Vaccination policy:सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, सारे दस्तावेज और वैक्सीन खरीद की पूरी डीटेल जमा करे सरकार
नई दिल्ली, 2 जून: केंद्र की कोविड वैक्सीनेशन नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के तेवर बहुत ही सख्त हो गए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है वह उसके सामने ऐसे सारे दस्तावेज और फाइलों की नोटिंग जमा करे, जिससे की उसकी वैक्सीनेशन नीति का पता चले। इसके साथ ही अदालत ने अबतक खरीदी गई सारी वैक्सीन की पूरी डीटेल भी जमा करने को कहा है। अदालत ने भारत सरकार से इन निर्देशों के मुताबिक 2 हफ्तों के भीतर हलफनामा देने को कहा है।
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2 हफ्तों के अंदर हलफनामा दे सरकार
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की स्पेशल बेंच ने कहा है कि एफिडेविट दाखिल करते समय भारत सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित दस्तावेजों की कॉपी और फाइलों की नोटिंग जिससे कि इसपर उसके विचार का पता चले और पूरी वैक्सीनेशन पॉलिसी का विवरण भी जाहिर हो। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह आदेश पिछले 31 मई को ही दिया था, जो कि 2 जून को उसकी वेबसाइट पर अपलोड हुआ है। अदालत ने कहा है, 'हम भारत सरकार को दो हफ्तों के अंदर एफिडेविट दायर करने का निर्देश देते हैं।'
वैक्सीन खरीदने का पूरा ब्योरा मांगा
केंद्र की वैक्सीनेशन पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का तेवर कितना सख्त है, यह इसी से अंदाजा लगता है कि उसने केंद्र सरकार से कहा है कि यह सुनिश्चत होना चाहिए कि आदेश में शामिल हर मुद्दे का जवाब अलग से होना चाहिए। मसलन, कोर्ट ने कहा है, 'अबतक की गई सभी कोविड-19 वैक्सीन (कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी) की खरीद का केंद्र सरकार का पूरा ब्योरा....आंकड़ों में स्पष्ट होना चाहिए- 1: सभी 3 वैक्सीन की खरीद के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी सभी आदेशों की तारीखें; 2: किस तारीख को कितनी वैक्सीन खरीदने के आदेश दिए गए; और 3: सप्लाई की संभावित तारीख......'
31 मई को दिए गए थे निर्देश
31 तारीख को सुप्राीम कोर्ट ने कोविड-19 वैक्सीन को लेकर कई तरह के तीखे सवाल किए थे। इसमें ग्रामीण और शहरी भारत के बीच डिजिटल डिवाइड की बात भी उठाई गई थी और वैक्सीनेशन के लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता, वैक्सीन खरीद नीति और कीमतों में अंतर भी शामिल थे। अदालत ने कहा था कि नीति बनाने वालों को जमीनी हालात का भी पता रहना चाहिए, ताकि अप्रत्याशित संकट का सामना किया जा सके। अदालत ने सरकार को यह भी सलाह दी थी कि महामारी से पैदा हुई विशेष परिस्थिति के मद्देनजर अपनी नीतियों में लचीलापन रखे। बता दें कि सर्वोच्च अदालत ने ये तमाम आदेश और निर्देश कोविड-19 मैनेजमेंट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिए हैं।












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