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Video:सेना ने इस वजह से जल्दी दफनाए आतंकियों के शव

उरी। रविवार को हुए आतंकी हमले के बाद इंडियन आर्मी ने मारे गए सभी चारों आतंकियों को हमले वाली जगह से 50 किमी दूर दफना दिया। आर्मी के इस रवैये को लेकर कई लोग उस पर सवाल भी उठा रहे हैं। अगर प्रोटोकॉल की बात करेंतो दफनाने से पहले कम से कम एक माह तक डेड बॉडी को संरक्षित करके रखा जाता है। इस हमले में आतंकियों के शव को सिर्फ एक ही दिन में दफना दिया गया।

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घाटी के हालातों से वाकिफ सेना

जो लोग सेना के इस रवैये पर सवाल उठा रहे हैं उन्‍हें शायद अधिकारियों का यह जवाब संतुष्‍ट कर जाए। अधिकारियों की मानें तो इसकी दो वजहें हो सकती हैं। आतंकियों की डेडबॉडीज इतनी बुरी तरह से बिगड़ चुकी थीं कि उन्‍हें संरक्षित करके रखना संभव नहीं था। दूसरा जम्‍मू कश्‍मीर के जो वर्तमान हालात हैं वे सेना को ऐसा करने की इजाजत नहीं देते थे।

आतंकियों के लिए उमड़ता हुजूम

पिछले दो वर्षों में एक अजीब सा माहौल देखने को मिल रहा है जहां पर घाटी में आतंकियों के अंतिम संस्‍कार में लोगों की भीड़ उमड़ने लगती है। घाटी के लोग ऐसा करके उन्‍हें शहीद का दर्जा देने लगते हैं। सेना इन सबसे बचना चाहती थी और इस वजह से ही आतंकियों को अगले दिन दफना दिया गया।

एक माह तक रखी गईं डेडबॉडीज

मुंबई हमले यानी 26 /11 के आतंकियों की डेडबॉडीज को करीब एक माह तक रखा गया था। वहीं पठानकोट आतंकी हमले के आतंकियों की डेडबॉडीज भी करीब एक माह तक सुरक्षित रखी गई थी।

उरी में जो कुछ भी हुआ उसकी तुलना इन दोनों ही घटनाओं से नहीं की जा सकी है। खासतौर पर तब जब कश्‍मीर में स्‍थानीय आतंकियों के अंतिम संस्‍कार में हुजूम उमड़ने की परंपरा शुरू हो गई हो।


कासिम के लिए घाटी के लोग

जिस समय लश्‍कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु कासिम को मारा गया था उस समय उसके जनाजे में भीड़ शामिल थी। कासिम पाकिस्‍तानी आतंकी था और उरी में सेना नहीं चाहती थी कि ऐसा कुछ फिर से हो। वहीं दूसरी ओर एनआईए की एक टीम भी सोमवार को उरी पहुंच गई थी।

रिस्‍क नहीं लेना चाहती सेना

आतंकियों की फोटोग्राफ के अलावा उनके डीएनए सैंपल लिए गए थे। इसके बाद ही कैंप के नजदीक एक अज्ञात जगह पर इन आतंकियों को दफनाया गया। इससे पहले भारत कई बार पाकिस्‍तान को आतंकियों की डेडबॉडीज लेने के लिए कह चुका है।

अधिकारी मानते हैं कि पाकिस्‍तान कभी भी आतंकियों की डेडबॉडीज को स्‍वीकार नहीं करेगा। सेना किसी तरह को कोई रिस्‍क नहीं लेना चाहती और इसलिए ही उसने इतना अहम और बड़ा कदम उठाया।

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