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Uttarakhand glacier burst:नंदा देवी ग्लेशियर कहां है, इसके बारे में सबकुछ जानिए

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नई दिल्ली:उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर टूटने से धौलीगंगा नदी में अचानक बाढ़ आने से प्रदेश के उत्तरी हिस्से में काफी तबाही हुई है और कई लोगों की जानें गई हैं। इस घटना में करीब सौ से डेढ़ सौ लोगों के बाढ़ में बह जाने की आशंका है। इनमें से ज्यादातर लोग तपोवन स्थित पॉवर प्रोजेक्ट में काम कर रहे मजदूर बताए जा रहे हैं। बाढ़ इतनी विनाशकारी थी कि पॉवर प्रोजेक्ट, कई घर और निर्माण से जुड़ा बाकी ढांचा देखते ही देखते पानी के साथ रेत की तरह बह गया। आइए जानते हैं कि नंदा देवी ग्लेशियर कहां है, कितना बड़ा है और कैसे इसका जल गंगा नदी तक पहुंचता है?

नंदा देवी ग्लेशियर कहां है ?

नंदा देवी ग्लेशियर कहां है ?

नंदा देवी ग्लेशियर नंदा देवी चोटी के नजदीक है, जो कि कंचनजंगा के बाद देश की सबसे ऊंची पर्वत-चोटी है। वैसे कंचनजंगा चोटी भारत और नेपाल सीमा पर है और इस हिसाब से पूरी तरह भारत के आंतरिक हिस्से में मौजूद यह देश की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह चोटी गढ़वाल हिमालय का हिस्सा है। वैसे अगर पूरे विश्व की बात करें तो नंदा देवी पर्वत चोटी दुनिया की 23वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है, जो समुद्र की सतह से 7,108 मीटर ऊंची है। नंदा देवी ग्लेशियर के दो हिस्से हैं। नंदा देवी चोटी के उत्तर में उत्तरी नंदा देवी ग्लेशियर और दक्षिण में दक्षिणी नंदा देवी ग्लेशियर। लेकिन, इन दोनों ग्लोशियरों की लंबाई 19 किलोमीटर ही है।

गंगा में कैसे मिलता है नंदा देवी ग्लेशियर का जल?

गंगा में कैसे मिलता है नंदा देवी ग्लेशियर का जल?

दोनों नंदा देवी ग्लेशियर पूरे साल पूरी तरह से बर्फ से ढंकी रहती है, जिसके एक हिस्से में हुई टूट के चलते रविवार वाली तबाही होने की बात सामने आ रही है। नंदा देवी के पश्चिम में ऋषिगंगा घाटी और पूरब में गौरीगंगा घाटी है। यह ग्लेशियर नंदा देवी सैंचुरी (अभयारण्य) का हिस्सा है, जिसका जल पश्चिम की ओर ऋषिगंगा में प्रवाहित होता है। नंदा देवी ग्लेशियर के पिघलने वाले जल से कई धाराएं और नदिया बनती हैं। ऋषिगंगा में सबसे पहले इसका जल प्रवाहित होने के बाद वह धौलीगंगा नदी में मिलता है। बता दें कि धौलीगंगा गंगा की सहायक नदियों में एक है। आगे चलकर धौलीगंगा विष्णुप्रयाग में अलकनंदा नदी में मिल जाती है। धौलीगंगा उत्तराखंड के जोशीमठ और कर्णप्रयाग से होकर गुजरती है, जबकि अलकनंदा देवभूमि के महत्वपूर्ण स्थलों- श्रीनगर, हरिद्वार, रानीखेत, भीमताल और हलद्वानी जैसे जगहों से होकर बहती है। (ऊपर की दोनों तस्वीरें-फाइल)

    Uttarakhand Glacier Tragedy: जानें कैसे बनता और टूटता है ग्‍लेशियर ? | वनइंडिया हिंदी
    सेना भी राहत-बचाव कार्य में जुटी

    सेना भी राहत-बचाव कार्य में जुटी

    रविवार को नंदा देवी ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद आई भयानक बाढ़ के चलते कई लोगों के शव बरामद हो चुके हैं और 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना की वजह से ऋषिगंगा के पास बन रहा एनटीपीसी का एक छोटा पॉवर प्लांट पानी में बह गया और हजारों लोगों को अलकनंदा और धौलीगंगा नदियों में आई बाढ़ के चलते निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। त्रासदी का अंदाजा इसी से लगाई जा सकता है कि राहत और बचाव के कार्य में एनडीआरएफ,एसडीआरएफ, आईटीबीपी और बाकी एजेंसियों के साथ ही सेना के करीब 600 जवानों को राहत और बचाव के काम में लगाया गया है। इसके साथ ही नौसेना के गोताखोरों की सात टीमों को भी स्टैंडबाय रखा गया है। ऋषिगंगा पॉवर प्लांट में करीब 160 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से तपोवन सुरंग में फंसे 16 लोगों को आईटीबीपी ने सुरक्षित बचाया है। आसपास के इलाके में सड़क और रेल प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है और एजेंसियां वहां काम कर रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है।

    इसे भी पढ़ें- Uttarakhand glacier burst: कैसे टूटते हैं ग्लेशियर और इसके कारण क्या हैं?

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    English summary
    Devastation in Uttarakhand due to the breaking of glacier in Nanda Devi, this is the second highest mountain peak of India in Garhwal-Himalaya
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