WHO ने कही थी Community Transmission की बात, अब मानी गलती, कहा-भारत में अभी नहीं है यह स्थिति
नई दिल्ली। कोरोना वायरस को लेकर शुरू से ही लापरवाह रहने के आरोप झेल रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने एक और बड़ी गलती कर दी है। संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में दिखाया था कि भारत अब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के चरण में पहुंच चुका है। लेकिन अब उसने यह मान लिया है कि उसकी रिपोर्ट में यह गलत तथ्य पेश किया गया था। संगठन ने बताया है कि इस गलती को अब सुधार लिया गया है और भारत में क्लस्टर ट्रांसमिशन है न कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन।

केंद्र सरकार ने कम्युनिटी ट्रांसमिशन को किया खारिज
दुनियाभर में कोरोना वायरस कीवजह से 16 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित है और 95,785 लोगों की मौत हो चुकी है। कोविड-19 के केस के सिलसिले में जारी एक रिपोर्ट में चीन के कॉलम में 'क्लस्टर ऑफ केसेज' लिखा गया था, जबकि भारत के कॉलम में बीमारी के फैलाव के स्तर को 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' बताया गया। भारत में अब तक 6,412 केस सामने आए हैं और 199 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 33 लोगों की मौत हुई है। केंद्र सरकार ने सिरे से इस बात को खारिज कर दिया है कि भारत में यह रोग तीसरे चरण यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन पर पहुंच चुका है।
क्या होता है कम्यूनिटी ट्रांसमिशन
कम्युनिटी ट्रांसमिशन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोरोनावायरस के मामले बढ़ते चले जाएं और संक्रमण कहां से फैल रहा है, इस बात का पता लगाना मुश्किल हो जाए। पीएम मोदी की तरफ से पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया गया था। अधिकारियों और एक्सपर्ट्स की मानें तो इसकी वजह से वायरस के फैलने की गति कम हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने भी राजनयिकों के साथ हुई मीटिंग में बताया है कि करीब 600 जिलों में से 400 जिलों पर कोविड-19 का असर नहीं हुआ है जबकि 133 जिले हॉटस्पाट हैं। शुक्रवार यानी 10 अप्रैल को 100 दिन पूरे हो गए जब डब्लूएचओ को चीन में एक ऐसी न्यूमोनिया की बीमारी का पता लगा था जिसकी वजहों के बारे में आज तक रहस्य बना हुआ है।












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