गुदड़ी के लाल 'गोपाल कृष्ण रोनांकी', घनघोर गरीबी के बाद UPSC में पाई 3rd रैंक

नई दिल्‍ली। कहते हैं च‍िरागों को रोशनी की जरूरत नहीं पड़ती। एक छोटी सी लौ ही उनके ल‍िए काफी होती है। जरा सा इशारे में ही सफलता उनके कदम चूमती है। हां लेकिन सोच और जज्‍बा बहुत कुछ अलग होना चाहिए तभी आप ऐसा कर सकते हैं। ऐसे ही जज्‍बे का एक जीता जागता उदाहरण हैं 30 साल के गोपाल कृष्ण रोनांकी। उन्‍होंने अपने पक्‍के इरादों से UPSC में तीसरी रैंक हासिल की है। गरीबी इस कदर थी क‍ि उनके लिए पढ़ाई पूरी करना और सफलता हासिल करना कोई आसान बात नहीं थी। लेकिन उनकी द‍िशा कभी भ्रमित नहीं हो पाई। वह लगातार आगे बढ़ते गए।

अंधेरे में गुजरा बचपन लेकिन उम्‍मीदों की लौ से पाई सफलता

गर्वनमेंट स्‍कूल का बैकग्राउंड कभी नहीं आया आड़े

गोपाल को चौथे अटेंप्‍ट में यह सफलता म‍िली है। लेकिन बड़ी बात यह है क‍ि उन्‍होंने तेलुगुभाषी राज्‍यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उन्‍होंने सर्वोच्‍च स्‍थान हासिल क‍िया है। वह आंध्र प्रदेश के एक गरीब किसान के बेटे हैं। उनकी पढ़ाई प्राइमरी स्‍कूल में पूरी हुई। क्‍योंकि इतना पैसा नहीं था क‍ि वह कॉन्‍वेंट स्‍कूल में पढ़ाई कर पाते। आईएएस बनने के पहले रोनांकी पिछले 11 सालों से एक प्राइमरी स्‍कूल के टीचर थे। दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद वह घर वापस आते और अपनी पढ़ाई में जुट जाते। रोनांकी का कहना है क‍ि नौकरी इसलिए करता था क्‍‍योंकि वह मेरी जरूरत थी।

सेल्‍फ स्‍टडी से हासिल की सफलता

रोनांकी के पेरेंट़स को हालांकि इस बात से बिल्‍कुल बेफ‍िक्र थे क‍ि वह आईएएस बनना चाहता है। लेकिन उनके पेरेंटस इस बात से ब‍िल्‍कुल अंजान थे क‍ि वह आईएएस बनने का सपना देख रहे हैं। यहां तक कि रिजल्‍ट निकलने तक नहीं पता था क‍ि वह आईएएस ऑफ‍िसर बन चुका है। हैदराबाद में गोपाल ने सिविल की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर जॉइन करना चाहा लेकिन पिछड़े इलाके से आने की वजह से किसी भी कोचिंग सेंटर ने उन्हें दाखिला नहीं दिया। गोपाल के पास सेल्फ-स्टडी के अलावा कोई चारा नहीं बचा। आखिरकार अपनी कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत गोपाल ने सिविल सर्विस एग्जाम में कामयाबी का परचम लहराया।

इंटरव्‍यू बना उनके कर‍ियर का बड़ा ब्रेक

गोपाल कृष्ण रोनांकी ने स्थानीय सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। परिवार की गरीबी का आलम यह है कि गोपाल को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ग्रैजुएशन करना पड़ा। उनका करियर में टर्निंग प्‍वाइंट तब आया जब उन्‍होंने इंटरव्‍यू क्रैक किया। उनकी सफलता का राज उनकी कड़ी मेहनत में छिपा है। छह घंटे की लगातार मेहनत के बाद और परफेक्‍ट प्‍लानिंग के बाद वह इस रैंक पर पहुंच पाए हैं। उन्‍होंने अपनी सफलता के पीछे अपने फादर को रोल मॉडल बनाया। उनके साहस के पीछे उनके परिवार वालों का काफी सहयोग था।

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