इलाहाबाद के नाम बदले जाने पर क्या बोले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को इलाहाबाद का नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब यह शहर प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा। इलाहाबाद शहर का अपना एक इतिहास, संस्कृति एवं विरासत रही है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम का राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों के विरोध का जवाब देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि, जिन लोगों को हमारे इतिहास और संस्कृति की कम समझ है वही इस पर सवाल उठा रहे हैं।

जिन लोगों को हमारे इतिहास और संस्कृति की कम समझ है वही इस पर सवाल उठाएंगे
लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, प्रयागराज को इलाहाबाद का नाम मुगल युग में दिया गया था। इस जगह पर तीन नदियां का संगम होता है इसलिए इसका नाम प्रयागराज है। जिन लोगों को हमारे इतिहास और संस्कृति की कम समझ है वही इस पर सवाल उठाएंगे। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि संत लगातार इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयाग करने की मांग उठा रहे थे। जिसके चलते सरकार ने यह फैसला लिया है।

ये परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ है
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि प्रयाग कुंभ का नाम केवल प्रयागराज किया जाना और अर्द्धकुंभ का नाम बदलकर 'कुंभ' किया जाना परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा, राजा हर्षवर्धन ने अपने दान से प्रयाग कुंभ का नाम किया था और आज के शासक केवल 'प्रयागराज' नाम बदलकर अपना काम दिखाना चाहते हैं। इन्होंने तो 'अर्धकुंभ' का भी नाम बदलकर 'कुंभ' कर दिया है। ये परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ है।

राज्यपाल ने भी दी सहमति
यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने भी अपनी सहमति दे चुके हैं। यूपी सरकार कुम्भ मेले से पहले ही इलाहाबाद का नाम बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही थी। हाल ही में मुख्यमंत्री ने इलाहाबाद में राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता वाली कुंभ मार्गदर्शकर मंडल की बैठक के बाद इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने का एलान किया था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार 16 वीं सदी के पूर्व इलाहाबाद को प्रयाग व प्रयागराज के नाम से ही जाना जाता था। लेकिन 1526 में यह पौराणिक भूमि मुगलों के अधीन हो गई। तब मुगल शासक अकबर ने इस ऐतिहासिक नगरी का नाम बदलकर अल्लाहाबाद कर दिया। अंग्रेजी में आज भी इसे अल्लाहाबाद ही कहा जाता है, लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे इलाहाबाद कहा जाने लगा और यही नाम अब सरकारी अभिलेखों में दर्ज है।












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