• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

एलजीबीटी की पहचान सतरंगे झंडे की कहानी क्या है

By Bbc Hindi
रेनबो फ़्लैग
EPA
रेनबो फ़्लैग

सर्वोच्च अदालत ने जैसे ही समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाया, हर ओर इन्द्रधनुषी रंगों वाला झंडा शान से लहराने लगा.

ये रेनबो फ़्लैग एलजीबीटी समुदाय की पहचान है. दुनियाभर के समलैंगिक लोग अपनी एकजुटता दिखाने के लिए इन रंगों को लहराते दिख जाते हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ता पीटर टैटचल ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि विश्व में किसी भी दूसरे प्रतीक को ऐसी मान्यता मिली है."

इस रेनबो फ़्लैग को 1978 में एलजीबीटी समुदाय के प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई. सैन-फ्रांसिस्को के कलाकार गिलबर्ट बेकर ने आठ रंगों वाला डिज़ाइन पेश किया था. ये झंडा 25 जून को गे फ़्रीडम डे के दिन पहली बार फ़हराया गया था.

बेकर ने कहा था कि वो इसके ज़रिए विविधता को दिखाना चाहते थे और बताना चाहते थे कि उनकी सेक्शुएलिटी उनका मानवाधिकार है.

रेन्बो
Getty Images
रेन्बो

हर रंग का है एक अलग मतलब

सैन-फ्रांसिस्को के बाद ये झंडा न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स के खुले आसमान में फ़हराया गया. 1990 आते-आते ये झंडा दुनियाभर में एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक बन गया.

सबसे पहले रेनबो फ़्लैग में आठ रंग जोड़े गए थे और हर रंग ज़िंदगी के एक अलहदा पक्ष को बयां करता था. इन रंगों का मतलब इस प्रकार है -

  • गुलाबी - सेक्शुएलिटी
  • लाल - ज़िंदगी
  • नारंगी - इलाज
  • पीला - सूरज की रोशनी
  • हरा - प्रकृति
  • फ़िरोज़ी - कला
  • नीला - सौहार्द
  • बैंगनी - इंसानी रूह

बाद में इन रंगों को घटाकर छह कर दिया गया. फ़िरोज़ी रंग की जगह नीले रंग ने ले ली, जबकि बैंगनी रंग को हटा दिया गया.

फ़्लैग इंस्टीट्यूट के ग्राहम बार्टम कहते हैं, " इस झंडे को इतना पसंद किए जाने का कारण इसकी सादगी है जो सबको साथ लेकर चलती है. ये ओलंपिक रिंग्स जैसा ही है, जिसे इस तरह से डिज़़ाइन किया गया है कि भाग लेने वाले सभी देशों के झंडे के रंग इसमें शामिल हो सकें"

बार्टम का कहना है कि अगर बेकर ने इस झंडे के साथ कुछ और बदलाव किए होते, जैसे की मेल सेक्शुएलिटी को दिखाने के लिए दो गोल आकार को एक तीर से जोड़ दिया होता तो शायद ये इतना प्रसिद्ध नहीं होता.

समलैंगिकों के हक़ में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फ़ैसला

समलैंगिकता अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

लेकिन इस डिज़ाइन को एक आज़ादी के प्रतीक की तरह स्वीकृति नहीं मिली है. जमाईका में गे सेक्स ग़ैरकानूनी है, वहां के अटॉर्नी जनरल ने ओरलैंडो शूटिंग के बाद अमरीकी दूतावास पर रेन्बो झंडा फहराए जाने को असभ्य बताया था.

एलजीबीटी
Getty Images
एलजीबीटी

रेन्बो झंडे का एक बड़ा इतिहास रहा है. 18वीं शताब्दी के क्रांतिकारी थॉमस पैने ने जंग के दौरान सुझाव दिया था कि जो जहाज़ जंग में नहीं हैं, उन्हें इस झंडे का इस्तेमाल करना चाहिए.

20वीं सदी की शुरुआत में शातिं का पैगाम देने वाले जेम्स विलियम वैन कर्क ने एक झंडा डिज़ाइन किया था जिसमें रेन्बो स्ट्रिप को ग्लोब से जोड़कर दिखाया गया था, मकसद ये दिखाना था कि कैसे अलग-अलग देश और रंग एक साथ मिलकर शांति से रह सकते हैं.

इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस के झंडे पर भी ये रंग देखे जा सकते हैं.

बार्टम कहते हैं," रेन्बो हर उम्र के लोगों को आकर्षित करता है. हम सब को पता है कि ये वो समझ सकता है कि हमें क्या पसंद है. इसलिए ये काम करता है."

lok-sabha-home
BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
What is the story of LGBT identification string

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X