हर दिन यौन सुख से क्या कम होता है तनाव?

Posted By: BBC Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
हर दिन यौन सुख से क्या कम होता है तनाव?

ज़्यादातर लोगों की तरह मैं भी अपनी सेहत और सुख का ख़्याल रखती हूं. पिछले साल मैंने फ़ैसला किया था कि मुझे अपनी त्वचा को ख़ूबसूरत बनाना है. मैंने यह भी फ़ैसला किया कि जीवन को तनावमुक्त रखना है और हर तरफ़ से चमक बनाई रखनी है. पर मैंने इसके लिए जिम में जाकर पसीना बहाने और खान-पान सुधारने के बजाय दूसरी राह को चुना. वो था हस्तमैथुन.

जब आप कामुकता से भरे होते हैं तो शरीर से ऑक्सिटॉसिन हॉर्मोन रक्त प्रवाह में समाहित होता है. ऑक्सिटॉसिन को सामान्य तौर पर 'प्यार' या 'आलिंगन' हॉर्मोन कहते हैं. यह मानसिक तनाव को कम कर सकता है.

यह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है कि साल 2006 में एक किताब ने 2,600 महिलाओं के बीच हस्तमैथुन को लेकर शोध किया था. इनमें से 39 फ़ीसदी महिलाओं ने कहा कि उन्हें हस्तमैथुन के बाद राहत मिलती है.

मैंने एक साल हर दिन अपनी कामुकता चरम पर पहुंचाने का संकल्प लिया. हाल ही में बॉयफ्रेंड से मेरा अलगाव हुआ था. वो मेरे साथ लंबे समय से था. इस संबंध के ख़त्म होने के बाद से मैं भीतर से टूट गई थी.

कामुकता और ख़ूबसूरती का संबंध

इसका असर मेरी स्किन पर भी पड़ा. मैंने कई उपाय किए लेकिन सब बेकार साबित हुए. इन उपायों से मैं ख़ुद को और थकी हुई पाने लगी. मानसिक तनाव बढ़ता गया.

इन सबके बीच मेरे लिए वो रात विस्मयकारी रही. जब मैं जगी तो वो मेरे लिए बिल्कुल नई सुबह थी. मेरी त्वचा में ग़ज़ब की चमक थी.

मैं अपनी त्वचा को लेकर क़रीब एक साल से जूझ रही हूं. मुझसे स्किन के कई डॉक्टरों ने कहा कि मानसिक तनाव कम करने की ज़रूरत है. उन्होंने हॉर्मोनल असंतुलन भी कम करने को कहा. कई ऐसी चीज़ें थीं जो मेरे नियंत्रण में नहीं थीं. मैंने गूगल पर सबके बारे में स्टडी की. मैंने इस बात को भी सर्च किया कि क्या कामुकता से स्किन प्रभावित होती है?

इसके बारे में मुझे कई चीज़ें मिलीं. बात सीधी थी कि सेक्स से मानसिक तनाव कम होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि सेक्स के दौरान शरीर से तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन्स बाहर निकलते हैं.

मुहांसों की आशंका कम होती है?

जब ऐसा होता है तो स्किन की बदहाली और मुहांसों की आशंका कम होती है. हालांकि कई लोग इस तर्क से सहमत नहीं हैं. अगर सेक्स से स्किन को ख़ूबसूरत बनाने और तनाव को कम करने में मदद मिलती है तो इसे एक साल कर आजमाया जा सकता है और निश्चित तौर पर इसके परिणाम को महसूस किया जा सकता है.

मेरे लिए पहला हफ़्ता मज़े के लिए रहा. हालांकि मैं सेक्स के दौरान हमेशा चरम पर नहीं होती. मुझे पता है कि इसे अकेले कैसे अंजाम दिया जा सकता है. यह एक किस्म की फंतासी है और इसमे उंगलियों की ज़रूरत होती है.

ऐसा नहीं है मेरी स्किन में तत्काल कोई क्रांतिकारी परिवर्तन आ गए, लेकिन मैंने इसमें कुछ बेहतरी महसूस की. मैं सामान्य तौर पर रात में बिस्तर पर वासना से निपटती हूं. इसके बाद मैं आराम से नींद में लिपट जाती हूं. मेरे लिए इसमें उदासी और अफसोस की कोई भावना नहीं आती.

यौन संबंध में फंतासी

मैं अपनी फंतासी को एक ख़ास स्तर पर ले जाती हूं. मैं सामान्य पुरुष के साथ सेक्स की कल्पना बंद कर देती हूं. मैं ख़ुद को लियोपैट्रा समझती हूं और मेरे सभी नौकर वासना में उलझे हुए होते हैं. मेरे दोस्तों को यह मज़ाक लगता है. वहीं दूसरी तरफ़ कुछ दोस्त ख़ुद से कामुक सुख हासिल करने के लिए प्रेरित हुए.

लेकिन कुछ महीने बाद मैं इससे ऊब गई. यह रूटीन की तरह लगने लगा. मैं भी इसे उसी तरह जल्दी में निपटाने लगी. मैंने ख़ुद को ही धोखा देना शुरू कर दिया. मैंने ख़ुद से कहना शुरू कर दिया कि आज छुट्टी है. मेरे लिए हस्तमैथुन अब भी कई बार मज़े के लिए होता है.

मुझे अब भी हस्तमैथुन की तीव्र इच्छा होती है. ऐसा एक दिन में कई बार होता है. कई बार ऐसा होता है कि किसी किसी दिन बिल्कुल मन नहीं करता. लेकिन कुल मिलाकर मेरा संकल्प मेरे लिए बोझ बन गया. मेरे लिए रोज़ जिम जाना भी आसान नहीं था. इन सबके के बाद लगा कि और भी कई अच्छी चीज़ें हैं जिन्हें किया जा सकता है.

पिछली गर्मी में मैंने इसे पांच महीने तक जारी रखने का फ़ैसला किया. इसके बाद मैं एक रोमैंटिक छुट्टी पर गई और मेरी पूरी धारणा बदल गई. कम वक़्त की इस रिलेशनशिप को मैंने ख़ूब इंजॉय किया. मुझे लगा कि जो मैं पिछले कुछ महीनों से कर रही थी उसका भी योगदान है.

मैं जब घर लौटी तो मेरी त्वचा में ग़ज़ब की चमक थी. मैं फिर एक नए संकल्प के साथ सामने आई- मैं ख़ुद को हर दिन कामुकता में लिपटने को मजबूर करने की तुलना में मन होने पर इसे अंजाम दूंगी. मेरा नया लक्ष्य गुणवत्ता पर आधारित था न कि ज़्यादा बार पर.

मैंने हफ़्ते में एक या दो बार इसे करना शुरू किया. कई बार एक बार भी नहीं. यह मेरे लिए फिर से मज़ेदार बन गया था. मैं इसे किसी काम की तरह नहीं कर रही थी बल्कि मन से और मन होने पर. इसका नतीजा यह हुआ कि मेरे जीवन में मानसिक तनाव काफ़ी कम हुआ.

मेरी त्वचा ख़ूबसूरत हुई. मैं ख़ुद को शांत, अहम और सेहतमंद महसूस करती हूं. मेरी कामुकता ने मेरे जीवन की राह को बदल दिया जिसकी मैं कल्पना नहीं कर सकती हूं. मैं सेक्स के दौरान क्या चाहती हूं, ऐसे सवालों से मुझे अब शर्मिंदगी नहीं होती.

मुझे अपनी यौन फंतासियों को साझा करते हुए कोई समस्या नहीं होती है. मुझे नए सेक्स टॉय का इस्तेमाल करते हुए अब डर नहीं लगता है. मेरी कामुकता ने मुझे ख़ुशहाल और सेहतमंद बनाया- जिसे मैं हमेशा चाहती हूं. मेरे लिए आगे के 365 दिन भी पड़े हैं.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
What is less stress than sexual pleasure every day

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

X