ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव: 150 वार्ड के लिए बैलेट पेपर से होगी वोटिंग, जानिए चुनाव से जुड़ी अहम बातें
हैदराबाद। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) का चुनाव इस वक्त किसी नेशनल लेवल के चुनाव से कम नहीं लग रहा है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों के अंदर चुनाव प्रचार में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डी से लेकर देश के गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को यहां देखा गया है। इस वक्त हैदराबाद के नगर निगम चुनाव पर पूरे देश की नजर है। 1 दिसंबर को निगम के सभी 150 वॉर्ड और एक मेयर पोस्ट के लिए वोटिंग होगी और 4 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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बैलेट पेपर से होगा नगर निगम चुनाव
आपको बता दें कि इस बार का ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव कई मायनों में बहुत खास रहने वाला है। पहली बात तो ये है कि चुनाव प्रचार में कई दिग्गज नेताओं को प्रचार में आने के बाद पहले ही ये चुनाव कई मायनों में खास बन चुका है। इसके अलावा इस चुनाव के खास होने की वजह ये है कि ये चुनाव इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पूरी तैयारी भी कर ली है।
कोरोना के चलते बैलेट पेपर से होगी वोटिंग
राज्य चुनाव आयोग ने इस बारे में बताया है कि कोरोना महामारी के चलते और सभी राजनीतिक दलों से बात करने के बाद ये तय किया गया है कि चुनाव बैलेट पेपर से ही कराया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने कहा है कि EVM मशीन में वोटर कुछ बटनों को बार-बार दबाते हैं, इसलिए कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बैलेट पेपर के इस्तेमाल से कोरोना के फैलने का खतरा कम है। पिछले साल भी हैदराबाद नगर निगम चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए गए थे।
80 लाख से ज्यादा छपवाए गए बैलेट पेपर
राज्य निर्वाचन आयुक्त सी पार्थसारथी ने बताया है कि वोटिंग की सभी तैयारियां हो चुकी हैं। कुल मतदाता की संख्या को देखते हुए 80 लाख से ज्यादा बैलेट पेपर छपवाए गए हैं। इन चुनावों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के कुल 1122 प्रत्याशी भाग ले रहे हैं। इसमें TRS इकलौती पार्टी है, जो सभी 150 वार्ड पर चुनाव लड़ रही है। वहीं बीजेपी भाजपा ने 149, कांग्रेस ने 146 और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 51 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हुए हैं।
नगर निगम में अभी TRS है सबसे बड़ी पार्टी
आपको बता दें कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के पिछले चुनाव में यानि कि 2016 में तेलंगाना राष्ट्र समिति ने सबसे ज्यादा 99 सीटें जीती थी। वहीं ओवैसी की पार्टी AIMIM को 44 सीटें मिली थीं। बीजेपी 4 को 4, टीडीपी और कांग्रेस को 2-2 सीटों पर संतुष्ट होना पड़ा था।












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