UCC पर पार्टियों का रुख क्या है, कौन बीजेपी के साथ और कौन विरोध में?
Uniform Civil Code in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की जरूरत बताए जाने के बाद बीजेपी ने इसपर पार्टी के अंदर और देशभर में विभिन्न समूहों के साथ चर्चा तेज कर दी है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड बीजेपी की स्थापना के दिनों से उसके प्रमुख तीन एजेंडों में शामिल है। अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 की समाप्ति यह दोनों संकल्प पहले ही पूरे हो चुके हैं। अब बारी समान आचार संहिता की है, जिसको लेकर खुद पीएम मोदी की ओर से राजनीतिक बैटिंग शुरू कर दी गई है।

यूसीसी पर बीजेपी का स्टैंड
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ईटी से कहा है, 'यूसीसी पर पीएम ने जो कुछ भी कहा है, वह संविधान के अनुसार है और आर्टिकल 44 में उसका जिक्र है।' बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी के मुताबिक, 'संविधान सभा से लेकर संसद तक, सड़कों से लेकर सिविल सोसाइटी और सुप्रीम कोर्ट तक, कई मौकों पर यूसीसी की मांग की गई है और आवश्यकता जताई गई है। हालांकि, इस पर सांप्रदायिक भ्रम पैदा किए जाने से संवैधानिक प्रतिबद्धता का अपहरण हो गया और यूसीसी संविधान का हिस्सा बनने के बजाय नीति-निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा बनकर रह गया।'
पार्टी के एक और नेता अर्जुन सिंह का कहना है, 'यूसीसी हमारे घोषणापत्र का हिस्सा रहा है। यह एक वैचारिक प्रतिबद्धता है। यूसीसी से 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना और मजबूत होगी'
समान नागरिक संहिता पर कांग्रेस का स्टैंड
कांग्रेस यूसीसी के विरोध में खड़ी है। पार्टी का कहना है कि यह अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए 'एजेंडा पर चलने वाली बहुसंख्यकवादी सरकार' की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, 'बीजेपी के शब्दों और कर्मों की वजह से देश आज विभाजित है। लोगों पर यूसीसी थोपने से यह विभाजन और बढ़ेगा। पीएम ने राष्ट्र की तुलना एक परिवार से की है, जबकि यूसीसी पर जोर दे रहे हैं....एक परिवार में भी विविधता होती है।'
यूसीसी पर AAP का स्टैंड
दिल्ली और पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी ने 'सैद्धांतिक तौर पर' समान आचार संहिता का समर्थन किया है। पार्टी नेता संदीप पाठक के मुताबिक, 'एएपी सैद्धांतिक रूप से यूसीसी का समर्थन करती है। आर्टिकल 44 भी इसका समर्थन करता है। हमें लगता है कि इसे तभी ही लागू किया जाना चाहिए, जब इसपर सर्वसम्मति हो।'
यूसीसी पर शिवसेना (यूबीटी) का रुख
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यूसीसी पर उनसे मिलने पहुंचे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोगों से कहा है कि उनकी पार्टी इसका समर्थन करती है। लेकिन, इसका विभिन्न समुदायों पर क्या असर पड़ेगा, इसके लिए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण चाहती है।
उद्धव की पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है कि मुस्लिम प्रतिनिधियों से उद्धव ने कहा है कि बाल ठाकरे के जमाने से उनकी पार्टी इसका समर्थन कर रही है। 'उन्होंने कहा कि हालांकि पार्टी ने सैद्धांतिक तौर पर यूसीसी का समर्थन किया है, लेकिन कानून किस तरह से बनता है, यह भी महत्वपूर्ण है।'
यूसीसी पर एनसीपी का स्टैंड
समान नागरिक संहिता पर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा है, 'हमने यूसीसी का न तो समर्थन किया है और न ही विरोध। हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि इतने बड़े फैसले जल्दबाजी में नहीं होने चाहिए।' उन्होंने कहा, 'अचानक साढ़े नौ साल बाद सरकार अब यूसीसी की बात कर रही है। यह अगले चुनावों को देखते हुए एक राजनीतिक चाल है।'
यूसीसी पर शिरोमणि अकाली दल (SAD) का रुख
मोदी सरकार की पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने समान नागरिक संहिता के विचार को खारिज कर दिया है। उसके मुताबिक इससे अल्पसंख्यकों और आदिवासियों पर असर पड़ेगा। पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, 'हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि संविधान निर्माताओं ने यूसीसी को मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया। इसे समवर्ती सूची में रखा गया और नीति निर्देशक सिद्धांतों में डाला गया। इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता नहीं है, इससे समाज में मतभेद पैदा होंगे।'
यूसीसी पर IUML का स्टैंड
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी समान नागरिक संहिता का विरोध किया है। पार्टी नेता ईटी मोहम्मद बशीर के मुताबिक, 'कर्नाटक चुनाव के बाद केंद्र यूसीसी का इस्तेमाल राजनीतिक रणनीति के तहत कर रहा है, जो कि चिंताजनक है।' उन्होंने कहा, यह 'चुनावी एजेंडा सेट करने की कोशिश' है, जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
यूसीसी पर जेडीयू का रुख
जदयू ने यूसीसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को 'पॉलिटिकल स्टंट' बताया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा 'हमारी पार्टी इसे आने वाले आम चुनावों के लिए पॉलिटिकल स्टंट के तौर पर देखती है और मोदी का हालिया बयान का अल्पसंख्यकों के कल्याण से कोई मतलब नहीं है।'
यूसीसी पर डीएमके का स्टैंड
तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके ने कहा है कि बीजेपी पहले हिंदुओं के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करे। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, 'सरकार को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का कोई अधिकार नहीं है। अगर वह यूसीसी लाना चाहते हैं तो पहले हिंदू धर्म से शुरू करें, जहां कुछ लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता और ना ही पूजा करने दी जाती है।'












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