• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

आईआईटी की परीक्षा साल में दो बार कराने में दिक्क़त क्या है?

By Bbc Hindi

आईआईटी, परीक्षा
BBC
आईआईटी, परीक्षा

2019 से आईआईटी ज्वाइंट एंट्रेंस एक्जामिनेशन की मेन्स (जेईई मेन्स) की परीक्षा साल में दो बार होगी, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ऐसा करने से छात्रों को एक साल में दो मौक़े मिलेंगे. ज़ाहिर है कि इससे बच्चों में दवाब कम होगा.

2018 तक की व्यवस्था के मुताबिक़, छात्र तीन साल में तीन बार मेन्स की परीक्षा दे सकते थे और दो बार जेईई एडवांस की परीक्षा में बैठ सकते थे. लेकिन 2019 से अब छात्रों को यही मौक़ा 6 बार मिलेगा.

पहली बार परीक्षा जनवरी में और दूसरी बार परीक्षा अप्रैल में होगी. हालांकि जेईई एडवांस की परीक्षा साल में एक बार ही होगी.

परीक्षा के लिए एक तारीख़ तय नहीं की जाएगी. जेईई मेन्स की परीक्षा 15 दिन तक कराई जाएगी, जिसमें छात्र अपनी सहूलियत के हिसाब से बैठ पाएंगे.

जेईई मेन्स की पहली परीक्षा साल 2019 के जनवरी में होगी. लेकिन फॉर्म भरने की प्रक्रिया सितंबर से शुरू हो जाएगी.

परीक्षा के नतीजे फरवरी के पहले सप्ताह में ही आ जाएंगे.

छात्र, परीक्षा
Getty Images
छात्र, परीक्षा

नई प्रक्रिया में दिक्क़त क्या है?

सरकार की इस घोषणा के साथ ही कई सवाल भी खड़े हो गए हैं. पहला सवाल ये कि छात्रों के बोर्ड की परीक्षा की तैयारी पर इसका कितना असर पड़ेगा?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के डायरेक्टर जनरल विनित जोशी ने बीबीसी से कहा, "साल में दो बार परीक्षा कराने से छात्रों को मौक़ा ज़्यादा मिलेगा. ज़ाहिर तौर पर उन पर दवाब कम रहेगा क्योंकि साल बर्बाद होने का ख़तरा कम होगा."

जनवरी में आईआईटी की परीक्षा और उसी महीने में उसके नतीजे भी आ जाएंगे, अगर छात्र पास नहीं हो पाए तो क्या अगले महीने बोर्ड की परीक्षा के लिए वो मानसिक तौर पर तैयार हो पाएंगे.

इस सवाल के जवाब में विनित जोशी कहते हैं, "साल में दो बार परीक्षा देना अनिवार्य तो होगा नहीं, जो देना चाहे वो दे सकता है. अगर किसी का एक पेपर ख़राब हो जाता है तो वो अगली बार अच्छी तैयारी के साथ परीक्षा दे पाएगा."

UGC ख़त्म हो गया तो क्या होगा?

आईआईटी में समोसे बेचने वाले का बेटा

सुप्रीम कोर्ट जाने वाला 19 साल का गे लड़का

छात्र, परीक्षा
Getty Images
छात्र, परीक्षा

छात्रों की राय

लेकिन इसी साल जेईई मेन्स की परीक्षा पास करने वाले छात्र प्रिंस कुमार, विनित जोशी की इस बात से सहमत नहीं. उनके मुताबिक, "एक परीक्षा में फेल होने की बात सुनकर अगली परीक्षा के लिए दोबारा उसी तैयारी के साथ बैठने में कम से कम 15 दिन का वक़्त लगता है. पहली बार फेल होने के बाद छात्र बुरी तरह से मानसिक तौर पर टूट जाते हैं."

दूसरे छात्र रोपिन भंडारी नए पहलू के बारे में बताते हैं. उनके मुताबिक, "अब कोचिंग वालों की बल्ले बल्ले हो गई है. उनका धंधा ज़्यादा चल पड़ा है. सिलेबस जल्दी पूरा करने के चक्कर में अभी से जुट गए हैं और साल भर उनके यहां छात्रों की लाइन लगी रहेगी."

छात्र, परीक्षा
Getty Images
छात्र, परीक्षा

क्या सीटें बढ़ेंगी?

साल में दो बार जेईई मेन्स की परीक्षा कराने के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे छात्रों में दबाव कम होगा. लेकिन प्रिंस और रोपिन मानते हैं कि अगर सीटें उतनी ही रहेंगी तो दो बार परीक्षा से छात्रों पर दबाव कम होने के बजाए बढ़ेगा ही. परीक्षा का कट ऑफ बढ़ जाएगा साथ ही छात्रों में कॉम्पटिशन भी बढ़ेगा.

पूरे देश में फ़िलहाल 23 आईआईटी है, जिसमें 12000 सींटें है. हर साल तक़रीबन 15 लाख छात्र जेईई की परीक्षा में बैठते हैं.

आईआईटी कानपुर के प्रोफ़ेसर धीरज सांगी कहते हैं, "सरकार की तरफ से ये अच्छी पहल है. छात्रों को इससे फ़ायदा होगा. साल में दो बार परीक्षा छात्रों के लिहाज़ से भी अच्छा है और ब्रांड आईआईटी के लिए भी. अब छात्र ज़्यादा ध्यान से तैयारी करेंगे. छात्र अब दूसरे छात्रों के बजाए ख़ुद से ज़्यादा प्रतिस्पर्धा करेंगे."

छात्र, परीक्षा
Getty Images
छात्र, परीक्षा

नॉर्मलाइज़ेशन क्या है?

लेकिन प्रोफ़ेसर सांगी कहते हैं कि इस नए फ़ैसले से दूसरी दिक्क़तें आ सकती हैं. परीक्षा के प्रश्न-पत्र का नॉर्मलाइज़ेशन कैसे होगा? ये सबसे बड़ा सवाल है.

दरअसल, अगर एक परीक्षा कई बार कराई जाती है तो प्रश्न पत्र का 'डिफिकेल्टी लेवल' अलग-अलग होता है.

एक पेपर आसान हो सकता है, तो दूसरा पेपर मुश्किल हो सकता है, लेकिन मुश्किल पेपर में थोड़े कम मार्क्स वाले छात्र को आसान पेपर के थोड़े ज़्यादा मार्क्स वाले छात्र के बराबर समझा जाए - इसे नॉर्मलाइज़ेशन कहते हैं.

पूरे विश्व में जहां कहीं भी एक परीक्षा कई बार होती है, वहां नॉर्मलाइज़ेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है.

वैसे अभी भी आईआईटी की परीक्षा के प्रश्न पत्र के कई सेट बनते थे.

लेकिन सीबीएसई मार्क्स में नॉर्मलाइज़ेशन नहीं करती थी.

प्रोफ़ेसर सांगी कहते हैं, "अब जब जेईई मेन्स की परीक्षा साल में दो बार और कई दिनों तक चलेगी, तब ये नॉर्मलाइज़ेशन न हो ऐसा हो नहीं सकता. इसके लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को कई एक्सपर्ट की ज़रूरत पड़ेगी, वो कहां से लाएंगे और कैसे किया जाएगा, इस पर बात होनी चाहिए."

हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी इन दिक्क़तों से निपटने में कितनी कामयाब होती है और क्या इंतजाम कर पाती है इसके लिए 2019 की जनवरी का इंतज़ार करना होगा.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
What is the problem of getting IIT twice in a year
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X