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UN में भी चारों खाने चित होगा पाक, पाकिस्‍तानी ही करेंगे इमरान को क्लीन बोल्‍ड!

बेंगलुरु। कश्‍मीर मुद्दे पर सभी अंतराष्‍ट्रीय मंचों पर जलील होने के बाद पाकिस्‍तान की आखिरी उम्मीद न्‍यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्‍ट्र महासभा की बैठक पर टिकी हैं। पाकिस्तान पहले ही बोल चुका है कि वह आमसभा में भी कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का मुद्दा उठाएगा। लेकिन पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के बयानों ने ही पाकिस्‍तान की इस आखिरी उम्मीद पर पानी फेर दिया हैं। विदेशी धरती अमेरिका पहुंचने के बाद से ही पीएम इमरान की हो रही फजीहत से पाकिस्‍तान ने रही सही इज्जत भी गंवा दी हैं। यूएन बैठक में भारत तो उसे वैश्विक आतंकवाद को लेकर घेरेगा वहीं इमरान को उन्‍हीं के देश के लोग बेकनाब करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।

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मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र महासभा 74वीं बैठक 24 सितंबर से शुरू हो चुकी है जो आगामी 30 सिंतबर तक चलेगी।। कल यानी कि शुक्रवार की आमसभा की बैठक भारत और पाकिस्‍तान के लिए काफी अहम हैं। इस आमसभा में भारत और पाकिस्‍तान के अलावा दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह आम सभा पर पूरी दुनिया की निगाहें इसलिए टिकी हुई हैं कि कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाएं जाने के बाद इस बैठक में भारत और पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री का पहली बार आमना सामना होगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान महसभा को संबोधित करने का मौका मिलेगा। इस आमसभा में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी पहले संबोधित करेंगे। पाक पीएम इमरान खान को उनके बाद सभा को संबोधित करने का मौका दिया जाएगा।

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पाकिस्‍तानी ही करेंगे पाक पीएम इमरान को बेनकाब

गौर करने वाली बात यह हैं कि पाकिस्तान पहले ही बोल चुका है कि वह आमसभा में भी कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का मुद्दा उठाएगा। महासभा के अंदर एक तरफ इमरान खान, जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत को घेरने का प्रयास करेंगे।दूसरी तरफ उन्हीं के देश के हजारों लोग पाक पीएम को संयुक्त राष्‍ट्र संगठन के बाहर बेकनाब करने का मंसूबा बना चुके हैं। शुक्रवार को यूएन के बाहर सुबह नौ बजे हजारों की संख्‍या में पाकिस्‍तानी नागरिक विरोध प्रदर्शन करके पाक पीएम को बेनकाब करेंगे।

इमरान के खिलाफ इस मोर्चे की तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही हैं। पाकिस्‍तानियों द्वारा इसके लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे इस अभियान में कहा गया है कि पूरा देश पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हो रहा है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों द्वारा यूएनओ के बाहर इमरान खान के खिलाफ किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन का समय सुबह नौ बजे और तिथि 27 सितंबर निर्धारित की गयी है। मतलब कल महासभा की बैठक शुरू होने से पहले और इमरान खान के संबोधन से पहले ही उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका होगा। विदेशी धरती पर रहने वाले हजारों पाकिस्‍तानी नागरिक इस अवसर पर इमरान को बेकनाब करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।

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पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार में हो रहे अत्याचार के खिलाफ इंटरनेट पर चलाई जा रही मुहिम को लोगों का काफी साथ मिल रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान के ही बलोच, गिलगिट बल्टिस्तान, मोहाजिर, पश्तून, सारिकी और सिंधी समुदाय के लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों ने भी इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है। पाकिस्तान के ही मशहूर लेखक और विश्लेषक तारेक फतह ने इस मुहिम को अपने ट्वीटर हैंडल से रिट्वीट किया है। साथ ही उन्होंने लिखा इस मुहिम में साथ देने का भी वादा किया है।

विदेशी धरती पर यह इमरान खान के विरोध का पहला मौका नहीं हैं । यूएनओ में होने वाले इस विरोध प्रदर्शन से पहले भी पाकिस्तान को जेनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी ) के बाहर इसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ा था। ऐसे ही कुछ संगठनों द्वारा पिछले महीने ब्रिटेन में भी विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान पाकिस्तान के रेल मंत्री फवाद चौधरी को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा था। 27 अगस्त को बलोच नेताओं ने जर्मनी में भी पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

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वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्‍तान होगा चित्त

चूंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी पाकिस्तान से पहले महासभा को संबोधित करेगे इसलिए माना जा रहा हैं कि इस दौरान भारत वैश्विक आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को बिना नाम लिए घेरने का प्रयास कर पाकिस्‍तान की बोलती बंद कर देगा। बता दें विगत रविवार को ह्यूस्‍टन में अयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम में अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्‍तान का नाम लिए बिना उसे आतंकवाद के मुद्दे पर निशाना साधा था।

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चूंकि पांच अगस्‍त को जम्मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद बौखलाहट में पाकिस्‍तान लगातार भारत में आतंकवादी घुसपैठ कर रहा हैं। इतना हीं नहीं भारत पाक सीमा पर लगातार सीज फायद का उलंघन कर रहा हैं। ऐसी ही पाकिस्‍तान की भारत के खिलाफ कई नापाक हरकतें हैं जिन पर यूएन की बैठक में भारत पाकिस्‍तान की बखिया उखाड़ कर रख देगा। गौरतलब हैं कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे तथ्यों के सहारे भारत को घेरने की नाकाम कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की हरकतें और उसका झूठ किसी से छिपा नहीं है। यही वजह है कि कश्मीर मुद्दे पर उसे दुनिया के किसी देश का साथ नहीं मिला। इमरान खान खुद भी ये बात स्वीकार चुके हैं।

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पाकिस्तान जितना नीचे गिरेगा, भारत का कद उतना ही बढ़ेगा

कुछ ऐसे ही संकेत गुरुवार को न्यूयॉर्क में मीडिया से रुबरु संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने दे दिया हैं। पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाए जाने की संभावनाओं को लेकर सैयद अकबरुद्दीन मीडिया के सवालों को जवाब दे रहे थे। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि क्या आप उम्मीद करते हैं कि यूएनजीए में कश्मीर का मुद्दा उठेगा! अगर ऐसा होता है तो भारत उससे निपटने के लिए क्या करेगा?

अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान जितना नीचे गिरेगा, भारत का कद उतना ही बढ़ेगा। उनको ठोकर मिलती है, भारत उतना ही आगे बढ़ता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जहर की कलम बहुत लंबे समय तक काम नहीं करती है।

उन्होंने कहा, 'हमने उन्हें देखा है..अतीत में आतंकवाद को...और अब जो आप मुझे बता रहे हैं कि वे नफरत फैलाने वाले भाषण को मुख्यधारा में लाना चाहते हैं। अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो यह उनकी कॉल है। जहर पेन बहुत लंबे समय तक काम नहीं करते हैं। हमें भरोसा है कि हम उनको करारा जवाब देंगे। हमारा जवाब उनसे कही ऊपर होगा, हम कम नहीं पड़ने वाले हैं।' उन्‍होंने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के मुद्दे से निपटने के लिए एकजुट होकर कार्य करना चाहेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद हमेशा भारत के आंतरिक मामलों का प्रमुख विषय है क्योंकि हमारे लोगों ने बहुत नुकसान उठाया है। हम चाहेंगे कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इन मुद्दों के समाधान के लिए एकजुट होकर कार्य करे।

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