जानिए कैसे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई बन गये भुलक्कड़

नई दिल्ली। चेन्नई के लाडले व दुनिया की नंबर-1 इंटरनेट कंपनी गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी भुलक्कड़ हैं। हालांकि आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन मिलने के पहले वो ऐसे नहीं थे। सच पूछिए तो उनका दिमाग बचपन से ही इतना तेज चलता था कि उन्हें सारे फोन नंबर रटे रहते थे। लेकिन एक चीज ऐसी आयी, जिसने सुंदर पिचाई को भी भुलक्कड़ बना दिया। वो चीज है स्मार्ट फोन।

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों से मुखातिब हुए सुंदर पिचाई ने इस बात का खुलासा खुद किया। उन्होंने बताया कि बचपन में टेलीफोन नंबर छह अंकों के होते थे, तो सारे नंबर उन्हें याद रहते थे। जब वे अमेरिका गये, तो वहां 10 अंकों के नंबर थे। उन्हें याद रखने में कठिनाई होती थी, फिर भी याद रहते थे। लेकिन जबसे स्मार्ट फोन आया, तब से मुझे नंबर याद नहीं रहते। कई सारी चीजें मैं भूल जाता हूं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय में इस कार्यक्रम को होस्ट कर रहे थे हर्षा भोगले, जिन्होंने बहुत ही रोचक अंदाज में इस कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर के दौरान निकल कर आयीं बातें इस प्रकार हैं-

* भारत में एेप का क्या भविष्य देख रहे हैं आप?

पिचाई का जवाब- गूगल अगले तीन-चार सालों में 2 लाख नये एंड्रॉयड डेवलपर्स को ट्रेनिंग देने वाला है। इसके लिये हम 30 विश्वविद्यालयों से पार्टनरश‍िप करने वाले हैं। यानी आने वाले समय में भारत एंड्रॉयड ऐप डेवलपमेंट में सबसे आगे होगा।

* क्या भारत में गूगल से बड़ी कंपनी बन सकती है, जो यही स्थापित हो और विश्व की नंबर-1 बने और पूरी दुनिया उसके पास चलकर आये?

पिचाई का जवाब- पहले भारत में कुछ आधारभूत ढांचे से जुड़ी बाधाएं थीं। कई वजहों से स्टार्ट-अप कंपनियां आगे बढ़ नहीं पाती थीं। अब दिक्कतें दूर हो रही हैं। जिस तरह से भारत में इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है, उससे ऐसा जरूर संभव है। मैं कहूंगा कि हां एक दिन ऐसा जरूर होगा।

* कौन से काम आप सबसे अच्छे ढंग से करते हैं?

पिचाई का जवाब- गूगल हमेशा समस्या को हल करने के प्रयास में रहता है। कोई भी काम हो, हमारे लिये सब बराबर है। हम सब पर बराबर से मेहनत करते हैं, कड़ी मेहनत। उदाहरण के तौर पर क्या हो अगर हम सारी किताबें इंटरनेट पर ले आयें। अब यह एक बहुत बड़ा चैलेंज है, लेकिन हम इसे जरूर करना चाहेंगे।

* गूगल भारत के 400 रेलवे स्टेशनों को इंटरनेट कनेक्शन देगा इसमें गूगल का क्या फायदा है और देश को क्या फायदा है।

पिचाई का जवाब- एक इंटरनेट किसी भी इंसान की जिंदगी बदल कर रख देता है। हम भारतीयों की जिंदगी बदलने ही निकले हैं। 400 रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई होगा, जो हाई स्पीड कनेक्टीविटी वाला होगा। आप रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर हाई डेफिनिशन वीडियो तक अपने फोन पर देख पायेंगे।

* आपका भारत में अगला लक्ष्य क्या है?

पिचाई का जवाब- रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ हम देश के 3 लाख गांवों की महिलाओं को इंटरनेट से जोड़ने का काम कर रहे हैं। हम ग्रामीण महिलाओं को स्मार्ट फोन मुहैया करायेंगे, ताकि वे दुनिया की मुख्यधारा से जुड़ सकें। यह तो शुरुआत है, हम पूरे देश को हाईस्पीड वाई-फाई प्रदान करना चाहते हैं।

* गूगल की बहुत सारी सेवाएं हैं, जो भारत में अब तक नहीं आयी हैं ऐसा क्यों?

पिचाई का जवाब- हां कुछ तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो सका, लेकिन यह मत सोचिये कि हम भारत को प्राथमिकता नहीं देते। यू्ट्यूब ऑफ लाइन पहले इंडिया में आया उसके बाद 77 देशों में आया। ऐसे ही तमाम सेवाएं हैं जिन पर हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

* क्या केवल कंप्यूटर साइंस छात्र ही गूगल में जाने के सपने देख सकता है?

पिचाई का जवाब- नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है। गूगल में 50 फीसदी से ज्यादा लोग तो कंप्यूटर साइंस बैकग्राउंड के हैं ही नहीं। हम भारत में निवेश कर रहे हैं। हम हैदराबाद में अपनी बड़ी यूनिट स्थापित करने जा रहे हैं। साथ ही कई सारे केंद्र भी स्थापित करेंगे। उसमें हर प्रकार के बैकग्राउंड के लोगों की जरूरत होगी। लैंगवेज, इक्नॉमिक्स, कॉमर्स, सोशल साइंस, भूगोल, इतिहास, और तमाम क्षेत्रों से लोगों को गूगल रिक्रूट करता है और करेगा।

* आपके लिये कंप्यूटर साइंस की डिग्री होना कितनी मायने रखता है?

पिचाई का जवाब- नॉन कंप्यूटर साइंस के लोगों को भी हम लेते हैं। हम प्रॉडक्ट को अच्छा बनाने वाले को देखते हैं। हमारे लिये कंप्यूटर साइंस की डिग्री मायने नहीं रखती। हम हर प्रकार के बैकग्राउंड के लोगों की हायरिंग करते हैं। हमारे लिये वो व्यक्त‍ि महत्वपूर्ण होता है, जो प्रॉडक्ट को बनाने के आईडिया से लेकर मार्केट में ले जाने तक की सोच को साकार करना जानता हो।

पिचाई के सामने रखे गये रोचक प्रश्न और उनके रोचक जवाब पढ़ें स्लाइडर में तस्वीरों (नोट- ये तस्वीरें डीयू की नहीं हैं) के साथ-

आपने अपना पहला फोन कब खरीदा?

आपने अपना पहला फोन कब खरीदा?

मैंने पहला फोन 1995 में मोटोरोला खरीदा। और पहला स्मर्ट फोन 2006 में खरीदा।

आपके पाास कितने स्मार्टफोन हैं?

आपके पाास कितने स्मार्टफोन हैं?

मेरे पास करीब 20 से 30 स्मार्टफोन हैं।

क्या कॉलेजों में कोडिंग कंपलसरी होनी चाहिये?

क्या कॉलेजों में कोडिंग कंपलसरी होनी चाहिये?

नहीं, इसके लिये छात्रों को प्रोत्साहित जरूर करना चाहिये।

आपका पहला प्राजेक्ट क्या था?

आपका पहला प्राजेक्ट क्या था?

मेरा पहला चेस था। कैसे कंप्यूटर के ऊपर चेस खेलें।

12वीं में आपको कितने प्रतिशत अंक मिले थे?

12वीं में आपको कितने प्रतिशत अंक मिले थे?

पिचाई मुस्कुराये और बोले, अब क्या बताऊं, इतना समझ ली जिये कि मुझे श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में मेरिट के आधार पर एडमीशन नहीं मिला था।

गूगल अगले 30 साल में कहां होगा?

गूगल अगले 30 साल में कहां होगा?

गूगल हमेशा लोगों के करीब रहेगा। हमारा लक्ष्य है लोगों की समस्याओं को हल करना और वह हम करते रहेंगे।

भारत के लिये आपका क्या लक्ष्य है?

भारत के लिये आपका क्या लक्ष्य है?

मैं चाहता हूं देश के हर हाथ में स्मार्टफोन हो और शायद तभी गूगल खुद को सफल मानेगा।

जब आपने गूगल ज्वाइन किया तो कैसा लगा?

जब आपने गूगल ज्वाइन किया तो कैसा लगा?

मैं उस वक्त चॉकलेट कैंडी की दुकान में खड़े एक बच्चे की तरह था। गूगल वाकई में एक बेहतरीन जगह है, काम करने के लिये।

आप छात्र जीवन में कैसे थे?

आप छात्र जीवन में कैसे थे?

मैं कभी भी अच्छा छात्र नहीं रहा। मैं अगर आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर पाता तो शायद मुझे एडमीशन मिलना भी मुश्क‍िल होता।

कौन सी सोच है जो जीवन को बदल सकती है?

कौन सी सोच है जो जीवन को बदल सकती है?

अगर आप अपने वर्कप्लेस पर इंसिक्योर महसूस कर रहे हैं, तो उससे अच्छी जगह आपके लिये हो ही नहीं सकती। आपको उनके साथ काम करना चाहिये। क्योंकि आप उनके साथ हैं, जो आपसे बेहतर हैं।

नया आईडिया कहां से लायें?

नया आईडिया कहां से लायें?

आईडिया एक दूसरे से बातचीत में आता है। एक दूसरे से नये आईडिया डिसकस करें और इसे अपना कल्चर बना लें। आईडिया खुद ब खुद आयेंगे।

कौन से खेल में रुचि है

कौन से खेल में रुचि है

मुझे फुटबॉल पसंद है। मैं क्रिकेट भी देखता हूं। 1986 में भारत-ऑस्ट्रेलिया का मैच देखने मैं स्टेडियम गया था। वह टेस्ट मैच था और मैंने टाइम निकाल कर पूरा मैच देखा।

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