जल संकट से गहरा सकता है नौकरियों का संकट
बेंगलुरु। एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय चैनल ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया और कहा कि अगले दो सालों के भीतर भारत के 21 शहरों में पीने का पानी खत्म हो जायेगा। वीडियो धड़ा-धड़ सोशलमीडिया और वॉट्सऐप पर वायरल हो गया। यहां तक चाय की दुकानों पर भी यही चर्चा हो रही है कि भई पानी खत्म होने वाला है। वैसे सच भी है चेन्नई का हाल हम देख ही रहे हैं, जहां ट्रेन से पानी पहुंचाया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं, अगर यह जल संकट ऐसे ही गहराता गया, तो आने वाले पांच सालों में लगभग हर बड़े सेक्टर में नौकरियों का संकट आ सकता है। जी हां क्योंकि मौसम में हो रहे परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज की वजह से कई बड़ी कंपनियों को अगले पांच सालों के भीतर बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। कैसे? बस यही जानने के लिये आपको आगे स्क्रॉल डाउन करना पड़ेगा।
अंतर्राष्ट्रीय संगठन सीडीपी, जिसे पहले कार्बन डिस्कलोज़र प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता था, ने एक अंतर्रार्ष्टीय रिपोर्ट रिलीज़ की है, जिसमें कहा गया है कि दुनिया की छोटी-बड़ी कंपनियों, जिनका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 17 ट्रिलियन डॉलर का है, उनके सामने 1 ट्रिलियन डॉलर का रिस्क यानी जोखिम खड़ा हो सकता है। जाहिर है जब बड़ी कंपनियां पर संकट गहरायेगा, तो छोटी कंपनियों पर इसका असर जरूर होगा। और ऐसा होने पर नौकरियां व करोड़ों लोगों का रोजगार भी खतरे में पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार क्लाइमेट चेंज का असर बैंकिंग, सीमेंट, आईटी सेक्टर, कंज्यूमर गुड्स, इलेक्ट्रिक यूटिलिटी, बिजनेस एंड फाइनेंशियल सर्विसेस और यहां तक कपड़ा व्यापार पर तक पड़ेगा।
बात करते हैं भारत की
रिपोर्ट में लगभग हर सेक्टर का आंकलन किया गया है। साथ ही उस सेक्टर से जुड़ी हर कंपनी के सामने किस प्रकार का रिस्क आ सकता है, इसकी चर्चा की गई है। हम बात कर रहे हैं उन जोखिमों की जिसका असर भारत पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है।
बैंकिंग सेक्टर
जिस तरह से क्लाइमेट चेंज के कारण अनियमित बारिश हो रही है, पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, उसे देखते हुए भारत के कई हिस्सों में सूखे की समस्या कभी भी गहरा सकती है। भारतीय स्टेट बैंक भारत का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर का बैंक है और सबसे ज्यादा लोन गरीब किसानों व कृषि से संबंधी व्यापारियों को दे रखे हैं। अगर सूखा पड़ता है, तो लोन लेने वाले लोग समय पर लोन चुकाने में असमर्थ होंगे, जिसका सीधा असर एसबीआई के बिजनेस पर पड़ेगा।
कई ऐसे बैंक हैं, जिनकी क्लाइंट वो कंपनियां हैं, जिनके उद्योग बगैर पानी के एक दिन भी आगे नहीं बढ़ सकते। यानी अगर बाढ़ आयी, तो मुसीबत और अगर सूखा पड़ा तो भी मुसीबत। कोटक महिंद्रा बैंक, ऐक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेस ने इस रिपोर्ट में यह कहा है कि अगर जल संकट गहराता है या फिर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका असर बिजनेस पर जरूर पड़ेगा।
आईटी कंपनियों पर कैसे पड़ेगा प्रभाव
रिपोर्ट में टीसीएस और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने कहा है कि हमारे सभी बड़े ऑफिस मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई जैसे शहरों में स्थित हैं। इन सभी शहरों पर पीने के पानी का संकट गहरा रहा है। तो उसका असर उनकी मैनपावर पर पड़ेगा। रिपोर्ट में विप्रो को कोट करके लिखा गया है कि अगर तापमान बढ़ता है, पानी का संकट गहराता है, तो कर्मचारियों की उपस्थिति कम हो सकती है। जाहिर है उसका सीधा असर रेवेन्यू पर पड़ेगा।
ऐसे तमाम सेक्टर हैं, जिनका ताल्लुक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर पानी से है। जरा सोचिये अगर पानी का संकट ऐसे ही गहराता रहा, अगर क्लाइमेट चेंज के कारण अगर बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहर बारिश को तरसते रहे, तो उसका सीधा असर हर क्षेत्र की कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ेगा। जाहिर है अगर रेवेन्यू नहीं बढ़ा तो नये रिक्रूटमेंट भी नहीं होंगे और ऐसा होने पर नौकरियों पर संकट निश्चित रूप से गहरा सकता है।













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