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मेघालय HC का फैसला- जबरदस्ती टीकाकरण मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

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नई दिल्‍ली, 24 जून। मेघालय हाईकोर्ट ने कहा कि जबरन टीकाकरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत अनिवार्य मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा कि दुकानदारों, टैक्सी चालकों आदि को अपने व्यवसाय या पेशे को फिर से शुरू करने के लिए एक शर्त के रूप में टीका लगाने के लिए मजबूर करना "इससे जुड़े कल्याण के मूल उद्देश्य को प्रभावित करता है।" अदालत ने एक स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में यह टिप्पणी की। पीठ ने कई अदालती आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि बल द्वारा टीकाकरण को हतोत्साहित किया गया है। पीठ के आदेश में शारीरिक स्वायत्तता से संबंधित मामलों पर भी प्रकाश डाला गया।

मेघालय HC का फैसला- जबरदस्ती टीकाकरण मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

मुख्य न्यायाधीश विश्वनाथ सोमददर और न्यायमूर्ति एचएस थांगखियू की पीठ ने यह भी कहा कि टीकाकरण समय की आवश्यकता है और कोविड -19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए एक आवश्यक उपाय है। हालांकि पीठ ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार ऐसी कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है जो संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत निहित आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करे। कोर्ट ने अपने फैसले में पढ़ा कि लगभग 107 साल पहले, न्यूयॉर्क हॉस्पिटल्स के श्लोएंड्रोफ वी सोसाइटी में, एनवाई जस्टिस कार्डोज़ो ने फैसला सुनाया था कि 'वयस्क वर्षों और स्वस्थ दिमाग के प्रत्येक इंसान को यह निर्धारित करने का अधिकार है कि उनके शरीर के साथ क्या किया जाना चाहिए'।

कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के प्रधान सचिव ने कहा कि वैक्सीन अनुपालन पर मौजूदा आदेशों में संशोधन किया जाएगा।

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English summary
Vaccination by force violates fundamental rights: Meghalaya HC
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