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मोदी सरकार के 36 मंत्री जम्मू-कश्मीर क्या करने जा रहे हैं?

By BBC News हिन्दी

नरेंद्र मोदी
Getty Images
नरेंद्र मोदी

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी हुए पाँच महीने से अधिक हो चुके हैं.

एक ओर जहाँ सरकार ये दावा करती रही है कि जम्मू-कश्मीर में अब सब ठीक है, हालात सामान्य हैं, वहीं विपक्ष बार-बार ये कहता रहा है कि अगर वहाँ सब कुछ ठीक है तो उन्हें वहां जाने से रोका क्यों जा रहा है?

विपक्ष लगातार ये सवाल भी करता रहा है कि वहां के नेताओं को नज़रबंद करके क्यों रखा गया है? और महीनों से घाटी में इंटरनेट सुविधा पर रोक क्यों है?

सत्ता और विपक्ष की इस रस्साकशी के बीच केंद्र सरकार के 36 मंत्री 18 से 25 जनवरी के बीच जम्मू और कश्मीर का दौरा करने वाले हैं.

मंत्रीमंडल
Getty Images
मंत्रीमंडल

ऑल इंडिया रेडियो की ख़बर के मुताबिक़, ये सभी मंत्री जम्मू और कश्मीर के अलग-अलग इलाक़ों में जाकर संविधान के अनुच्‍छेद-370 के प्रावधानों को जम्‍मू-कश्‍मीर से हटाए जाने के बाद के प्रभाव पर लोगों से बात करेंगे और इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी देंगे.

क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल समेत पांच मंत्री इनमें घाटी में लोगों से बात करेंगे जबकि अन्य सभी मंत्री जम्मू जाएंगे.

ये मंत्री जम्‍मू-कश्‍मीर के दोनों संभागों के विभिन्‍न जिलों में 24 जनवरी तक रहेंगे.

विपक्ष ने इसे सरकार का प्रोपोगैंडा करार दिया है और कहा है कि सरकार पहले क़ानून पास करती है और उसके बाद लोगों से उसके लिए समर्थन मांगती है.

हालांकि बीजेपी का कहना है कि ये मंत्री विकास कार्यों के लिए जम्मू कश्मीर का दौरा कर रहे हैं इसके राजनीति से कोई नाता नहीं है.

मौजूदा समय में इस किस्म के दौरे की कितनी ज़रूरत है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं, इस बारे में बीबीसी संवाददाता मानसी दाश ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार की ओर से वार्ताकार रह चुकीं प्रोफ़ेसर राधा कुमार से बात की. पढ़ें उनका नज़रिया:

मंत्रीमंडल
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मंत्रीमंडल

'पता नहीं ये करना क्या चाहते हैं!'

  • प्रोफ़ेसर राधा कुमार

मेरी समझ से यह एक बड़ी ही अजीब हरक़त है. पहले तो आपने लोगों से बिना पूछे अनुच्छेद-370 के सभी प्रावधानों को निरस्त कर दिया और अब आप उनसे बात करने जा रहे हैं.

अब आप उन्हें समझाने जा रहे हैं कि आपने दरअसल किया क्या है? वो भी पाँच महीने बाद, उनसे बिना पूछे.

स्थानीय राजनेता या तो नज़रबंद हैं या फिर हिरासत में हैं. उनसे वादा लिया गया है कि वे केंद्र सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ नहीं बोलेंगे. दोनों ही तरीक़े से नेताओं का मुँह बंद कर दिया गया है.

अब इंटरनेट के मसले पर तो हम देख ही रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक सप्ताह में देखकर जिस हद तक हो पाए आप लोगों को सहूलियत दें. अब सुप्रीम कोर्ट के जवाब में इन्होंने एक और नोटिस निकाल दिया है और कहा है कि हम कुछ प्रतिबंध जारी रखेंगे.

ऐसे में कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि ये करना क्या चाहते हैं. और अब अचानक ये 36 लोग कश्मीर जाएंगें.

कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद
Getty Images
कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद

क्या ये जायज़ा लेने की कवायद है?

अगर सरकार सोच रही है कि अब भी वो अपने लिए फ़ैसले को वापस ले सकती है तो मैं निश्चित तौर पर कहूंगी कि चलो उन्हें कुछ तो समझ आया.

लेकिन वो ये तो करने नहीं जा रहे हैं. वो तो कह रहे हैं कि हम वहाँ लोगों को समझाने जा रहे हैं.

लेकिन सवाल तो यही है कि समझाने क्या जा रहे हैं. क्या सरकार ये समझती है कि लोगों को ये नहीं पता कि 370 में क्या था?

पहले तो आप ही कह रहे थे कि शायद 35-ए के एक सीमित रूप को वापस लेकर आएं. आर्टिकल-371 में एक और प्रावधान लेकर आएं कि पहाड़ी इलाक़ों में बाहर के बहुत कम लोग ज़मीन ख़रीद पाएं. जैसे हिमाचल और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में है.

अब इन्होंने इससे भी इनकार कर दिया है. कह रहे हैं कि ऐसा कर दिया तो निवेश नहीं आएगा.

हर कोई जानता है कि जिस इलाक़े में इस तरह के गतिरोध हैं वहाँ निवेश ऐसे भी आसानी से नहीं आने वाला.

तो ऐसे में तो 'लैंड-ग्रैब' जैसी स्थिति बन जाएगी. लोग ज़मीन ख़रीद लिया करेंगे और फिर वहाँ बैठेंगे कि जब दाम अधिक होंगे तब उसे बेचेंगे.

कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद
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कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद

घाटी के नेता नज़रबंद, तो इस दौरे के मायने क्या होंगे?

ये दौरा शायद कैमरा और टीवी चैनलों के लिए है. इसके अलावा तो इस दौरे का कोई विशेष प्रयोजन नज़र नहीं आता.

बड़े-बड़े चैनल इसे दिखाएंगे और वाह-वाह कहेंगे. साथ ही सरकार के इस क़दम को 'पीछे हटने' से जोड़कर तो बिल्कुल भी नहीं देखा जाना चाहिए.

पहले तो इन्होंने जल्दबाज़ी में, बिना नोटिस दिए, बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना बिल को टेबल किये सारी बातों को एक-दो घंटे में ही पूरा कर लिया.

हल्ला ना मचे इसके लिए इन्होंने पहले ही लोगों को नज़रबंद भी कर दिया. सूचना के सारे साधन भी बंद कर दिये.

हाल में जब सरकार नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई तो उन्हें पता था कि इसका विरोध भी होना है.

फिर भी वे इस बिल को लेकर आए और एक दिन के भीतर हल्की बहस के बाद इसे भी पास कर दिया.

अब उसके बाद से जिस तरह से प्रदर्शन हो रहे हैं वो सबके सामने है. जिस तरह से लोग माँग रहे हैं कि इसे वापस ले लिया जाए वहीं उनका रुख एकदम स्पष्ट है कि हमने तो बिल पास कर दिया है.

तो ऐसे में कहाँ से नज़र आ रहा है कि सरकार अपने किसी फ़ैसले पर दोबारा सोचने वाली है?

कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद
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कश्मीर में 370 निरस्त होने के बाद

सरकार लोगों को समझा नहीं पा रही?

लोगों को अपना नज़रिया समझाने की तो बात ही अब बाकी नहीं रह गई है. पहले तो हर मामले में सलाह-मशविरा किया जाता है, वो तो समय रहते किया नहीं गया.

आप एक राज्य को पूरी तरह बदल दें. उसके स्टेटस को बदल दें. उसके अधिकारों को बदल दें. आप उसके संवैधानिक रिश्ते को बदल दें. वो भी वहाँ के लोगों से बिना पूछे.

अगर बातचीत ही करनी है तो उस मुद्दे पर की जानी चाहिए. पूछना चाहिए कि क्या हमने जो भी क़दम उठाए हैं वो हमें वापस लेने चाहिए?

लेकिन ये लोग बातचीत करने जा नहीं रहे हैं. ये तो वहाँ के लोगों से कहने जा रहे हैं कि आप लोग हमें समझते नहीं हैं.

सबको मालूम है कि इन्होंने क्या किया है और क्यों किया है. इसमें किसी को कोई शक़ ही नहीं है.

पर वो कह रहे हैं कि लोगों को ये बात समझ नहीं आती.

BBC Hindi
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English summary
What are the 36 ministers of the Modi government going to do in Jammu and Kashmir?
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