर और गवर्नर, कट्टरता अपनाने वाले रह गए पीछे"

अरशद मदनी पर निशाना साधते हुए नियाज खान ने पोस्ट किया,

"जिस मुस्लिम ने शिक्षा प्राप्त की वो लंदन और न्यूयॉर्क का मेयर बना, अमेरिका में गवर्नर और लेफ्टिनेंट गवर्नर बना। जिसने कट्टरता और अंधविश्वास सीखा, वह पंक्चर बनाने वाला, मैकेनिक और महिलाओं पर अन्याय करने वाला बनकर रह गया। शिक्षा मुस्लिमों के लिए रामबाण औषधि है, इसे समझें।"

नियाज खान का यह बयान मुस्लिम समाज में शिक्षा बनाम कट्टरता की बहस को नए सिरे से सामने ले आया है। ऐसे में आइए जानते हैं वो कौन हैं।

कौन हैं IAS नियाज खान?

🔹 IAS नियाज खान, एमपी कैडर के 2015 बैच के अधिकारी हैं। वे राज्य सेवा से प्रमोट होकर IAS बने और फिलहाल मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

🔹 नियाज खान सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक चर्चित लेखक भी हैं। वे अब तक सात उपन्यास लिख चुके हैं, जिनमें ब्राह्मण द ग्रेड और वार ऑफ कलयुग जैसी किताबें खास तौर पर चर्चा में रहीं।

🔹उनकी एक किताब पर वेब सीरीज भी बनाई जा चुकी है। वे मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और समय-समय पर सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं।

🔹 नियाज खान इससे पहले भी कई बार अपने विचारों की वजह से सुर्खियों में आ चुके हैं। चाहे कश्मीर फाइल्स पर उनकी टिप्पणी हो या हिजाब विवाद पर उनके विचार वे हमेशा धारदार और स्पष्ट बात करने के लिए जाने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फॉलोइंग भी इसी बेबाक अंदाज की वजह से लगातार बढ़ रही है।

"शिक्षा आत्मनिर्भरता और सम्मान का रास्ता खोलती है"

मीडिया से बातचीत में नियाज खान ने अपने बयान को और विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ा-लिखा मुसलमान समाज में मिसाल बनता है, जबकि कट्टरता अपनाने वाले अपनी ही तरक्की रोक लेते हैं। उनके शब्दों में, "शिक्षा मुसलमानों को आत्मनिर्भर बनाती है, सम्मान दिलाती है और देश की सेवा करने का मौका देती है। जो लोग कट्टर विचारों में उलझ जाते हैं, वे खुद की प्रगति के रास्ते बंद कर लेते हैं।"

अरशद मदनी के दावे से साफ असहमति

मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा था कि "लंदन, न्यूयॉर्क में मुसलमान मेयर बन सकते हैं, लेकिन भारत में कोई मुसलमान विश्वविद्यालय का कुलपति तक नहीं बन सकता।" इस पर नियाज खान ने साफ असहमति जताते हुए कहा कि भारत में पढ़ा-लिखा मुसलमान अपनी पहचान खुद बना सकता है। उन्होंने कहा, "भारत में ऐसा कोई अवरोध नहीं है जिसे शिक्षा और मेहनत से पार न किया जा सके। जो लोग ज्ञान हासिल करते हैं, वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं।"

उदाहरण देकर समझाया - कट्टरता नहीं, ज्ञान ही असली ताकत

नियाज खान ने अपने तर्क के समर्थन में कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा, "डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इस देश में वैज्ञानिक से राष्ट्रपति बने। मोहम्मद अजहरुद्दीन सालों तक भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी करते रहे। ऐसे तमाम नाम हैं जो साबित करते हैं कि ज्ञान ही असली शक्ति है और कट्टरता सिर्फ पीछे ले जाती है।" उनका यह तर्क सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है।

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