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हैदराबाद डॉक्टर मर्डर: बलात्कार के वक्त अपराधी के दिमाग में क्या चलता है?

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नई दिल्ली। देश की महिलाओं में निर्भया, कठुआ और मुजफ्फर जैसे मामलों का गुस्सा अभी कम भी नहीं हुआ था, कि अब हैदराबाद में भी ऐसी ही घटना हो गई। देश में ऐसे अपराध बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन अभी तक केवल प्रदर्शन कर ही लोग अपना विरोध जता पा रहे हैं, अपराधियों को तुरंत फांसी पर चढ़ाने की कोई तैयारी नहीं दिख रही है।

    Crime against women को अंजाम देते वक्त Criminal के दिमाग में क्या चलता है? ।वनइंडिया हिंदी
    रेप के अपराधियों की मंशा

    रेप के अपराधियों की मंशा

    ऐसे में आज हम एक ऐसी रिपोर्ट के बारे में बात करेंगे, जिसमें रेप के अपराधियों की मंशा के बारे में बताया गया है। ब्रिटेन के शेफील्ड हैलम यूनिवर्सिटी में क्रिमिनॉलिजी की लेक्चरर मधुमिता पांडेय के मुताबिक उस वक्त वह महज 22 साल की थीं, जब पहली बार दिल्ली की तिहाड़ जेल गईं। उन्होंने कुछ बलात्कारियों से मुलाकात कर उनका साक्षात्कार लिया।

    100 अपराधियों का साक्षात्कार

    100 अपराधियों का साक्षात्कार

    उन्होंने अगले तीन साल तक ऐसे ही 100 अपराधियों का साक्षात्कार लिया। उनका ये प्रोजेक्ट साल 2013 में शुरू हुआ था। साल 2015 में महिलाओं के साथ रेप के कुल 34,6451 मामले हुए थे जबकि साल 2016 में ये संख्या बढ़कर 38,947 हो गई।

    'कोई इंसान नहीं कर सकता ये काम'

    'कोई इंसान नहीं कर सकता ये काम'

    पांडे कहती हैं कि हर कोई एक जैसी बात सोचता है। 'ये आदमी ऐसा क्यों करते हैं? हम इन्हें राक्षस समझते हैं और हम यही सोचते हैं कि कोई इंसान ऐसा काम नहीं कर सकता है।' निर्भया कांड के बाद उन्होंने 2013 में ये रिसर्च शुरू की। वह कहती हैं कि इस कांड के बाद लोग सड़कों पर उतर आए। दिल्ली में पली बढ़ी पांडे ने निर्भया कांड के बाद अपने शहर की एक अलग ही तस्वीर देखी। जिसके बाद वह सोच में पड़ गईं, 'कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां होती हैं कि ऐसे आदमी पैदा होते हैं?'

    बलात्कारियों से बातचीत की

    बलात्कारियों से बातचीत की

    वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पांडे ने हफ्तों तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में बलात्कारियों से बातचीत की। इनमें से अधिकतर अनपढ़ थे, बहुत कम ही थे जिन्होंने ग्रेजुएश तक पढ़ाई की हो। कई तो तीसरी या चौथी कक्षा से आगे ही नहीं पढ़े थे।

    गलत तरीके से परवरिश

    गलत तरीके से परवरिश

    इस रिसर्च में सामने आया कि इन अपराधों के पीछे की वजह थी, इन लोगों की गलत तरीके से परवरिश होना। इनकी सोच भी काफी हद तक इसके लिए जिम्मेदार थी। ऐसे में हम भी देखते हैं कि भारतीय परिवारों में पुरुषों का प्रभुत्व ही अधिक रहता है। महिला अपने नाम के आगे पति का नाम लगा लेती हैं, जबकि पति ऐसा नहीं करते। महिलाएं अपने पति को नाम लेकर भी नहीं पुकारती हैं। जबकि पति नाम लेकर ही पुकारते हैं।

    'मर्दानगी के बारे में गलत विचार'

    'मर्दानगी के बारे में गलत विचार'

    पांडे कहती हैं, 'पुरुष मर्दानगी के बारे में गलत विचार रखना सीख रहे हैं, और महिलाएं भी विनम्र होना सीख रही हैं। यह उसी घर में हो रहा है। इसका असर भी बलात्कारियों पर पड़ा और उन्होंने ऐसा किया, वे हमारे अपने समाज का एक हिस्सा हैं। वे एलियन नहीं हैं जो दूसरी दुनिया से आए हैं।' पांडे ने कहा कि कुछ बलात्कारियों की बात सुनकर उन्हें आमतौर पर उन विश्वासों की याद आई, जो अक्सर हम अपने घर में ही सुनते हैं।

    हैरान करने वाली बात सामने आईं

    हैरान करने वाली बात सामने आईं

    मधुमिता पांडे कहती हैं कि इन लोगों को पता ही नहीं है कि सहमति का मतलब क्या होता है। ये इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं कि इन्होंने जो भी किया वो रेप है। कई बार तो हैरानी भी होती है कि क्या ये वाकई में पुरुष हैं? भारतीय सामाज काफी रूढ़िवादी है। अधिकांश स्कूल के पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा है ही नहीं, नेताओं को भी लगता है कि ऐसे विषय युवाओं के लिए ठीक नहीं हैं। ये पारंपरिक मूल्यों को ठेस पहुंचा सकते हैं। 'माता-पिता लिंग, योनि, बलात्कार या सेक्स जैसे शब्दों को भी नहीं कहते। यदि वे ऐसा करेंगे तो युवा लड़कों को कैसे शिक्षित कर सकते हैं?'

    अधिकतर कैदियों ने क्या कहा?

    अधिकतर कैदियों ने क्या कहा?

    बातचीत में कई पुरुषों ने अपने अपराध किए जाने के बहाने बनाए या अपने काम को ठीक बताया। कई ने तो यहां तक कहा कि उन्होंने बलात्कार जैसा कुछ नहीं किया। 'केवल तीन या चार थे जिन्होंने कहा कि हम पश्चाताप कर रहे हैं। कई ने तो पीड़िता को ही अपराध के लिए दोषी ठहरा दिया।' इनमें 49 नंबर का अपराधी तो ऐसा था, जिसने पांच साल की बच्ची का रेप किया था। उसने कहा वह बुरा महसूस कर रहा है क्योंकि उसने बच्ची का जीवन बर्बाद कर दिया। उसने कहा, 'अब वो वर्जिन नहीं रहेगी, कोई उससे शादी नहीं करेगा। मैं उसे अपनाउंगा, जेल से बाहर आने के बाद उससे शादी करूंगा।'

    अपराधियों के विरोध का सामना

    अपराधियों के विरोध का सामना

    पांडे ने कहा कि उन्हें अपने काम के लिए अपराधियों के विरोध का सामना भी करना पड़ा है। वह कहती हैं, 'वे सोचते हैं, यहां एक और नारीवादी आ गई है। वे मानते हैं कि शोध करने वाली महिला इस तरह से पुरुषों के विचारों को गलत बताएगी।' लेकिन जो भी हो अपराध के पीछे का कारण तो अपराधी ही होता है। ऐसे में सबसे जरूरी बात यही है कि लड़कों को अच्छे से शिक्षित किया जाए और बताया जाए कि नैतिक मूल्य क्या होते हैं। किसी महिला से कैसे पेश आना है। इसकी शुरुआत भी घर से ही होनी चाहिए।

    हैदराबाद की घटना के बाद देशभर में प्रदर्शन

    हैदराबाद की घटना के बाद देशभर में प्रदर्शन

    बता दें हैदराबाद में हुई घटना के बाद ये रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सालों से एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इनमें कोई कमी नहीं आ रही। उल्टा ये बढ़ रही हैं। हैदराबाद में भी निर्भया जैसा ही कांड हुआ है। यहां एक महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। इसके बाद उसके शव को भी आग लगा दी गई। महिला का शव एक ब्रिज के नीचे मिला। फिलहाल पुलिस ने इस अपराध को करने वाले सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। देशभर में घटना के बाद से प्रदर्शन हो रहे हैं, लोग मांग कर रहे हैं कि इन अपराधियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए।

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    English summary
    what rapist think while committing crime research that is based on 100 accused who are in jail.
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