किसान आंदोलन में सुलगते मध्य प्रदेश का क्या है यूपी कनेक्शन, आप भी पढ़िए

एक ओर तो केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक किसानों की आय में वृद्धि की बात करती हैं लेकिन ऐसी क्या वजह रही कि किसानों को प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आना पड़ा।

नई दिल्ली। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में किसान अपनी मांगों के लिए राज्य सरकारों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र,तमिलनाडु, पंजाब,हरियाणा और गुजरात समेत कई राज्य शामिल है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में 5 किसानों की मौत के बाद से भड़की हिंसा के चलते राज्य सरकार के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की ओर शांति की अपील आने के बाद भी लोग आगजनी और हिंसा कर रहे हैं। यहां यह बात गौर करने वाली है कि एक ओर तो केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक किसानों की आय में वृद्धि की बात करती हैं लेकिन ऐसी क्या वजह रही कि किसानों को प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आना पड़ा।

तो यूपी से है एमपी का कनेक्शन!

तो यूपी से है एमपी का कनेक्शन!

देखा जाए तो मध्य प्रदेश में फिलहाल सरकार न्यूनमत समर्थन मूल्य बढ़ाना नहीं चाह रही है जिसके कारण किसान नाराज हैं और लगातार राज्य के एक जिले से दूसरे जिले में हिंसक प्रदर्शन बढ़ रहे हैं। जानकारों की माने तो देश के तमाम राज्यों किसानों के भीतर उपजे इस असंतोष की वजह उत्तर प्रदेश में किसानों का ऋण माफ करना करने की घोषणा करना है।

36,389 करोड़ रुपए की कर्जमाफी की घोषणा

36,389 करोड़ रुपए की कर्जमाफी की घोषणा

बता दें कि यूपी 19 मार्च को शपथ ग्रहण करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 36,389 करोड़ रुपए की कर्जमाफी की घोषणा कर दी थी। हालांकि अभी किसानों का ऋण आधिकारिक रूप से माफ नहीं किया गया है।

देश ने तमिलनाडु के किसानों को भी देखा

देश ने तमिलनाडु के किसानों को भी देखा

देश ने तमिलनाडु के किसानों का जंतर मंतर पर 40 दिवसीय प्रदर्शन के दौरान चूहे, सांप तक होठों तले दबाए और अपना ही मूत्र पीया था। उनकी मांग थी कि 40,000 करोड़ रुपए का राहत पैकेज और ऋण माफ किया जाए। हालांकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीसामी की ओर से मिले आश्वासन के बाद किसान वापस राज्य लौट गए थे।

गुजरात और महाराष्ट्र में ये हैं हालात

गुजरात और महाराष्ट्र में ये हैं हालात

बात गुजरात और महाराष्ट्र की करें तो यहां भी किसानों की मांग लगभग यही है और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए दूध और सब्जियां सड़क पर फेंक रहे हैं। इतना ही नहीं नोटबंदी के चलते किसानों के बीते 5-6 कारोबारी माह बेहद खराब बीते हैं। जिसके चलते उन्हें मदद की और भी सख्त जरूरत है।

पंजाब हरियाणा के ये है डिमांड

पंजाब हरियाणा के ये है डिमांड

पंजाब और हरियाणा में भी किसान कर्जमाफी और समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी समेत कई सरकारी मंचों से कह चुके हैं कि 2022 तक सरकार किसानों की आय में दोगुना वृद्धि करेगी।

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