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अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व की कमी पर UNSC को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता: भारत

नई दिल्ली। इस वर्ष की पहली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में बोलते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि अफ्रीकी संघ, अफ्रीका में शांति और संघर्ष के बाद के पुनर्निर्माण को मजबूत करने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाता है। इसके साथ ही शांति और सुरक्षा बनाए रखने की चुनौतियों पर बोलते हुए UNSC में विदेश सचिव ने कहा कि प्रमुख ड्राइविंग कारक पुरानी राजनीतिक अस्थिरता हैं। कमजोर शासन संरचनाएं, संस्थागत कमजोरियां जातीय विभाजन और आतंकवादी और सशस्त्र समूहों की मौजूदगी विश्व में शांति कायम करने में बाधा बन रही है।

UNSC needs to introspect on African countries lack of representation said Harshvardhan Shringla

उन्होंने आगे कहा, 'परिषद को यह आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है कि जबकि देश के आधे से अधिक मुद्दे परिषद के एजेंडे पर अफ्रीका से संबंधित हैं। अफ्रीकी महाद्वीप के पास अपने स्वयं के हितों की रक्षा के लिए स्थायी सदस्यता के बीच एक भी आवाज नहीं है। हमें चाहिए कि हम इस ऐतिहासिक विसंगति को ठीक करें और सामूहिक रूप से एजुलिनी सहमति का समर्थन करें। श्रृंगला ने आगे कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आम चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्षेत्रीय संगठनों के सहयोग से, देशों द्वारा अपनाए गए क्षेत्रीय दृष्टिकोण के प्रति सम्मानपूर्वक रहना चाहिए।

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बैठक में कहा, घटते संसाधनों का अधिक दोहन मुख्य रूप से लेक चाड बेसिन और ग्रेट लेक्स क्षेत्र में समस्या भी बढ़ रही है। लिबियाई संघर्ष और परिणामस्वरूप अस्थिरता का इसके पड़ोसी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, इस बीच कोरोना वायरस ने कुछ देशों में स्थिति और बदतर बना दी है। उन्होंने कहा, सुरक्षा परिषद को देशों द्वारा अपनाए गए क्षेत्रीय दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए क्षेत्रीय संगठनों के साथ मिलकर आम चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

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उन्होंने आगे कहा कि भारत अफ्रीका की आकांक्षाओं का समर्थन करना जारी रखेगा और एक ऐसे भविष्य के लिए अफ्रीका को सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगा, जो गरिमा और सम्मान के साथ समावेशीता, स्थिरता, पारदर्शिता और सामाजिक-आर्थिक विकास के सिद्धांतों पर स्थापित है। कई शताब्दियों पहले से चली आ रही भारतीय और अफ्रीका के बीच संबंधों पर बोलते हुए हर्षवर्धन श्रृंगला कहा, यह 'साझा औपनिवेशिक अतीत और हमारी सामान्य विकास संबंधी चुनौतियां हैं, जिन्होंने भारत-अफ्रीका संबंधों को आकार दिया है। भारत ने अफ्रीकी साझेदारों के साथ मिलकर उपनिवेशवाद और रंगभेद जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए काम किया है।

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