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उत्‍तराखंड में चीन बॉर्डर से बस 120 किलोमीटर दूर उतरा IAF का AN-32, देखें Video

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नई दिल्‍ली। पूर्वी लद्दाख में चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है। सोमवार को इस अहम घटनाक्रम के बाद मंगलवार को उत्‍तराखंड में चीन बॉर्डर के करीब इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एएन-32 और हेलीकॉप्‍टर एमआई-17 नजर आए हैं।उत्‍तराखंड के चिनयालिसौर एयरस्ट्रिप पर इन एयरक्राफ्ट को देखा गया है।

यह भी पढ़ें-चीन बॉर्डर पर रातभर गश्‍त करते IAF के लड़ाकू विमान

बस 125 किलोमीटर दूर चीन बॉर्डर

बस 125 किलोमीटर दूर चीन बॉर्डर

एडवांस्‍ड लैंडिंग ग्राउंड चिनयालिसौर उत्‍तराखंड के चिनयालिसौर एयरस्ट्रिप पर इन एयरक्राफ्ट को देखा गया है। चिनयालियौर एयरस्ट्रिप, आईएएफ का एडवांस्‍ड लैंडिंग ग्राउंड है और यहां से चीन बॉर्डर की दूरी 125 किलोमीटर है। यह जगह उत्‍तरकाशी जिले में आती है और रणनीतिक तौर पर भारत के लिए काफी अहम है। साल 2018 में आईएएफ की ड्रिल गगन शक्ति के तहत यहां पर रणनीतिक तैयारियों को परखने के लिए एएन-32 ने पहली बार लैंडिंग की थी। उत्‍तराखंड से यह खबर ऐसे समय आई है जब यहां पर चीन से सटे बॉर्डर पर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के काम में तेजी आ रही है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) यहां पर कई ऐसे पुलों का निर्माण कर रही है जिनके बाद सेना के मूवमेंट में आसानी हो सकेगी।

न सिर्फ चीन बल्कि नेपाल का भी बॉर्डर

उत्‍तराखंड वह राज्‍य है जहां पर न केवल चीन बल्कि नेपाल का भी बॉर्डर है। दोनों ही देशों के साथ इस समय भारत के रिश्‍ते बिगड़े हुए हैं। हाल ही में उत्‍तराखंड सरकार की तरफ से चीन बॉर्डर तक जाने वाली तीन महत्‍वपूर्ण सड़कों के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क में 70 हेक्‍टेयर की फॉरेस्‍ट लैंड की मंजूरी दे दी है।यह फैसला 30 जून को 15वीं स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ एडवाइजरी बोर्ड मीटिंग में लिया गया है।जिस सड़क निर्माण के लिए प्रस्‍ताव को राज्‍य सरकार ने मंजूरी दी है उसमें गरतंग गली रोड जो उत्‍तरकाशी जिले में आती है, वह भी शामिल है। यह भारत और तिब्‍बत के बीच एक बहुत पुरानी सड़क है। वानिकी मंत्री हरक सिंह रावत ने बताया कि ये सड़कें राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण हैं क्योंकि ये इंडो-तिब्‍बत बॉर्डर पुलिस के बेस कैंप को जोड़ती है।

तिब्‍बत के करीब बन रही हैं तीन सड़कें

तिब्‍बत के करीब बन रही हैं तीन सड़कें

यह कैंप उत्‍तरकाशी जिले में चीन बॉर्डर के करीब है। वानिकी मंत्री रावत का कहना है कि उन्‍होंने बताया कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा की दिशा में उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। तीन सड़कों के निर्माण से जुड़े प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई है। ये सड़कें गंगोत्री नेशनल पार्क से गुजरेंगी जिसमें 11.85 किलोमीटर वाली सुमला से थांगला तक जाने वाली सड़क शामिल है। इस सड़क के लिए 30.39 हेक्‍टेयर फॉरेस्‍ट लैंड की मंजूरी दी गई है। दूसरी सड़क 6.21 किलोमीटर लंबी है और यह त्रिपानी से रंगमछागार तक है। इस सड़क के लिए 11.218 हेक्‍टेयर जमीन की मंजूरी दी गई है। तीसरी सड़क 17.60 किलोमीटर लंबी है और यह मंडी से संगचोकला तक है। इस सड़क के लिए 31.76 हेक्‍टेयर की जमीन की मंजूरी दी गई है।

62 की जंग में सड़क न होने का खामियाजा

इन प्रस्‍तावों को अब अंतिम मंजूरी के लिए वाइल्‍ड लाइफ के लिए बने नेशनल बोर्ड को भेजा जाएगा। मंत्री रावत ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण के लिए पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। साथ ही बताया कि सन् 1962 की जंग में यहां पर बॉर्डर के इलाकों तक कोई सड़क नहीं थी और चीन को उसका फायदा हुआ था। वहीं एनबी शर्मा जो कि गंगोत्री नेशनल पार्क के डिप्‍टी डायरेक्‍टर हैं, उन्‍होंने बताया कि ये सड़कें चीन सीमा के करीब स्थित इस पार्क का आंतरिक हिस्‍सा हैं। अभी तक सुमला, त्रिपानी और मंडी तक आईटीबीपी के जवानों को बॉर्डर के इलाकों तक जाने के लिए पैदल चलना पड़ता है।

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English summary
India Air Force AN-32 and Mi17 chopper at Chinyalisaur airstrip in Uttarakhand near China border.
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