लॉकडाउन में दो-तिहाई गैर-कोविड रोगियों को हुईं ये बड़ी दिक्कतें: ICMR की रिसर्च में हुआ खुलासा
नई दिल्ली, 9 अगस्त। कोरोना से बचाव के देश भर में मार्च 2020 से लेकर अब तक कई बार कम्पलीट लॉकडाउन लगाया गया। हालांकि कोरोना मामलों को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन जरूरी था लेकिन इससे गैर कोविड रोगियों को अपने इलाज और हेल्थ की देखभाल में काफी दिक्कतें उठानी पड़ी। आईसीएमआर की हालिया अध्ययन रिपोर्ट में ऐसा ही खुलासा हुआ है। जिसमें बताया गया है कि लॉकडाउन ने दो-तिहाई गैर-कोविड रोगियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल में बड़ी बाधा उत्पन्न की।

ICMR के एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के दो-तिहाई मरीज जो महामारी के दौरान अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को नियमित जांच, अस्पतालों तक पहुंच के साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
निष्कर्षों से पता चला है कि लगभग दो-तिहाई प्रतिभागियों में 69% अपनी 69 नियमित जांच नहीं करवा सके, 67% डे-केयर प्रक्रियाओं और 61% अस्पताल तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ICMR सर्वेक्षण में पाया गया कि 59% लोग ऐसे थे उन्हें डॉक्टरों का अप्वाइनमेंट नहीं मिला। वहीं 56% को इमरजेंसी इलाज , 47% फार्मेसी यानी दवा नहीं मिली और 46% स्वास्थ्य सेवा में देरी और परेशानी होने की बात कही।
37% प्रतिभागियों ने माना कि वे सामाजिक प्रतिबंध/लॉकडाउन के कारण देखभाल तक नहीं पहुंच सके, 29% ने अस्पतालों में जाने के लिए एक बाधा के रूप में वित्त की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया और 16% ने कोविड -19 संक्रमण के डर से अस्पताल जाने से परहेज किया।आईसीएमआर के निष्कर्षों ने आगे दिखाया है कि पुरानी गैर-संचारी बीमारियों वाले लोगों को महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आईसीएमआर की इस रिपोर्ट में महामारी और लॉकडाउन के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से संबंधित समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। देश में कोविड -19 मामलों की पहली लहर के दौरान मार्च 2020 में भारत पूर्ण राष्ट्रव्यापी तालाबंदी में चला गया। तब से, लॉकडाउन एक साल से अधिक समय से चल रहा है और वायरस फैलने पर विभिन्न प्रतिबंधों और छूटों का आदेश दिया जा रहा है।












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