नजरिया: तीन विवाद बने स्मृति इरानी की विदाई की वजह?
पीयूष गोयल को उस दिन वित्त मंत्रालय का अस्थायी प्रभार मिलना लगभग तय था, जिस दिन अरुण जेटली की सर्जरी हो. उनका गुर्दे का प्रत्यारोपण आज (सोमवार को) हुआ है. इस बारे में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने भी जानकारी दी है.
लेकिन सबसे अहम बदलाव सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी को हटाया जाना है. इस मंत्रालय में राज्यमंत्री रहे राज्यवर्धन सिंह राठौर को स्वतंत्र प्रभार दिया गया है. ये सबसे अहम है.
बीते कुछ दिनों से सूचना प्रसारण मंत्रालय कई विवादों में घिरा हुआ था. प्रधानमंत्री कार्यालय भी इसकी निगरानी कर रहा था.
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तीन अहम विवाद
खासतौर पर फ़िल्म पुरस्कार समारोह को लेकर जिस तरह विवाद हुआ, जहां पुरस्कार के लिए चुने गए कई लोगों ने इस बात पर विरोध किया कि पुरस्कार राष्ट्रपति नहीं देंगे बल्कि मंत्री देंगी.
उस समय जानकारी मिली थी कि राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस पर आश्चर्य जाहिर किया था. ये भी बताया गया था कि जो भ्रम की स्थिति बनी उसे लेकर राष्ट्रपति कार्यालय ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की है.
इसके पहले सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक सर्कुलर जारी हुआ था कि किस तरह सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया को मॉनिटर किया जाएगा. अगर कोई फ़ेक न्यूज़ होती है तो क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे. इसे लेकर पत्रकारों और पत्रकारों के संगठनों ने विरोध किया था. उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर सूचना प्रसारण मंत्रालय को सर्कुलर वापस लेना पड़ा था.
सूचना प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती के बीच भी विवाद चल रहा था. प्रसार भारती पर नियंत्रण की कोशिश और उनके बजट को कम करने की कोशिश से जुड़े विवाद के बाद प्रसार भारती ने सार्वजनिक तौर पर मंत्रालय से मतभेद जाहिर करना शुरू कर दिया.
मंत्रालय की कई समस्याएं सामने आ रही थीं और लग रहा था कि मंत्री ठीक तरह से काम कर नहीं पा रही हैं.
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दूसरी बार झटका!
मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस समय कोई बेवजह का विवाद नहीं चाहता. प्रधानमंत्री मोदी नहीं चाहते होंगे कि इस तरह मामला बिगड़े और एक तरह से समय के मुताबिक फ़ैसला किया गया है.
स्मृति इरानी के साथ दूसरी बार ऐसा हुआ है. पहले उन्हें मानव संसाधन मंत्रालय से हटाया गया था. ये फ़ैसला काफी विवाद के बाद लिया गया था.
कई कुलपतियों के साथ उनके विवाद सामने आए थे. स्मृति के बर्ताव और उनके काम करने के तरीके की शिकायत की गई थी.
उन्हें जब मानव संसाधन मंत्रालय से हटाया गया था तो इसे एक चेतावनी माना गया था कि वो अपने काम करने का तरीका बदलें.
'पीएम ने दिया था संकेत'
इरानी को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया और कुछ समय बाद उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय दिया गया. लेकिन उनके यहां आने के बाद भी विवाद शुरू हो गए.
ये बात सामने आई की प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) में कई अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया. बदलाव के बाद अगर कुछ सकारात्मक नतीजे नहीं मिलते हैं तो मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री इसका समर्थन करेंगे.
बीच में ये भी बात सामने आई कि मंत्रिमंडल की एक बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से मंत्रियों को एक सलाह दी गई कि जो सकारात्मक बदलाव हम करना चाहते हैं, जरूरी नहीं कि वो सख्ती के साथ ही किया जाए. उस समय ये साफ नहीं हुआ था कि प्रधानमंत्री का इशारा किस मंत्री की तरफ है.
सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और सरकार के बीच पुल का काम करने वाला मंत्रालय है और अगर इस मंत्रालय में संवाद को लेकर इतना विवाद हो और वो खुद विवादों में आ जाए तो साफ है कि कुछ न कुछ कमियां थीं.
स्मृति इरानी मीडिया खासकर फ़िल्म उद्योग से जुड़ी रही हैं. वो इस मंत्रालय में बेहतर कर पाएंगी, शायद इस सोच के साथ ही प्रधानमंत्री ने उन्हें ये मंत्रालय दिया था. लेकिन उनके काम करने का तरीका एक बड़ा मुद्दा बन गया.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से शेखर अय्यर की बातचीत पर आधारित)
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