अध्यादेश क्या होता है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैसे पलटा जाता है? प्वाइंट बाइ प्वाइंट समझिए यहां
What is Ordinance: अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित एक कार्यकारी आदेश है। यह संसद द्वारा अनुमोदित अधिनियम के समान शक्ति और परिणाम रखता है।

Adhyadesh Kya Hota Hai: दिल्ली में अधिकारियो के ट्रांसफर-पोस्टिंग का मामला नाक की लड़ाई बनता जा रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार आमने सामने आ गई है। केंद्र सरकार ने जहां बीते शुक्रवार को अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। जिससे अब ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार में एक बार फिर से केंद्र सरकार की दखल होगी । वहीं अब आदमी पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गई है। आम आदमी पार्टी इस अध्यादेश को अवैध बता रही है। तो चलिए अब जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर अध्यादेश (Ordinance) है क्या है? इसके जरिए केंद्र सरकार कैसे सुप्रीम कोर्ट तक के फैसले को पलट देती है? यहां प्वाइंट बाय प्वाइंट हर पेच को समझिए?
सबसे पहले जानते हैं अध्यादेश क्या है? (What is an Ordinance)
अध्यादेश एक ऐसा कानून है जिसकी मंजूरी भारत के राष्ट्रपति द्वारा तभी दी जाती है जब भारतीय संसद का सत्र नहीं चल रहा होता है। राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर अध्यादेश जारी करता है। यानी किसी विशेष परिस्थिति की चुनौती से निपटने के लिए जब सरकार कोई आदेश लाती है तो उसे अध्यादेश कहा जाता है। सरकार इस अध्यादेश को तभी ला सकती है जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो।
कितनी होती है अध्यादेश की अवधि (Ordinance Time Duration)
अध्यादेश की अवधि केवल 6 सप्ताह यानी 42 दिनों की होती है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा पास कराने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता हैं। लेकिन अध्यादेश को 6 हफ्ते के भीतर फिर से संसद के पास वापस आ जाता है। इसके बाद फिर से इसे सामान्य बिल के तौर पर सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।
अध्यादेश कौन जारी करता है?
अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति की अध्यादेश बनाने की शक्ति से संबंधित है। राष्ट्रपति के पास कई विधायी शक्तियां हैं और यह शक्ति उनमें से एक है। राष्ट्रपति केंद्र सरकार की अनुशंसा पर अध्यादेश पारित करते हैं।अध्यादेश किसी भी विधेयक को पारित करने का अस्थायी तरीका है। कोई भी अध्यादेश सदन के अगले सत्र के अंत के बाद 6 सप्ताह तक बना रहता है। जिस भी विधेयक पर अध्यादेश लाया गया हो, उसे संसद के अगले सत्र में वोटिंग के जरिये पारित करवाना होता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो राष्ट्रपति इसे दोबारा भी जारी कर सकते हैं।
अध्यादेश लाने का क्या था उद्देश्य
संविधान रचियता ने अध्यादेश का रास्ता ये सोचकर बनाया था कि किसी आपातकालीन स्थिति में जरूरी विधेयक पारित किए जा सकें। या देश में संकट हो सरकार के लिए उस समय कोई ठोस कदम उठाना जरूरी हो।
अध्यादेश जारी करने की शर्तें
राष्ट्रपति उन्हीं मुद्दे पर अध्यादेश जारी कर सकते हैं, जिन मुद्दे पर संसद को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त होती है।
राष्ट्रपति उन्हीं विषयों के संबंध में अध्यादेश (Ordinance) जारी कर सकता है, जिन विषयों पर संसद को विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है।
अध्यादेश कब हो जाता है अप्रभावी
राष्ट्रपति के द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को संसद के आने वाले सत्र में 6 सप्ताह के भीतर पास कराना जरूरी है। अन्यथा 6 सप्ताह की अवधि बीत जाने पर अध्यादेश अप्रभावी हो जाएगा।
किसी अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 महीने (विशेष परिस्थिति में)
अध्यादेश के 6 सप्ताह की अवधि बीत जाने पर अध्यादेश प्रभावहीन हो जाएगा। लेकिन सदन के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने का हो सकता है, इसलिये अध्यादेश का अधिकतम 6 महीने और 6 सप्ताह तक लागू रह सकता है।












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