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आधार फैसला: जानिए क्या है धारा 57? जिसे सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, क्या होगा इसका असर?

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नई दिल्ली। आधार की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने हालांकि आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है पर इस एक्ट के कुछ सेक्शन निरस्त कर दिए हैं। अब बैंक अकाउंट खोलने, मोबाइल नंबर लेने, स्कूइलों में दाखिले, CBSE, NEET व UGC जैसी परीक्षाओं के लिए आधार की जरूरत नहीं होगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पैन कार्ड को आधार से जोड़े जाने की अनिवार्यता को बरकरार रखा है। आधार पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्टे, 2016 के सेक्शकन 57 को भी निरस्त कर दिया है।

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क्या थी धारा 57

आधार एक्टन, 2016 का सेक्श न 57 निजी कंपनियों को सत्यापन के लिए आधार मांगने की अनुमति देता था। धारा 57 के अनुसार सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि बॉडी कॉरपोरेट या फिर किसी भी व्यक्ति को आइडेंटिफिकेशन के लिए आधार कार्ड मांगने का अधिकार था। इस प्रावधान के तहत ही मोबाइल कंपनी, प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर्स के पास वैधानिक अधिकार था जिससे वो पहचान के लिए आपका आधार कार्ड मांगते थे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वो निजी कंपनियां वेरिफिकेशन के नाम पर आधार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी।

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धारा 33(2) भी खत्म

आधार अधिनियम की धारा 57 में उल्लेख किया गया था कि 'राज्य या कोई निगम या व्यक्ति' आधार संख्या का इस्तेमाल 'किसी भी उद्देश्य के लिये किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने में कर सकता है।' सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन 33(2) को भी खत्म कर दिया है जो UIDAI को राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में खास तौर से अधिकृत अधिकारियों के साथ डेटा शेयर करने की इजाजत देता था। एक्ट के इस प्रवाधान को लेकर शक जाहिर किया जा रहा था कि सरकार इसका इस्तेमाल लोगों की निगरानी के लिए कर सकती है।

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English summary
What is Section 57? That has been struck down by the five judge Constitution Bench
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