Digital Rupee क्या है ? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में किया है ऐलान
नई दिल्ली, 1 फरवरी: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को देश में डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की घोषणा करके डिजिटल इकोनॉमी की दिशा में बहुत बड़ा कदम बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि इससे आने वाले वक्त में करेंसी मैनेजमेंट की पूरी व्यवस्था में ही बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि, आम लोगों के लिए यह किस तरह से सुविधाजनक और सुरक्षित होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर इससे क्या फायदे होंगे या फिर इसके इस्तेमाल का तरीका क्या होगा? यह जानना दिलचस्प है। वैसे सरकार ने इसे जारी करने की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक को दी है।

डिजिटल रुपया कौन जारी करेगा ?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने चौथे बजट भाषण में मंगलवार को लोकसभा में डिजिटल रुपया लॉन्च करने की घोषणा की है। इस सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को भारतीय रिजर्व बैंक जारी करेगा। हमारे लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी और इससे हमें किस तरह का बदलाव देखना मिलेगा? दरअसल, वित्त मंत्री के मुताबिक यह डिजिटल करेंसी अगले वित्त वर्ष 2022-23 से जारी होगी। सीतारमण की घोषणा के मुताबिक सीबीडीसी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा।

सीबीडीसी क्या है ?
सीबीडीसी केंद्रीय बैंक की ओर से जारी किया जाने वाला कानूनी मुद्रा है, जो कि कागज की जगह डिजिटल स्वरूप में होगा। लेकिन, यह कागजी नगदी के समान ही होगा और इसे किसी भी वैध मुद्रा के साथ बदला जा सकेगा। इसे भी रिजर्व बैंक के जरिए सरकार की गारंटी रहेगी, जैसे कि कागजी मुद्रा की होती है। इससे डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और इसके जरिए करेंसी मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी होने और उसपर लागत घटने की संभावना है। क्योंकि, कागजी मुद्रा की ढुलाई में भी खर्च आता है और उसे सुरक्षित रखने में ज्यादा लागत आती है।

सीबीडीसी की आवश्यकता क्या है ?
इंवेस्टोपीडिया के मुताबिक इसका लक्ष्य उपयोगकर्ताओं को सुविधाजनक और डिजिटल सिक्योरिटी के साथ मुद्रा उपलब्ध करवाना है, जिसके जरिए परंपरागत बैंकिंग प्रणाली को भी आधुनिक आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाना आसान होगा। इसके ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित होने का मतलब है कि इससे जुड़ा डेटा ब्लॉक में जमा रहेगा और उसकी चेन के रूप में एक पूरी श्रृंखला होगी।

बजट में डिजिटल रुपये की घोषणा का मतलब क्या है ?
बजट में डिजिटल रुपये की घोषणा से सरकार की क्रिप्टो करेंसी और दूसरे वर्चुअल मुद्राओं को लेकर उसकी मंशा जाहिर होती है। क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कई बार निजी क्रिप्टोकरेंसी जैसे कि बिटकॉइन आदि को लेकर चिंताएं जाहिर की हैं, जिसका डर मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिग और टैक्स की चोरी को लेकर रहा है। इसी की वजह से उसने अपनी डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की योजना तैयार की है।

आम लोगों के लिए इससे क्या बदलेगा ?
वैसे तो टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ने डिजिटल रुपये के इस्तेमाल के लिए कई मॉडल प्रस्तावित कर रखे हैं, लेकिन रिजर्व बैंक की ओर से खुद नागरिकों के लिए इसके बारे में एक विस्तार से जानकारी दिए जाने की संभावना है। लेकिन, मौजूदा डिजिटल भुगतान की तुलना में डिजिटल करेंसी के उपयोग में काफी बदलाव आने की उम्मीद जरूर है।












Click it and Unblock the Notifications