West Bengal:'शताब्दी रॉय को TMC ने नहीं बनाया, मैं खुद स्टार थी', ममता को क्या समझाना चाहती हैं बीरभूम सांसद

West Bengal assembly elections 2021:पश्चिम बंगाल के बीरभूम लोकसभा क्षेत्र से तीन बार की तृणमूल कांग्रेस सांसद शताब्दी रॉय (Shatabdi Roy) ने अभी पार्टी छोड़ने का ऐलान नहीं किया है, लेकिन उनके तेवरों से लगता है कि वह अपनी पार्टी से बहुत ही ज्यादा नाराज हो चुकी हैं। अपने राजनीतिक भविष्य का ऐलान शनिवार को करने की बात वह पहले ही कह चुकी हैं। लेकिन, उससे पहले वह जो कुछ कह रही हैं, उससे लगता है कि वह पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Bengal CM and Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee) को पार्टी की स्थिति के बारे में बहुत कुछ आगाह करना चाहती हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि किसी को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि आज वो जो भी हैं, वह तृणममूल कांग्रेस की वजह से हैं। बल्कि, शताब्दी रॉय जब राजनीति में आईं तो वो पहले से ही स्टार थी।

शनिवार को अमित शाह से हो सकती है मुलाकात

शनिवार को अमित शाह से हो सकती है मुलाकात

टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय (TMC MP Shatabdi Roy) ने इंडिया टुडे टीवी से बातचीत में कहा है कि वह शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात के लिए दिल्ली जी सकती हैं। एक सांसद होने के नाते देश के गृहणंत्री से मुलाकात में कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस साल चुनाव होने वाले हैं और इसी वजह से अगर यह मुलाकात होती है तो यह सामान्य नहीं हो सकती। क्योंकि, हाल ही में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के कई कद्दावर नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वैसे खुद शताब्दी रॉय ने भी अभी यही दावा किया है कि उनके मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से ना देखा जाए। उन्होंने कहा है, 'मैं एक सांसद हूं, मैं किसी से भी मिल सकती हूं।'

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    अपनी पार्टी से बेहद नाराज हैं शताब्दी रॉय

    अपनी पार्टी से बेहद नाराज हैं शताब्दी रॉय

    शताब्दी रॉय (Shatabdi Roy)की अपनी पार्टी से सबसे ज्यादा शिकायत ये है कि उन्हें अपने ही निर्वाचन क्षेत्र बीरभूम (Birbhum) में काम नहीं करने दिया जा रहा। एक जमाने में बंगाली फिल्मों की सुपरस्टार रहीं रॉय (Bengali superstar) का कहना है कि 'आज मेरे चुनाव क्षेत्र के लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं वहां पर उपलब्ध क्यों नहीं रहती। जो मेरी गलती नहीं है उसके लिए मैं उनके प्रति जिम्मेदार हूं। सबसे बड़ी समस्या ये है कि मुझे अपने चुनाव क्षेत्र में होने वाले पार्टी कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता। जो लोग उन कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, उनसे किसी ने कहा है कि मुझे ना बुलाएं। ' उन्होंने कहा है, 'मुझे अपनी असमर्थता के लिए जवाब देना है। लेकिन, जब मैं अपने क्षेत्र में समय देना चाहती हूं और मुझे इजाजत नहीं दी जाती, तब मुझे क्यों जिम्मेदार होना चाहिए?'

    "पार्टी ने शताब्दी रॉय को नहीं बनाया। मैं खुद एक स्टार थी।"

    उन्होंने कहा है कि, 'जब मैं 2009 में पहली बार एमपी बनी, सबने कहा कि यह स्टार हैं, नेता नहीं। यह परफॉर्म नहीं कर पाएंगी। लेकिन, मैंने सबको गलत साबित कर दिया।' गौरतलब है कि शताब्दी रॉय लगातार तीन बार से उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतती आ रही हैं। उन्होंने पार्टी नेताओं पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा है, 'पार्टी ने शताब्दी रॉय को नहीं बनाया। मैं खुद एक स्टार थी। पार्टी को मुझे कम से कम इतना सम्मान तो देना चाहिए।' वह पार्टी से आहत होने का कारण बताते हुए बोलीं कि, 'मुझे इसलिए बुरा लगता है कि मुझे कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने दिया जाता। मैं बेकार नहीं बैठी रह सकती, सैलरी लेती रहूं और घर पर बैठी वेब सीरीज देखती रहूं। मैं यह नहीं चाहती।'

    'पार्टी में कुछ तो गड़बड़ है'

    'पार्टी में कुछ तो गड़बड़ है'

    हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बारे में जरूर कहा है कि उन्होंने राजनीति में आने का न्योता दिया था, इसलिए वो इसमें आईं। लेकिन, इसका मतलब ये नहीं है कि वो बिना बुलाए पार्टी के किसी कार्यक्रम में पहुंच जाएंगी। जब उनसे पार्टी के कई कद्दावर नेताओं के बीजेपी में जाने के बारे में सीधा पूछ लिया गया तो वो बोलीं, 'जब 10 लोग एक ही बात कह रहे हैं तो इसका मतलब है कि कुछ तो गड़बड़ है। आप हर समय इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। आपको उनके साथ बैठकर, उन चीजों को सुलझाना चाहिए।'

    क्या शनिवार को ममता को झटका देने की है तैयारी ?

    क्या शनिवार को ममता को झटका देने की है तैयारी ?

    दरअसल, शताब्दी रॉय फैन क्लब नाम से एक फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट शेयर हुआ था, जिसमें उनके हवाले से घोषणा की गई थी कि वह शनिवार दो बजे कुछ बड़ा ऐलान करने जा रही हैं। उसके बाद गृहमंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात की चर्चा से यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि 16 तारीख को वह भी सुवेंदु अधिकारी की तरह ममता बनर्जी को झटका दे सकती हैं। वैसे पिछले 28 दिसंबर को टीएमसी सुप्रीमो के बीरभूम दौर के मौके पर वह वहां पर जरूर मौजूद थीं

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