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क्या है जामिया में 750 फ़ेक आईडी कार्ड मिलने के दावे का सच- फ़ैक्ट चेक

By कीर्ति दूबे, फ़ैक्ट चेक टीम
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जामिया
Getty Images
जामिया

''बकौल जामिया- 750 फ़ेक आईडी वाले लोग जामिया में थे. उन 750 खास लोगों को जामिया में किसने न्योता दिया और "उचित समय" तक छुपाए रखा? इसके पीछे उनकी क्या मंशा रही होगी या है?"

ऐसे कई मैसेज फ़ेसबुक-ट्विटर और कुछ न्यूज़ वेबसाइटों पर नज़र आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान 750 फ़ेक आईडी कैंपस पाए गए हैं.

यूनिवर्सिटी पर ये भी आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने फ़र्जी आईडी के साथ लोगों को प्रदर्शन में शामिल किया.

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एक न्यूज़ चैनल ने एक वीडियो भी शेयर किया है. जिसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया की वाइस चांसलर नजमा अख़्तर ये कहती नज़र आ रही है ''हर कोई यूनिवर्सिटी कैंपस में आ सकता है. सिवाय उनके जो लोग फ़ेक आईकार्ड लेकर आ रहे हैं. हमें 750 फ़ेक आईकार्ड मिले. आपने खबरों में पढ़ा होगा.''

इस वीडियों क्लिप को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है और दावा जा रहा है कि विश्वविद्यालय के छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान फ़ेक आईडी लेकर बाहरी लोग प्रदर्शन में शामिल हुए और हिंसा की.

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बीबीसी ने इस दावे की पड़ताल शुरु की. चूंकि ये दावा वीसी नजमा अख़्तर के हवाले से किया जा रहा है. ऐसे में हमने सबसे पहले यूनिवर्सिटी के पीआरओ अहमद अज़ीम से बात की और सवाल किया कि ये आंकड़ा आख़िर कहां से आया, क्या यूनिवर्सिटी को ऐसी फ़ेक आईडी मिली हैं?

अहमद अज़ीम ने बताया, ''ये लगभग ढाई महीने पहले की बात है. जब हमने कैंपस में सख़्ती बरतनी शुरू की थी. इसका हालिया प्रदर्शन से कोई लेना देना नहीं है.''

इस पर और जानकारी के लिए हमने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रॉक्टर प्रोफ़ेसर वसीम अहमद खान से संपर्क किया.

उन्होंने बीबीसी को बताया, ''मैंने 25 जुलाई 2019 को जामिया के प्रॉक्टर के पद पर ज्वॉइन किया. इसके बाद हमने कैंपस में कड़े नियम बनाए. अलग-अलग गेटों पर गार्डों से छात्रों के आईडी चेक करने को कहा. हमारी प्रॉक्टोरियल टीम भी लाइब्रेरी और कैंटीन में रात में औचक दौरे पर पहुंचने लगी.''

''हमें जुलाई 2019 से अक्तूबर 2019 के बीच 726 गड़बड़ आईडी कार्ड मिले. इसे मैं फ़ेक तो नहीं कहूंगा. कई कार्ड एक्सपायर हो चुके थे तो कुछ फ़र्जी थे. ज़्यादातर छात्र इसका इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे ताकि वो यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की सुविधा ले सकें. कई छात्र जामिया के अर्जुन सिंह सेंटर फ़ॉर डिंस्टेंस एंड ओपेन लर्निंग के हैं, क्योंकि हम उन्हें लाइब्रेरी में जाने की अनुमति नहीं देते. हमने ऐसे लोगों से कहा भी कि वह ऐसे फ़ेक कार्ड का इस्तेमाल ना करके हमसे अनुमति लें. कइयों ने ऐसा किया भी. इस दौरान कई छात्र के लोकल दोस्त भी हमें कैंटीन में मिले जिन्हें हमने कैंपस से बाहर किया. एक बार हमने 10 लोगों के खिलाफ़ पुलिस में शिकायत भी की क्योंकि हमें उनके ख़िलाफ़ अपने छात्रों से शिकायत मिली. जिसका 750 फ़ेक आईडी का ज़िक्र किया जा रहा है उसका इन प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं है. ''

वीसी अख्तर ने क्या प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसका ज़िक्र किया? इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं कि ''उन्होंने इसका ज़िक्र दूसरे अंदाज़ में किया था वो ये कह रही थीं कि हम अपने कैंपस को लेकर कड़ाई दिखाते हैं, लेकिन उसका ये कतई मतलब नहीं था कि ये फ़ेक आईडी हमें सीएए को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान मिले हैं.''

इसके बाद हमने इस टॉपिक के की-वर्ड को सर्च किया तो हमें हिंदुस्तान टाइम्स का 10 नवंबर, 2019 का एक आर्टिकल मिला. जिसमें बताया गया है कि तीन महीनें में जामिया मिल्लिया में 700 से ज़्यादा आईडी कार्ड जब्त किए गए. ये संख्या अगस्त 2019 से लेकर नवंबर 2019 तक की है.

दिल्ली पुलिस ने 15 दिसंबर को हुई हिंसा में 10 लोगों की गिरफ़्तारी की है. पुलिस का कहना है कि इसमें से तीन लोग आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं. इनमें से कोई भी छात्र नहीं है.

बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि जामिया की वाइस चांसलर नज़मा अख्तर के बयान को ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है. प्रदर्शन के दौरान कैंपस में 750 फ़ेक आईडी मिलने का दावा ग़लत है.

BBC Hindi
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English summary
What is the fact-check of the claim of getting 750 fake ID cards in Jamia?
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