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FAST TRACK COURT: रेप जैसे जघन्य अपराधों में क्यों हो जाती है इनकी अहम भूमिका, जानिए कुछ तथ्य

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नई दिल्‍ली। उन्‍नाव रेप केस में पीड़‍िता की मौत को उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने बेहद दुखद बताया है। उन्‍होंने इसके साथ ही कहा है कि इस मामले के आरोपी को फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा।28 नवंबर को हैदराबाद में 26 साल की वेटनेरी डॉक्‍टर के गैंगरेप और उनकी हत्‍या करने वाले चारों आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। इस मामले से अलग उन्‍नाव के रेप केस मामले ने भी देश में तूल पकड़ लिया। देश में एक बार फिर से फास्‍ट ट्रैक कोर्ट को लेकर कई तरह की बातें होने लगी हैं। जानिए क्‍या होते हैं फास्‍ट ट्रैक कोर्ट और क्‍यों इनकी शुरुआत की गई थी?

 साल 2004 में हुई शुरुआत

साल 2004 में हुई शुरुआत

देश में फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स की शुरुआत साल 2000 में की गई थी। उस समय इन कोर्ट्स को शुरू करने का मकसद देश की निचली अदालतों में अटके मुकदमों को अंजाम तक पहुंचाना था। एक अनुमान के मुताबिक तीन करोड़ से ज्‍यादा केस ऐसे हैं जो अभी तक किसी भी निष्‍कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। साल 2000 में 11वें वित्‍त आयोग के तहत इस तरह के 1734 फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स की मंजूरी दी गई थी। लेकिन साल 2005 तक इसमें से सिर्प 1562 अदालतें ही अस्तित्‍व में आ सकी। दिलचस्‍प बात है कि उस समय तक इस प्रयोग को बंद करने की तैयारी हो चुकी थी।

निर्भया गैंगरेप ने बदली तस्‍वीर

निर्भया गैंगरेप ने बदली तस्‍वीर

साल 2005 में केंद्र सरकार ने अगले छह वर्षों से यानी साल 2011 तक इन अदालतों को वित्‍तीय पोषण जारी रखने का मन बनाया। साल 2011 तक सिर्फ 1191 फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स काम कर रहे थे। फिर 16 दिसंबर 2012 की त्रासदी हुई और सबकुछ बदल गया। 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप और फिर निर्ममता से उसकी हत्‍या ने सरकार को अपने फैसले पर पुर्नव‍िचार करने के लिए मजबूर कर दिया। इस केस ने फास्‍ट ट्रैक कोर्ट्स को एक नई दिशा दी।

 कुछ और नए कोर्ट्स का ऐलान

कुछ और नए कोर्ट्स का ऐलान

केंद्र सरकार ने इन अदालतों की समय-सीमा साल मार्च 2015 तक बढ़ाने का फैसला किया। सरकार की तरफ से जजों की तनख्‍वाह के लिए 80 करोड़ रुपए तक की पेशकश भी की गई। इसके साथ ही एक आदेश पास किया गया जिसके तहत दिल्‍ली में छह फास्‍ट ट्रैक अदालतों को सेट करने का निर्देश दिया गया। इन सभी अदालतों को खास तौर पर यौन उत्‍पीड़न और बलात्‍कार जैसे केसेज से निबटने के लिए ही तैयार किया गया था। शुक्रवार को केंद्र सरकार की तरफ से संसद को जानकारी दी गई है कि उसने 1,023 फास्‍ट ट्रैक स्‍पेशल कोर्ट्स के लिए मंजूरी दी जहां पर सिर्फ रेप केसेज का ही समाधान किया जाएगा।

 केंद्र और राज्‍य सरकार का योगदान

केंद्र और राज्‍य सरकार का योगदान

केंद्रीय महिला एवं बाल कल्‍याण मंत्री स्‍मृति ईरानी की तरफ से सदन को बताया गया कि राज्‍य और केंद्र सरकार की तररफ से इस स्‍कीम के तहत आन वाले 767.25 करोड़ रुपए के खर्च को उठाया जाएगा। ईरानी की मानें तो केंद्र सरकार की तरफ से करीब 474 करोड़ का योगदान दिया जाएगा।

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English summary
Hyderabad encounter: Know all about fast track courts for speedy trails of cases like rape and gangrape.
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