क्यों वरुण गांधी नहीं करेंगे राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार

वरुण कहते हैं कि उन्होंने पार्टी को अपने निर्णय से अवगत करा दिया है। वरुण की मानें तो वह इस तरह की राजनीति में जरा भी यकीन नहीं रखते हैं।
जिस समय वरुण गांधी ने सुल्तानपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, उस समय पार्टी के भीतर खुशी की लहर दौड़ गई थी। अब वरुण का यह नया पैंतरा बीजेपी के साथ ही साथ मोदी के लिए भी उत्तर प्रदेश में कुछ मुश्किलें पैदा कर सकता है। सुल्तानपुर, गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले अमेठी का पड़ोसी मुल्क है।
राजनीति के विशषज्ञ इस बात को मानते हैं कि गांधी परिवार का नाम जुड़े होने की वजह से पार्टी शायद वरुण को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने से हमेशा बचती आई है। वरुण का यह नया बयान कहीं न कहीं विशेषज्ञों की बात को भी सही साबित करता है।
वरुण अपनी रैलियों में नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लेते
वरुण ने एक न्यूजपेपर को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह राहुल गांधी के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहेंगे। उनकी मानें तो राहुल गांधी या फिर गांधी परिवार के दूसरे सदस्य के खिलाफ कैंपेनिंग करने पर वह असहज महसूस करते हैं।
यहां तक कि वह रायबरेली में सोनिया गांधी के खिलाफ भी चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। यहां यह बात भी ध्यान देने वाली है कि बीजेपी के बाकी नेताओं से अलग अभी तक वरुण कभी भी अपनी रैलियों में नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लेते हैं।
मोदी से कन्नी काटते नजर आने वाले वरुण के साथ जुड़ा गांधी सरनेम भ्ाी कहीं न कहीं राजनीति में उनकी उस पहचान को कायम न कर पाने की भी वजह में तब्दील होता जा रहा है, जिसकी उम्मीद खुद वरुण ने साल 2009 से लगा रखी थी।
आज शायद मोदी बीेजेपी के सबसे बड़े नेता के तौर पर पार्टी में मौजूद हैं। वरुण ने अपने दो इंटरव्यू में खुद इस बात काे स्वीकार किया था कि कहीं न कहीं मोदी को लेकर उनकी राय थोड़ी अलग है। साल 2004 में एक इंटरव्यू में वरुण ने माना था उन्होंने नरेंद्र मोदी की गोधरा दंगों की वजह से आलोचना की थी।
बीजेपी के फायरब्रांड नेता की छवि रखने वाले वरुण बड़ी साफगोई से इस बात को कहते हैं कि आग सिर्फ सबकुछ खत्म करती हैं लेकिन जिंदगी में सिर्फ रिश्ते ही आपको बचाते हें। साफ है कि कहीं न कहीं वरुण का यह रवैया पार्टी की राह थोड़ी मुश्किल कर सकता है।












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