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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है ये गठबंधन

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नई दिल्ली, 14 जून: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों में हलचल शुरू हो गई है। खासतौर से पंचायत चुनाव के बाद एक और भाजपा में लगातार बैठकों का दौर है तो वहीं समाजवादी पार्टी के भी छोटे दलों के साथ गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले किसान आंदोलन और अब पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक परिदृश्य में काफी कुछ नया दिख रहा है। सपा और राष्ट्रीय लोकदल के साथ आजाद समाज पार्टी के भी आने की चर्चा है। जिसने सियासी पारे को बढ़ा दिया है। निश्चित ही ये गठबंधन भाजपा की मुश्किल को बढ़ाएगा। हालांकि सवाल ये है कि ये गठबंधन क्या कागजों की तरह से जमीन पर उतरेगा। हाल के चुनावों को देखते हुए तो ये नहीं लगता और ऐसा कहने की कुछ ठोस वजहे हैं।

    UP Election 2022: Western Uttar Pradesh में BJP की मुश्किल बढ़ा सकता है ये गठबंधन | वनइंडिया हिंदी
    पश्चिम यूपी के लिहाज से ये बहुत मजबूत गठबंधन

    पश्चिम यूपी के लिहाज से ये बहुत मजबूत गठबंधन

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिहाज से देखा जाए तो समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल मिलकर बड़ी ताकत हैं। वेस्ट यूपी में मौटे तौर पर मुसलमान वोटों को सपा के साथ तो जाटों को लोकदल के साथ माना जाता है। वहीं चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने हालिया पंचायत चुनाव अच्छा असर दिखाया है। ऐसे में पश्चिम यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-आरएलडी-आजाद पार्टी में गठबंधन होता है तो ये निश्चित की बड़ी ताकत हैं।

    क्या वोट ट्रांसफर करा सकते हैं ये नेता

    क्या वोट ट्रांसफर करा सकते हैं ये नेता

    किसान आंदोलन के बाद लोकदल पश्चिम यूपी में उभरती दिखी है तो वहीं मायावती के ज्यादा सक्रिय ना होने की वजह से आजाद समाज पार्टी ने भी दम दिखाया है। ऐसे में सपा, आरएलडी और आजाद समाज पार्टी काफी मजबूत गठबंधन दिखता है लेकिन सवाल ये है कि क्या ये दल और इनके मुख्य नेता अपने बेस वोट को गठबंधन के साथी को दिला पाएंगे। क्या जयंत चौधरी के कहने से जाट वोट आजाद समाज पार्टी को चला जाएगा या फिर चंद्रशेखर के प्रभाव वाले वोटर राष्ट्रीय लोकदल को वोट देंगे। ये सवाल है और इस सवाल की वजह बीते कुछ इलेक्शन हैं।

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    यूपी के हालिया चुनावों के नतीजे गठबंधन पर क्या कहते हैं

    यूपी के हालिया चुनावों के नतीजे गठबंधन पर क्या कहते हैं

    इस गठबंधन की सुगबुगाहट के साथ ही विश्लेषकों ने मुस्लिम, जाट और दलितों के वोट साथ में जोड़ने शुरू कर दिए हैं। कागजों पर जोड़तोड़ से अलग बीते कुछ चुनाव के नतीजों से देखें तो गठबंधन के नतीजे बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो सपा, बसपा और रालोद साथ में थे। कागजों पर ये गठबंधन बहुत मजबूत भी था लेकिन नतीजे क्या रहे, ये सामने हैं। नतीजों से साफ था कि वोट ट्रांसफर नहीं हुआ, यहां तक कि मायावती ने तो ये साफतौर पर ये कहा भी। उससे पहले 2017 में सपा-कांग्रेस साथ लड़े थे। 2014 में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश में साथ थे। इन तमाम गठबंधनों की हार में बड़ी वजह वो ट्रांसफर ना होना रहा है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि 2022 अगर इन दलों में गठबंधन होता है तो क्या नतीजे आते हैं।

    English summary
    samajwadi party rld and Azad Samaj Party and uttar pradesh assembly elections 2022
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