• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

फांसी के बाद जल्लाद क्या करता है उस रस्सी का, जिससे दोषी को दी जाती है मौत की सजा

|

नई दिल्ली। निर्भया केस के दोषियों को फांसी दिए जाने का दिन करीब आ रहा है ऐसा माना जा रहा है कि 16 दिसंबर को निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जा सकता है। सूत्रों को मुताबिक ट्रयाल शुरू हो चुका है और उत्तर प्रदेश के मेरठ में रहने वाले जल्लाद पवन को भी फोन पर आदेश दे दिया गया है। खबरें हैं कि दोषियों को लिए फांसी का फंदा भी आ चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद उस रस्सी का क्या होता है जिसपर दोषी को लटकाया जाता है।

ब्रिटेन में था ये अंधविश्वास

ब्रिटेन में था ये अंधविश्वास

भारत में फांसी का बहुत पुराना इतिहास रहा है राजा-महाराजा के जमाने से दोषियों को फांसी देने की सजा चली आ रही है। अंग्रेजों ने भी स्वतंत्रता संग्राम के समय भारत के कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देकर शहीद किया। अंग्रेजों के ही देश ब्रिटेन में पता नहीं कहां से ऐसी धारणा फैल गई कि दोषी को फांसी पर चढ़ाने के बाद वह रस्सी दूसरों के लिए काफी लक्की हो जाती है। ब्रिटेन में जब दोषी को फांसी दी जाती थी तो रस्सी को जल्लाद को ही दे दिया जाता था।

    Capital punishment के बाद फंदे में इस्तेमाल रस्सी का क्या होता है? | वनइंडिया हिंदी
    लोग घर में रखने लगे रस्सी का टुकड़ा

    लोग घर में रखने लगे रस्सी का टुकड़ा

    ब्रिटेन के जल्लादों ने फांसी के बाद उस रस्सी से मोटी कमाई की, वहां ऐसा माना जाता था कि फांसी दिए गए रस्सी का टुकड़ा अगर कोई घर में रख ले या फिर उसका लॉकेट बना कर पहने ले तो उस इंसान की किस्मत बदल सकती है। इस बात का लाभ जल्लादों को खूब मिला, फांसी दिए जाने के बाद वह रस्सी को अपने साथ लाते और उसके टुकड़े बेचकर मोटी कमाई करते। लोग खुशी-खुशी उसे खरीदने आते थे, हालांकि वर्ष 1695 में ब्रिटेन में फांसी पर रोक लगा दी गई थी।

    भारत में जेल स्टाफ में बांट दी जाती है रस्सी

    भारत में जेल स्टाफ में बांट दी जाती है रस्सी

    भारत में वैसे तो आजादी के बाद से फांसी देने की सजा काफी हद तक कम हो गई, यहां ब्रिटेन जैसी कोई धारणा नहीं थी। भारत में जब किसी दोषी को फांसी दी जाती है तो उसकी रस्सी के टुकड़े कर जेल प्रशासन के स्टाफ में बांट दी जाती है, कई बार इसे जल्लाद को भी दे दिया जाता है। अगर फांसी पर चढ़ाया गया दोषी विवादित या आतंकवादी है तो उसकी रस्सी को तुरंत जलाकर नष्ट कर दिया जाता है।

    कोलकाता में सामने आया ब्रिटेन जैसा मामला

    कोलकाता में सामने आया ब्रिटेन जैसा मामला

    भारत में एक बार ब्रिटेन जैसा मामला पश्चिम बंगाल के कोलकाता से सामने आया था। वर्ष 2004 में जब नाटा मल्लिक जल्लाद ने रेप और हत्या के दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया तो उसकी रस्सी को अपने साथ ले गया। इस रस्सी से मल्लिक ने मोटा पैसा कमाय, दरअसल प्रदेश में ऐसा अंधविश्वास फैल गया कि रस्सी के टुकड़े का लॉकेट पहनने से युवाओं की नौकरी लग जाती है, घर में पैसा, व्यापार में वृद्धी होने लगती है।

    200 रुपये में बेचा रस्सी से बना एक लॉकेट

    200 रुपये में बेचा रस्सी से बना एक लॉकेट

    जल्लाद मल्लिक ने धनंजय चटर्जी की फांसी के टुकड़े कर उसके लॉकेट बेचने लगा हैरानी की बात तो यह थी की लोग उसे मुंह मांगी कीमत पर भी खरीदने को तैयार थे। मल्लिक रस्सी से बनाए गए एक लॉकेट के 2000 रुपये तक बेचता था, उसके पास पुरानी फांसी की रस्सियां भी थीं जिसको उसने 500 रुपए के लॉकेट बनाकर बेचता था। जब यह बात फैली तो कोलकाता डेथ पेनल्टी एसोसिएशन ने इसे अंधविश्वास बताया वहीं, मंदिरों में भी इसका विरोध हुआ। जानकारी के लिए बता दें कि रस्सी को बेचने का आधिकार जल्लाद को नहीं है।

    निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद पवन के पास आया फोन, खुद किया खुलासा

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    What does the executioner do the rope after hanging which gives death sentence to the guilty
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more
    X