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क्या है 146 साल पुराना विवाद, जिसपर असम और मिजोरम में छिड़ गई है लड़ाई

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नई दिल्ली, 27 जुलाई: भारत अबतक पाकिस्तान और चीन के साथ ही सीमा विवाद की वजह से जंग की स्थिति में पहुंचता था। लेकिन, शायद पहली बार ऐसी नौबत आई है कि दो राज्यों की पुलिस और लोग ही आपस में हिंसा पर उतारू हैं। असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद में सोमवार को हुई हिंसक झड़प में 5 पुलिसकर्मी शहीद हो गए और 50 से ज्यादा के जख्मी होने की रिपोर्ट है। इस घटना को लेकर दोनों राज्यों के बीच जबर्दस्त तनाव की स्थिति पैदा हो चुकी है। लेकिन, अगर तह में जाएं तो यह विवाद आज का नहीं है। करीब डेढ़ सौ वर्षों से सीमा को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद है, जो अब खतरनाक रूप ले चुका है।

146 साल पुराना है असम-मिजोरम सीमा विवाद

146 साल पुराना है असम-मिजोरम सीमा विवाद

असम और मिजोरम के बीच की सीमा 165 किलोमीटर लंबी है। लेकिन, विवाद दो बार के सीमांकनों को लेकर है, जिसका इतिहास अंग्रेजों के जमाने से जुड़ा है। अगस्त 1875 के असम गजट में इसकी सीमा कछार जिले की दक्षिणी सीमा मानी गई। मिजो लोगों का कहना है यह पांचवी बार था जब अंग्रेजों ने लुशाई हिल्स या मिजो पहाड़ी (आज के मिजोरम को तब लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था) और कछार के मैदान (असम) के बीच सीमा निर्धारित की थी। लेकिन, पहली बार तब यह मिजो प्रमुखों से रायशुमारी के बाद किया गया था। दो साल बाद जो गजट जारी हुआ उसमें भी फॉरेस्ट रिजर्व की सीमांकन के लिए इसी को आधार माना गया था।

    Assam Mizoram Border Dispute: क्या है दोनों राज्यों के बीच का सीमा विवाद? | वनइंडिया हिंदी
    1933 के सीमांकन को नहीं मानते मिजो लोग

    1933 के सीमांकन को नहीं मानते मिजो लोग

    1933 में लुशाई हिल्स (मिजो पहाड़ी) और तबकी मणिपुर रियासत के बीच सीमा निर्धारित की गई। इसके मुताबिक मणिपुर की सीमा लुशाई हिल्स के तिराहे से शुरू होकर असम के कछार जिले और मणिपुर तक है। मिजो लोग इस सीमांकन को नहीं मानते और उनका कहना है कि 1875 की सीमा को ही मानेंगे जो उनके प्रमुखों से राय-विचार करके तय की गई है। तब उत्तर-पूर्व में सिर्फ तीन ही राज्य होते थे। मणिपुर, त्रिपुरा और असम। जबकि, आज के मिजोरम, मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश असम के हिस्से थे, जिसे ग्रेटर असम के रूप में जाना जाता था। आजादी के बाद के दशकों में ये सारे अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बने।

    जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर हो रही है हिंसा

    जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर हो रही है हिंसा

    जमीन के जिस टुकड़े को लेकर मिजोरम और असम के बीच अभी हिंसक झड़पें हो रही हैं, उस इलाके में अलग-अलग भाषाओं, संस्कृति और एक-दूसरे से पूरी तरह से भिन्न पहचान वाले लोग रहते हैं। मिजोरम का हमेशा से दावा रहा है कि सीमा का निर्धारण 1875 के समझौते के हिसाब से ही होना चाहिए। जबकि, इस दौरान कई सारे अलग-अलग राज्य बन जाने से मामला और भी पेंचीदा हो चुका है। मिजोरम का दावा है कि आजादी के बाद जो सीमाएं निर्धारित हुई हैं, उससे मिजो-भाषी जिले असम में चले गए हैं। 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से कहा था कि सीमा आयोग गठित करके इस झगड़े को हमेशा-हमेशा के लिए निपटाया जाए, लेकिन यह काम अभी तक अधूरा है।

    पहले भी हो चुके ही असम-मिजोरम के बीच हिंसक झड़प

    पहले भी हो चुके ही असम-मिजोरम के बीच हिंसक झड़प

    अधिकारियों के मुताबिक मिजोरम और असम के बीच हुए एक समझौते के तहत दोनों को सीमावर्ती इलाके के नो मैंस लैंड में यथास्थिति बरकरार रखनी है। लेकिन, 2018 के फरवरी में तब हिंसा भड़की थी जब एक छात्र संगठन मिजो जिरलाई पॉल (एमजेडपी) ने उस जमीन पर किसानों के लिए लकड़ी के विश्राम घर बना दिए, जिसपर असम दावा करता रहा है। इसके चलते असम पुलिस से उन घरों को तोड़ दिया था। पिछले साल अक्टूबर में उस इलाके में तब फिर से हिंसा भड़क उठी थी जब असम के लैलापुर में निर्माण किया गया, जिसपर मिजोरम अपना दावा जताता है।

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    असम-मिजोरम में अभी क्यों हो रहा है हिंसक बवाल ?

    कुछ महीनों की खामोशी के बाद असम और मिजोरम के सीमा विवाद ने इस समय बहुत ही खतरनाक शक्ल अख्तियार कर लिया है। दोनों राज्यों की पुलिस हिंसा पर उतारू हैं। असम पुलिस के पांच जवान शहीद हो चुके हैं और 50 से ज्यादा लोगों के जख्मी होने की जानकारी है। मिजोरम पुलिस के डीआईजी लालबियाकथांगा खियांगटे के मुताबिक सोमवार को हिंसा तब भड़की जब रविवार रात को अज्ञात लोगों ने किसानों की 8 झोपड़ियों में आग लगा दी। उनके मुताबिक ये झोपड़ियां नजदीकी वैरेंग्टे (मिजोरम) के किसानों की थीं, जो कि असम की सीमा से सटा हुआ है। हालात की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि इस मसले को लेकर ट्विटर पर असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों के बीच खुलकर बहसबाजी और आरोप-प्रत्यारोप हुए जिसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दखल देकर दोनों राज्यों से शांति बरतने की अपील की है। जानकारी के मुताबिक असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी और मिजोरम के आइजोल, मामित और कोलासेब इलाकों में अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। जंगलों से छिपकर फायरिंग करने की बात कही जा रही है। फिलहाल हालात काबू में करने के लिए सीआरपीएफ ने मोर्चा संभाल लिया है और दोनों ओर से लगातार शांति की अपील की जा रही है।

    English summary
    The border dispute between Assam and Mizoram is about 150 years old, Mizoram is adamant on its insistence on accepting the agreement of 1875
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