मणिपुर गए विपक्षी प्रतिनिधिमंडल पर बरसे अनुराग ठाकुर, कहा- पिछली सरकार में पूर्वोत्तर जला तब कोई नहीं बोला
मणिपुर में हिंसा की स्थिति का जायजा लेने के लिए गए 21 विपक्षी प्रतिनिधिमंडल पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में जब पूर्वोत्तर जला तब कोई कुछ नहीं बोला।
विपक्षी गठबंधन इंडिया के 21 सांसद शनिवार सुबह हिंसा प्रभावित मणिपुर के दो दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। इस पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल पर जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब उनके शासन के दौरान पूर्वोत्तर जल रहा था तो उन्होंने कभी कुछ नहीं बोला।
शनिवार को पश्चिम बंगाल में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये यात्रा सिर्फ एक दिखावा है। जब मणिपुर पिछली सरकारों के तहत जल गया तो विपक्षी गठबंधन ने कभी बात नहीं की।

इसके साथ ही कांग्रेस के लोकसभा सांसद अधीर रंजन पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि अधीर रंजन जो शनिवार को मणिपुर का दौरा करने वाले 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। क्या वो साथी विपक्षी नेताओं को पश्चिम बंगाल की इसी तरह की यात्रा पर ले जाने को तैयार हैं, जो पंचायत चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा और रक्तपात का गवाह रहा है।
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इसके साथ ही अनुराग ठाकुर ने कहा कि एक बार जब वे मणिपुर से लौट आएंगे तो मै अधीर रंजन चौधरी से उन्हें पश्चिम बंगाल भी लाने का अनुरोध करूंगा। मै उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वो पश्चिम बंगाल में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का समर्थन करते हैं।
गौरतलब है कि प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेताओं के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी जिस पर पंचायत चुनाव के दौरान और उसके बाद महिलाओं पर अत्याचार और हिंसा के आरोप लग रहे हैं।
कांग्रेस शासित राज्य में महिलाओं के खिलाफ हाल के अपराधों को लेकर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि क्या इंडिया गठबंधन भी राजस्थान का दौरा करने की योजना बना रहा है, जहां महिलाओं के खिलाफ नियमित हत्याएं और अपराध हो रहे हैं।
वहीं, मणिपुर यात्रा पर गए 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पर विपक्ष का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्य में जमीनी स्तर पर स्थिति को समझना है। पूर्वोत्तर राज्य जातीय हिंसा से जूझ रहा है, जो मणिपुर हाई कोर्ट के एक आदेश पर भड़क गई थी। जिस आदेश में कहा गया कि राज्य सरकार से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की सूची में जोड़ने पर विचार करने के लिए कहा गया था।












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