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राम मंदिर ट्रस्‍ट के प्रमुख ट्रस्‍टी पराशरण क्यों कहें जाते हैं 'देवताओं के वकील', जानें उनका कांग्रेस से क्या है कनेक्शन

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बेंगलुरु। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार ने ट्रस्‍ट गठित कर दिया हैं। इस नवगठित ट्रस्ट के लिए पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए नकद में एक रुपये दान किया। भाजपा की दोबारा केन्‍द्र में बनी सरकार में आए अयोध्‍या केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लगभग तीन माह बाद राम मंदिर निर्माण के लिए ये ट्रस्‍ट गठित किया गया है। दिल्ली विधान सभा चुनाव के बीच सरकार द्वारा गठित राम मंदिर ट्रस्‍ट के प्रमुख ट्रस्‍टी अयोध्‍या विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्‍य वकील रहे 92वर्षीय के पारशरण को बनाया गया हैं। आइए जानते हैं उनका कांग्रेस और यूपीए सरकार से क्या है कनेक्‍शन और क्यों कहलाएं 'देवताओं के वकील'?

    Ram Mandir Trust: जानिए K. Parasaran को क्यों कहा जता है Advocate of the Gods |वनइंडिया हिंदी

    Parasharan

    बता दें पद्मभूषण और पद्ममविभूषण से विभूषित पराशरण को राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्‍ट में बड़ी जिम्मेदारी देते हुए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके घर ही को ही ट्रस्‍ट का ऑफिशियल ऑफिस बनाया गया हैं। ट्रस्‍ट की गतिविधियों को यहीं से संचालित किया जाएगा। पराशरण के अलावा ट्रस्ट में एक शंकराचार्य समेत पांच सदस्य धर्मगुरु ट्रस्ट में शामिल हैं। साथ ही अयोध्या के पूर्व शाही परिवार के राजा विमलेंद्र प्रताप मिश्रा, अयोध्या के ही होम्योपैथी डॉक्टर अनिल मिश्रा और कलेक्टर को ट्रस्टी बनाया गया है।

    दो कांग्रेसी प्रधानमंत्री काल में पराशरण रह चुके हैं अटॉर्नी जनरल

    दो कांग्रेसी प्रधानमंत्री काल में पराशरण रह चुके हैं अटॉर्नी जनरल

    अयोध्‍या मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करने वाले पराशरण को 2012 में यूपी सरकार के दौरान राज्यसभा के रुप में नामित किया गया था। वर्ष 1983 से 1089 के बीच दो कांग्रेस के प्रधानमंत्री जिनमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की के दौरान पराशरण अटॉर्नी जनरल नियुक्त किए गए थे। देश में आपातकाल की स्थिति के दौरान पराशरण तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे। उन्‍होंने कांग्रेस की दो सरकारों में अटॉर्नी जनरल के रुप में अपनी सेवाएं दी। 1992 में जब मुंबई निवासी मिलन बनर्जी को अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया था, तब पराशरण को ‘सुपर एजी' के रूप में संदर्भित किया गया। संवैधानिक मामलों में सरकार के पास पराशरण ही सबसे अच्छा विकल्प रहे। सरकारें बदलीं, लेकिन पराशरण हमेशा सराहे गए।

    इसलिए कहलाएं 'देवताओं के वकील'

    इसलिए कहलाएं 'देवताओं के वकील'

    सुप्रीम कोर्ट में आयोघ्‍या केस में रामलला के पक्ष में फैसला आने की महत्वपूर्ण कड़ी वरिष्ठ वकील के. पराशरण ही रहे हैं। पराशरण ने अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में हिन्दू पक्षों की वर्षो तक पैरवी की और जिसके कारण आज राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हो सका हैं। इतना ही नहीं वो रामसेतु केस और सरीमाला मंदिर केस में भगवान अयप्‍पा के वकील भी पराशरण हैं। इसीलिए उन्‍हें 'देवताओं के वकील' कहा जाता हैं। हिंदू धर्म पर अपनी बहुत अच्छी पकड़ होने के कारण वह खुद को भगवान राम के अनन्य उपासक के रूप में देखते हैं। रामसेतु प्रकरण में भी पराशरण ने सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट से रामसेतु को बचाने के लिए सरकार के खिलाफ जा कर अदालत में केस लड़ा था। 1976 में पराशरण तमिलनाडु सरकार के एडवोकेट जनरल रहे थे।

    स्कन्ध पुराण के श्लोकों से राम मंदिर का अस्तित्व साबित किया

    स्कन्ध पुराण के श्लोकों से राम मंदिर का अस्तित्व साबित किया

    वयोवृद्ध वकील पराशरा ने अयोध्‍या राम मंदिर केस की पैरवी के दौरान जो दलीलें दीं, उन्‍हें सुनकर जिसे सुनकर लोग दंग रहे गए थे। ये वही वरिष्‍ठ वकील है जिन्‍होंने अयोध्या मामले में स्कन्ध पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर का अस्तित्व साबित किया था जिसमें वह सफल भी रहे। इस केस मे तर्कसंगत दलीलों के बल पर वो कोर्ट में यह साबित करने में सफल रहे कि विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर रामलला का ही कब्जा होना चाहिए। अयोध्‍या जमीन विवाद का फैसला हिन्दू पक्षों के पक्ष में आया। 93 वर्षीय केशव पराशरण अपनी टीम के साथ सुप्रीम कोर्ट में लगातार दिन रात एक करके 40 दिनों तक राम लला के पक्ष में पैरवी करते रहे। कुछ दिनों पूर्व ही पराशरण ने कहा था कि उनकी आखिरी इच्छा है कि उनके जीते जी रामलला कानूनी तौर पर विराजमान हो जाए।

    पराशरण की भगवान राम के प्रति आस्‍था के लोग हो गए थे कायल

    पराशरण की भगवान राम के प्रति आस्‍था के लोग हो गए थे कायल

    अयोध्या राम जन्मभूमि केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पराशरण ने कहा उसने सुनकर वहां मौजूद लोग पराशण के भगवान के प्रति समर्पण को देख उनके कायल हो गए थे। पराशरण की भगवान राम के प्रति आस्‍था का अंदाजा इस वाकये से लगाया जा सकता हैं। सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने उनकी अधिक उम्र को देखते हुए उन्हें कोर्ट ने बैठकर भी दलील पेश करने की बात कही। जिसके जवाब में उन्होंने कहा था कि कोर्ट की परंपरा रही है कि खड़े होकर ही जिरह की जाए और मेरी चिंता परंपरा को लेकर ही है। 40 दिनों तक चली बहस के दौरान उन्होंने कोर्ट में खड़े रहकर ही अपनी दलीलें पेश कीं। रामलला की तरफ से अपना पक्ष रखने के लिए जैसे ही पराशरण अपनी सीट से खड़े हुए। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उनसे पूछा, ‘क्या आप बैठकर बहस करना चाहेंगे?'इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई बात नहीं। बार की परंपरा खड़े होकर ही बहस करने की है।'

    मैं अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं

    मैं अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं

    पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित पराशरण जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं । सादगी से जीवन जीने वाले पराशरण ने रामसेतु के मामले में कोर्ट में दलील करते हुए कहा था- मैं अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं। बता दें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए ड्राफ्टिंग एंड एडिटोरियल कमिटी में शामिल किया था। आयोध्‍या केस, रामसेतु और सबरीमाला मामले में भगवान के वकील पराशरण को भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है। जिसका इस्‍तेमाल वो कोर्ट में केस की बहस के दौरान बाखूबी करते हैं और केस में सफलता भी हासिल करते हैं। अयोध्‍या केस में राम मंदिर के पक्ष में आया ऐतिहासिक फैसला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

    इन दलीलों से साबित किया कि आयोध्‍या भगवान राम की जन्‍मस्‍थली

    इन दलीलों से साबित किया कि आयोध्‍या भगवान राम की जन्‍मस्‍थली

    कोर्ट में अपनी दलीलों में पराशरण ने जमीन को देवत्व का दर्जा देते हुए कहा था कि हिंदू धर्म में तो मूर्तियों के साथ वृक्ष, नदी, सूर्य को भी देवत्व का दर्जा प्राप्त है। इसलिए जमीन को भी देवत्व का दर्जा दिया जा सकता है। रामलला विराजमान की ओर से पराशरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम जन्मभूमि खुद ही मूर्ति का आदर्श बन चुकी है और यह हिन्दुओं की उपासना का प्रयोजन है। पराशरण ने पीठ से कहा था कि वाल्मीकि रामायण में तीन स्थानों पर इस बात का उल्लेख है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था।

     पराशरण को विरासत में मिली है वकालत

    पराशरण को विरासत में मिली है वकालत

    तमिलनाडु प्रांत के श्रीरंगम में 9 अक्टूबर 1927 को जन्मे 93 वर्षीय केशव पराशरण के पिता केशव अयंगर भी वकील थे, इसलिए वकालत उन्‍हें विरासत में मिली है। केशव अयंगर ने सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की थी। हालांकि ये पिता से कही आगे निकल गए। पराशरण ने साल 1958 में प्रैक्टिस शुरू की थी। पराशरण के तीन पुत्र मोहन, सतीश और बालाजी भी वकील हैं।

    English summary
    Ram Temple Trust Chief Trustee Parasharan has been an Attorney General during the tenure of two Congress PMs.In addition to Ayodhya Ram temple case, fought Ram Sethu and Sabarimala temple cases, so Parasharan should be called
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