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छत्‍तीसगढ़ में क्‍यों बुरी तरह हारी बीजेपी, सर्वे में सामने आई नाराजगी की वजह

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नई दिल्‍ली। छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में भूपेश बघेल के नेतृत्‍व में अपेक्षाकृत कमजोर समझी जा रही कांग्रेस ने बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया। यूं तो 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में भी सरकार बनाई है, लेकिन इन दोनों राज्‍यों में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश के उलट छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस को बंपर सीटें मिलीं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि छत्‍तीसगढ़ की जनता ने किन बातों को आधार बनाकर वोट डाला। वे कौन से कारण हैं, जिनके चलते छत्‍तीसगढ़ में बीजेपी का 15 साल का शासन चला गया और लोगों ने 'महापरिवर्तन' की राह पकड़ ली। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्‍स (एडीआर) के सर्वे में कई ऐसे मुद्दे सामने आए हैं, जिनके आधार पर उन्‍होंने वोट डाला।

छत्‍तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं ने इन चार मुद्दों को बताया सबसे बड़ा

छत्‍तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं ने इन चार मुद्दों को बताया सबसे बड़ा

सबसे पहले ग्रामीण इलाकों के मुद्दों की बात करते हैं। सर्वे में सामने आई जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में 58 प्रतिशत लोगों का यह मानना है कि 'रोजगार के बेहतर अवसर' उनकी नजर में सबसे बड़ा मुद्दा रहा। इसके बाद ग्रामीण इलाकों में दूसरे नंबर पर जो मुद्दा हावी रहा वह था- 'कृषि के लिए पानी की उपलब्‍धता'। 44 प्रतिशत लोगों ने इसे बड़ा मुद्दा माना। इन दोनों मुद्दों के अलावा 'कृषि से जुड़े उत्‍पादों की ज्‍यादा कीमत' और 'खेती के लिए बिजली' को 39 प्रतिशत मतदाताओं ने बड़ा मुद्दा माना।

शहरी क्षेत्रों में इन मुद्दों के आधार पर पड़ा वोट

शहरी क्षेत्रों में इन मुद्दों के आधार पर पड़ा वोट

एडीआर के इस सर्वे में ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ा मुद्दा रहा 'रोजगार के बेहतर अवसर'। शहरी क्षेत्रों में भी यही सबसे बड़ा मुद्दा रहा। अर्बन एरिया में जब सबसे बड़े मुद्दे के बारे में सवाल पूछा गया तो 61 प्रतिशत ने जवाब दिया 'रोजगार के बेहतर अवसर'। मतलब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्‍यादा प्रभावी मुद्दा एक ही था- रोजगार के बेहतर अवसर। शहरी क्षेत्रों में इसके बाद जो मुद्दे हावी रहे वे इस प्रकार हैं:

अच्‍छी सड़क, बेहतर ट्रांसपोर्ट, अच्‍छे अस्‍पताल/प्राइमरी हेल्‍थ केयर सेंटर्स, पीने के पानी को क्रमश: 55 प्रतिशत, 52 प्रतिशत, 48 प्रतिशत और 27 प्रतिशत लोगों ने बड़ा मुद्दा बताया।

सतनामी वोटर ने बदला गेम:

भूपेश बघेल के नेतृत्‍व में कांग्रेस जब रमन सिंह को टक्‍कर देने उतरी तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि कांग्रेस यहां 68 विधानसभा सीटें जीतकर इतिहास रच देगी और रमन सिंह जैसे कद्दावर नेतृत्‍व के साथ लड़ने वाल बीजेपी लगातार 15 साल राज करने के बाद 15 सीटों पर सिमट जाएगी। राजनीतिक पंडितों का स्‍पष्‍ट मानना था कि अजित जोगी की पार्टी बसपा के साथ मिलकर कांग्रेस की रही-सही संभावनाओं को खत्‍म कर देगी, लेकिन रिजल्‍ट इसके एकदम उलट आया। अजित जोगी-मायावती का गठजोड़ उल्‍टा बीजेपी पर भारी पड़ गया। जिस सतनामी वोट बैंक पर रमन सिंह की उम्‍मीदें टिकी थीं वह आखिरकार कांग्रेस के पक्ष में चला गया और कांग्रेस बंपर सीटों के साथ सत्‍ता में आ गई।

सर्वे में इन लोगों से मांगी गई राय

सर्वे में इन लोगों से मांगी गई राय

एडीआर ने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 77 प्रतिशत लोगों से सर्वे में राय मांगी। इसी प्रकार से 23 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो शहरों इलाकों में रहते हैं। जिन लोगों से सर्वे में सवाल पूछे गए, उनमें 47 प्र‍ितिशत जनरल कास्‍ट से हैं, 11 प्रतिशत ओबीसी, 30 प्रतिशत एससर और 12 प्रतिशत एसटी शामिल हैं।

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English summary
What Chhattisgarh wants: Nothing but better employment opportunities matter to voter
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